तीन सौ नब्बे परिवारों के सामने रोटी का संकट

Moradabad Updated Tue, 01 May 2012 12:00 PM IST
मुरादाबाद। दूसरों को अधिकार दिलाने वाला श्रम विभाग अपने ही वर्करों की नाराजगी झेल रहा है। तीन सौ नब्बे स्कूल वर्करों को ग्यारह माह से मानदेय नहीं मिला। उनके परिवारों के सामने रोटी का संकट उत्पन्न होने लगा है। आला अफसर बजट का अभाव बताकर वर्करों को टहलाकर पल्लू झाड़ रहे हैं। आर्थिक तंगी का दंश झेल रहे वर्करों में विभाग के प्रति रोष है।
शिक्षा की धारा से वंचित बाल श्रमिकों के लिए केंद्र सरकार की ओर से महानगर में 90 स्कूल संचालित हैं। शिक्षा देने वाले वर्कर मानदेय पर नियुक्त किए गए हैं। स्कूलों की देखरेख का जिम्मा श्रम विभाग को सौंपा गया। बताया गया कि पंजीकृत प्रत्येक बच्चे को हर माह बजीफा राशि के साथ मिड डे मील का भी प्रावधान है। इसके लिए विभाग ने दो करोड़ नब्बे हजार रुपये की डिमांड केंद्र सरकार से की। जिसके सापेक्ष मात्र एक करोड़ राशि ही उपलब्ध कराई गई। जिसे बच्चों के लिए बजीफा और स्टेशनरी आदि पर खर्च कर दिया। ऐसे में स्कूलों में कार्यरत स्टाफ मानदेय से वंचित रह गया। अफसर उन्हें अगली किस्त आने पर भुगतान देने का आश्वासन देकर टहलाते रहे। सहायक श्रम आयुक्त गोपाल कृष्ण का कहना है कि धनराशि की डिमांड की जा चुकी है। बजट उपलब्ध होने के बाद ही वर्करों को मानदेय मिल सकेगा। उधर, वर्करों का आरोप है कि सरकार उनकी उपेक्षा कर रही है। जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण ग्यारह माह से मानदेय नहीं मिलना है।

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