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हमले के वक्त डीआईजी को छोड़ गए थे अकेला

Moradabad Updated Tue, 05 Jun 2012 12:00 PM IST
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मुरादाबाद। पिछले साल मैनाठेर में बवाल के दौरान डींगरपुर में डीआईजी एके सिंह को भीड़ में फंसा छोड़ भागने वाले सात पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर दिया गया है। इनमें से एक हेड कांस्टेबल पहले ही रिटायर हो चुका है।
इस मामले में डीआईजी की गारद को घटना के महीने भर बाद निलंबित किया गया था। बाद में उनकी बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। महानगर में हुए दंगे के कारण इस प्रक्रिया को रोक दिया गया था। बाद में धारा 14(1) के तहत जांच तत्कालीन एसपी सिटी पीयूष श्रीवास्तव ने की। एसपी सिटी ने सशस्त्र पुलिस के हेड कांस्टेबल 62 रमेश चंद्र, 64 प्रदीप तोमर, कांस्टेबल 235 दिलीप सिंह, 231 विक्रम सिंह, ड्राईवर धर्मपाल व जयवीर सिंह की बर्खास्तगी की संस्तुति की थी। फोटोग्राफर कांस्टेबल सुरेंद्र सिंह के पास रायफल न होने की बात कहते हुए इसके खिलाफ अनुशासनात्मक दंड देने की सिफारिश की गई। इनमें से हेड कांस्टेबल रमेश चंद्र तो अक्टूबर में ही रिटायर हो चुका है। चुनाव आने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया था।
कप्तान सुनील कुमार गुप्ता ने पूरे मामले में विधिक राय मांगी थी। इसमें भी इनकी बर्खास्तगी की संस्तुति की गई थी। सोमवार को कप्तान ने फोटोग्राफर कांस्टेबल सुरेंद्र सिंह समेत सभी सातों पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी के आदेशों पर दस्तखत कर दिए। कप्तान ने बताया कि चूंकि रमेश चंद्र रिटायर हो चुका है। इसके चलते उसको रिटायरमेंट के वक्त मिलने वाले सभी देयकों से वंचित कर दिया गया है।


क्या था मैनाठेर कांड
जिले के इतिहास पर कालिख की तरह चस्पा हो चुकी यह घटना छह जुलाई वर्ष 2011 की है। मैनाठेर पुलिस ने छेड़छाड़ के एक मामले में आरोपी की गिरफ्तारी को क्षेत्र के ही एक गांव में दबिश दी थी। अभियुक्त के परिजनों ने दबिश के दौरान पुलिस पर धार्मिक पुस्तक के अपमान का आरोप लगाया था। जिस पर गुस्सा भड़क गया था और एक वर्ग के लोगों ने मुरादाबाद - संभल मार्ग को तीन जगहों पर जाम कर मैनाठेर थाने पर आगजनी कर दी थी। डींगरपुर में हिंसक भीड़ ने पुलिस चौकी और पीएसी के वाहनों में आग लगा दी थी। बवाल को कंट्रोल करने के लिए तत्कालीन डीएम राजशेखर साथी डीआईजी अशोक कुमार सिंह के साथ मय फोर्स मौके पर रवाना हुए थे। दोनों अफसर एक ही कार में सवार थे। डींगरपुर तिराहे पर भीड़ द्वारा पीएसी के वाहन को फूंकता देख दोनों अधिकारी यहां भीड़ को समझाने के लिए रुके थे। लेकिन हिंसक भीड़ ने हमला बोल दिया। डीएम राजशेखर और डीआईजी के हमराह पुलिस वाले भी डीआईजी को हिंसक भीड़ के बीच तन्हा फंसा छोड़कर वापस लौट आए थे। भीड़ ने डीआईजी को मरणांसन्न हालत में पहुंचा दिया था। भीड़ ने डीआईजी पर फायर भी झोंके थे। जख्मी डीआईजी को तीन महीने तक बिस्तर पर रहना पड़ा था।


आईपीएस एसोसिएशन ने सीएम से की थी शिकायत
मुरादाबाद। मैनाठेर कांड में डीआईजी को हिंसक भीड़ के बीच तन्हा फंसा छोड़ आने की वजह से पुलिस महकमे में डीएम राजशेखर के खिलाफ गुस्सा भर गया था। पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों के बीच में एक अघोषित लकीर खिंच गई थी। बाद में आईपीएस एसोसिएशन ने डीएम के व्यवहार को कायरतापूर्ण बताते हुए मुख्यमंत्री से उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

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