पालिशर की कमी से जूझ रहा निर्यात कारोबार

Moradabad Updated Fri, 08 Jun 2012 12:00 PM IST
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मुरादाबाद। एक जमाना था जब मेटल हैंडीक्राफ्ट उत्पाद से जुड़े सभी कार्य के लिए लेबर आसानी से मिल जातेे थे। लेकिन अब ऐसा नहीं है। बदलते समय के साथ मजदूरों का रुझान महत्वपूर्ण काम से घटने लगा। जिसका खासा असर मेटल हैंडीक्राफ्ट उद्योग क्षेत्र में इन दिनों देखने को मिल रहा है। मेटल हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट का क्षेत्र पालिशर के अकाल से जूझ रहा है। समस्या ऐसी गंभीर हो गई है कि पालिश करने वाले तो ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। पालिशर की आई भारी कमी और उनकी मनमानी से निर्यातक और उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है।

मेटल हैंडीक्राफ्ट उत्पादों में पालिश का काम एक अहम हिस्सा है। इसके बगैर किसी भी उत्पाद को बेहतर लुक और दूसरे रंगरोगन में रंगा जाना संभव ही नहीं है। बीते कुछ वर्षों तक इस काम को सही ढंग से करने वालों की तादाद अच्छी खासी थी। लेकिन बीते तीन वर्षों में इस काम से बड़ी संख्या में मजदूरों ने मुंह मोड़ लिया। आलम यह है कि न तो अब इस काम के एक्सपर्ट हैं और न ही इस काम को कोई सीखना चाहता है। आलम यह है कि जो भी इस क्षेत्र में एक्सपर्ट थे उन्होंने अपना फील्ड ही बदल डाला। इसका असर उनके शागिर्दों पर भी खूब पड़ा। उस्ताद को फील्ड बदलता देख शागिर्द भी उनके पीछे हो लिए। जिससे महानगर में पालिशर की भयंकर अकाल पड़ गयी। इस संकट से घिरे एक्सपोर्ट हाउस के पास फिलहाल इसका कोई विकल्प नहीं है। वे जैसे-तैसे और मान मुन्नवल कर काम कराने को मजबूर हैं। उनकी कोई भी कोशिश रंग नहीं ला रही है। पालिश का काम में देरी आम बात हो गई है।
आखिर क्यों आई कमी-
पालिशर की कमी के पीछे स्वास्थ्य और उचित पारिश्रमिक मूल वजह है। पालिश का काम विभिन्न केमिकल्स के सहारे मशीन से होता है। पालिश में मिश्रित केमिकल्स स्वास्थ्य पर धीरे-धीरे असर डालते हैं। जिसका असर 40-45 के बीच साफ दिखने लगता है। हालांकि एक्सपोर्ट हाउस की ओर से पालिश के कार्य के दौरान हर संभव सुविधा और व्यवस्था की गई है। बावजूद इसके अब कोई इस काम को नहीं करना चाहता है और न ही कोई सीखना चाहता है।
समस्या के निदान -
अत्याधुनिक मशीन और सरकार की ओर से पालिश दस्तकारों के लिए विशेष आर्थिक सहयोग और स्वास्थ्य योजना और बीमा। निजी स्तर पर वर्कशाप और ट्रेनिंग आदि।
क्या कहते हैं निर्यातक -
एक्सपोर्ट एसोसिएशन के सचिव सतपाल का कहना है कि मेटल एक्सपोर्ट पर यह बड़ा संकट है। ठेके पर भी काम समय पर नहीं हो रहा है। वजह उनके पास भी मजदूर नहीं है। मनमाफिक मजदूरी पर भी पालिशर तैयार नहीं हो रहे।
सतीश धीर- यह संकट मेटल हैंडीक्राफ्ट के समक्ष गहरा होता जा रहा है। भविष्य संकट में है। पालिश के बगैर कोई उत्पाद पूर्ण नहीं है। इससे निपटने के लिए सरकार को ही सहयोग करना होगा। सीधे तौर पर जब तक पालिशर को लाभ जब तक नहीं दिया जाएगा समस्या को समाधान नहीं हो सकता।
सुदेश्वर सरन- यह एक गंभीर समस्या निर्यातकों के समक्ष आई है। मुरादाबाद का मेटल हैंडीक्राफ्ट निर्यात का कारोबार खतरे में है। इसका विकल्प ढूंढने के लिए सरकार और निर्यातकों को गंभीरता से जुटना होगा।

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