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रेलवे की पटरियां बन गईं गोविंद नगर का ‘शोक’

Moradabad Updated Mon, 07 May 2012 12:00 PM IST
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मुरादाबाद। रेल पटरियों के किनारे ही गोविंद नगर मुहल्ले का ‘जन्म’ हुआ था। पहले जब बहुत कम घर बने थे तो दिक्कत महसूस नहीं हुई लेकिन जैसे-जैसे घर और आबादी बढ़ते गए यह मुहल्ला दर्द में डूबता गया। पिछले तीस सालों में शायद ही कोई ऐसा साल गुजरा हो जब इस मुहल्ले का कोेई अपना इन पटरियों पर ट्रेन से न कटा हो। हर मौत पर कई दिनों तक शोक में डूबा रहने वाला मुहल्ला 1988 से लगातार क्रासिंग गेट या अंडरपास की मांग उठाता रहा है। हैरत की बात यह है कि चाहे जनप्रतिनिधि हों या अफसर सभी को मुहल्ले की समस्या पर सहानुभूति भी होती है लेकिन समाधान अबतक ढूंढा नहीं जा सका है। चार बार अंडर पास का प्रस्ताव बनकर निरस्त हो चुका है। रविवार का आंदोलन भी उसी गहरे दर्द का इलाज ढूंढने के लिए ही किया गया था।
रेलवे का तर्क है कि पटरियां पहले बिछीं मुहल्ला बाद में बसा और कुछ दूरी पर ही ओवरब्रिज है लिहाजा लोगों को उधर से गुजरना चाहिए। हालांकि यहां अबतक हो चुकी 102 मौतों पर ‘संवेदनशील’ बनते हुए रेलवे हर बार यह कहता है कि प्रशासन जमीन और पैसा दे हम बना देंगे अंडर पास लेकिन यहां के लोग अबतक नहीं समझ पाए फिर कमी कहां रह जाती है? अपनी समस्या को बड़े स्तर पर उठाने के लिए तभी तो इसबार ट्रेन रोकने की जरूरत महसूस की गई थी। 1988 में पहली बार रेलवे फाटक बनाने के लिए यहां के लोगों ने आंदोलन शुरू किया था।

1990 में रेलवे ने 48 लाख रुपये से मैंड लेबल क्रासिंग का प्रस्ताव बनाया लेकिन रेलवे के ही सेफ्टी विभाग ने ट्रैक में कर्व बताते हुए खारिज कर दिया था। लोगों ने उम्मीद नहीं छोड़ी और दस सालों तक लगातार आंदोलन करते रहे। आमरण अनशन हुए, डीआरएमए से लेकर रेलमंत्री तक को ज्ञापन सौंपे गए। हर चुनाव में जनप्रतिनिधि भी मुद्दे को हाथों हाथ लेते लेकिन बाद में चुप्पी हो जाती। रेलवे और प्रशासन के बीच कई बार बैठकें हुईं लेकिन अंडरपास की फुटबाल बीच में ही झूल रही है।


कब क्या हुआ?
-वर्ष 1988 में शुरू हुआ रेलवे फाटक के लिए आंदोलन
-वर्ष1990 में रेलवे ने 48 लाख रुपये से मैंड लेबल क्रासिंग का प्रस्ताव बना लेकिन निरस्त
-वर्ष 2000 में रेलवे ने सर्वे कराकर 88 लाख रुपये से ‘यू’ शेप में अंडरपास का प्रस्ताव बनाया गया। नगर निगम के साथ मिलकर बनाए जाने को लेकर सहमति बनी, लेकिन इसे भी स्वीकृति नहीं मिली।
-वर्ष 2002 ‘एस’ शेप में अंडरपास बनाए जाने के लिए एक करोड़ बीस लाख रुपये का नया प्रस्ताव बना। जिस पर सहमति नहीं बनी।
-2010 नगर निगम और रेलवे ने मिलकर सर्वे के बाद दो करोड़ 59 लाख से अंडरपास बनाने प्रस्ताव बनाया। लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हुआ।

क्या कहते हैं अफसर?
गोविंदनगर में जहां अंडरपास बनाए जाने की मांग हो रही है वहां जगह की कमी के चलते निर्माण संभव नहीं है। थोड़ी ही दूर पर रोड ओवर ब्रिज बना हुआ है। उसका प्रयोग किया जाना चाहिए। दूसरी बात रेलवे को अंडरपास निर्माण पर कोई आपत्ति नहीं है। जमीन उपलब्ध कराकर रुपया डिपाजिट करा दिया जाए तो रेलवे अंडरपास बना देगा। नगर निगम और जिला प्रशासन चाहे तो खुद इसका निर्माण करा सकते हैं, रेलवे स्वीकृति के साथ इंजीनियर भी उपलब्ध कराएगा-एके सिंघल, एडीआरएम

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