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ये अफसर हैं या सुपरमैन

Moradabad Updated Wed, 23 May 2012 12:00 PM IST
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मुरादाबाद। प्रदेश में पचास से अधिक अफसर ‘सुपरमैन’ बन गए हैं। दरअसल इनकी मूल तैनाती जहां है वहां से सैकड़ों मील दूर दूसरे जिले का भी चार्ज संभाले हुए हैं। चार्ज लेने के बाद वह उस जिले में गए तो यदा कदा ही हैं लेकिन ‘कार्यवाहक मुखिया’ का ताज इन्हीं के सिर है। हकीकत में प्रदेश भर में चार्ज का यह कागजी खेल खूब खेला जा रहा है। खाली कुर्सी पर उधार का अफसर बैठाने की यह व्यवस्था सरकारी कामकाज को भी प्रभावित करने लगी है। अफसर तो यह भी नहीं जान पाते कि उनके मातहतों की सूरतें कैसी हैं..हां फोन पर जिम्मेदारी समझने और समझाने का काम जरूर चल रहा है।

इसे अफसरों की कमी मानें या तैनाती में झोल लेकिन प्रदेश के पचास से अधिक विभाग सिर्फ चार्ज के सहारे चल रहे हैं। सबसे बुरी स्थिति सप्लाई डिपार्टमेंट, कृषि विभाग, मत्स्य विभाग, गन्ना विभाग, चकबंदी महकमा, सिंचाई और होमगार्ड विभाग में हैं। प्रदेश में होमगार्ड कमांडेंट के ही 19 पद रिक्त हैं। इन जगहों पर पड़ोसी जिलों के कमांडेंट को अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। पांच डिवीजनल कमांडेंट भी दूसरे मंडलों की कमान संभाले हुए हैं। 14 जिलों में डीएसओ नहीं है। यहां भी अधिकांश में पास वाले जिले के अफसरों पर अतिरिक्त चार्ज है। जिला भूमि संरक्षण अधिकारी के भी 28 पद खाली हैं। यहां अगर हम सभी का जिक्र करेंगे तो खबर बोझिल हो जाएगी। लिहाजा उदाहरण के लिए मंडलीय स्तर के चंद अफसरों की कर्मठता को हम आपके सामने पेश कर रहे हैं।




अफसर मूल तैनाती अतिरिक्त चार्ज
उपायुक्त खाद्य मुरादाबाद सहारनपुर
उपायुक्त खाद्य आगरा अलीगढ़
उपायुक्त खाद्य वाराणसी इलाहाबाद
उपायुक्त गन्ना बरेली मुरादाबाद
उपायुक्त गन्ना सहारनपुर मेरठ
उपायुक्त गन्ना फैजाबाद देवीपाटन
उपायुक्त गन्ना बस्ती गोरखपुर
डिवीजनल कमांडेंट होमगार्ड मुरादाबाद बरेली
एडीजी पीटीसी मुरादाबाद मेरठ
सीओ एंटीकरप्शन बरेली मुरादाबाद
मुख्य अभियंता पूर्वी गंगा मुरादाबाद अलीगढ़
डिप्टी डायरेक्टर मत्स्य आगरा अलीगढ़
डिप्टी डायरेक्टर मत्स्य फैजाबाद देवीपाटन
डिप्टी डायरेक्टर मत्स्य झांसी चित्रकूट




एक कागज साइन कराने को होती लंबी दौड़
मुरादाबाद। अफसरों की कमी के कारण तैयार हुई इस जुगाड़ की व्यवस्था ने विभागीय कामकाज को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। अगर किसी बाबू को कोई फाइल साइन करानी होती है तो उसे एक लंबा सफर तय करना होगा। कई बार तो एक कागज को आगे बढ़ाने में भी हफ्तों का वक्त लग जाता है।
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