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प्राइवेट डाक्टरों की हड़ताल

Moradabad Bureau Updated Wed, 07 Jun 2017 01:24 AM IST
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ठप रहीं प्राइवेट स्वास्थ्य सेवाएं ..इलाज को भटके मरीज
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- छह सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल पर रहे प्राइवेट डाक्टर

अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद।
नेशनल आईएमए की देशव्यापी ‘चलो दिल्ली-आईएमए मार्च’ के तहत मंगलवार को प्राइवेट डाक्टर हड़ताल पर रहे। हास्पिटल, नर्सिंग होम और क्लीनिक बंद रहे। ओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं भी ठप रहीं। यही नहीं अल्ट्रासाउंड एक्सरे और पैथोलोजी सेंटर भी बंद रहे। दूर दराज से शहर में पहुंचे मरीजों को इलाज के भटकना पड़ा। पूरे दिन मरीज एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल दौड़ते रहे, लेकिन इलाज नहीं मिला। आखिरकार मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ा।
नेशनल आईएमए के आह्वान पर छह सूत्रीय मांगाें को लेकर प्राइवेट डॉक्टर ने मंगलवार को अपने क्लीनिक और नर्सिंग होम बंद रखे। आईएमए से जुड़े सभी डाक्टर आईएमए भवन में इकट्ठा हुए। जहां डाक्टराें ने अपनी मांगे रखीं। इस दौरान शहर के लाजपतनगर, हरपाल नगर, कटघर, सिविल लाइन, कांठ रोड, मधुबनी, आशियाना में क्लीनिक और नर्सिंग होम बंद रहे। न तो ओपीडी सेवा मरीजों को मिली और न ही इमरजेंसी सेवा। डाक्टरों की हड़ताल से अंजान शहर पहुंचे मरीजों को खासी परेशानी उठानी पड़ी। क्लीनिक बंद होने पर दूूसरे और तीसरे क्लीनिक का चक्कर लगाते रहे। हर जगह मायूसी हाथ लगी। यही नहीं एक्सरे और पैथोलोजी जांच के लिए भी मरीजों को इधर-उधर भटकना पड़ा। प्राइवेट में इलाज नहीं मिलने पर जरूरतमंद मरीज सरकारी अस्पताल पहुंचे।

बेटे को लेकर चांदपुर से लेकर आई हूं
चांदपुर से आई कंचन का कहना है कि डेढ़ साल के बेटे कार्तिक का ईको कराना था। इस गर्मी में वह चांदपुर से बेटे को लेकर आईं हैं, लेकिन हड़ताल के चलते बच्चे का इलाज नहीं हो सका। अब दोबारा आना पड़ेगा। एक तो बीमार बच्चा उपर से इस गर्मी में आना जाना बहुत मुश्किल है।

बिना इलाज जाना पड़ा
चांदपुर से भतीजे को लेकर इलाज कराने आए जितेंद्र कुमार कहना है कि जानकारी नहीं थी कि आज हड़ताल है। भतीजे का इलाज कराने आया हूं। लेकिन हड़ताल के चलते डाक्टर नहीं मिले। दूसरे क्लीनिक और नर्सिंग होम के भी चक्कर लगाए। लेकिन कहीं इलाज नहीं मिला।

इमरजेंसी सेवा भी नहीं मिली
नियामतपुर से आई सोनी का कहना है कि हड़ताल में कम से कम इमरजेेंसी सेवा तो बहाल रखनी चाहिए। ताकि गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिल सके। हड़ताल में नुकसान मरीजों का ही होता है। डाक्टरों को हड़ताल से पहले मरीजों के बारे में सोचना चाहिए।

सरकारी अस्पताल में कराया इलाज
मूंढापांडे से इलाज कराने शहर आए विनोद कुमार का कहना है कि हड़ताल की जानकारी नहीं थी। इसलिए इलाज कराने शहर आ गया। कई डाक्टरों की क्लीनिक के चक्कर लगाए, लेकिन कहीं भी इलाज नहीं मिला। पेट दर्द की शिकायत थी। बाद में सरकारी अस्पताल में इलाज कराया।

जिला अस्पताल की ओपीडी में रही भीड़
प्राइवेट डाक्टरों के हड़ताल से जिला अस्पताल में मरीजों की खासी भीड़ देखने को मिली। ओपीडी और दवा काउंटर, पर्ची काउंटर पर मरीजों की भीड़ नजर आई। प्राइवेट अस्पतालों से मायूस मरीजों ने जिला अस्पताल में इलाज कराया।

बड़े हास्पिटल भी रहे बंद
पूर्व में हुई हड़ताल में मरीजों की सुविधा के लिए शहर के बड़े अस्पतालों की ओपीडी चलती रही। लेकिन इस बार बड़े अस्पतालों में भी ओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं बंद रही। शहर के कॉसमॉस हास्पिटल, साईं हास्पिटल, कोठीवाल डेंटल, एशियन विवेकानंद हास्पिटल पहुंचे मरीजों को मायूसी हाथ लगी।

दिन में सभा तो शाम को निकाला कैंडल मार्च
- डॉक्टरों ने जिला प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद।
नेशनल आईएमए के आह्वान पर देशव्यापी हड़ताल में शामिल शहर के डाक्टर मंगलवार की सुबह आईएमए भवन में इकट्ठा हुए। डाक्टराें ने क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट सहित छह सूत्रीय मांगोें पर चर्चा की। बाद डाक्टरों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। वहीं शाम को आईएमए भवन से कैंडल मार्च निकालकर विरोध जताया।
सभा में डाक्टरों का कहना था कि चिकित्सकों की मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। जिसे अब डाक्टर बर्दाश्त नहीं करेंगे। मरीजों के ट्रीटमेंट और प्रेस्कृपशन लिखने के लिए डाक्टरों को स्वच्छंदता मिलनी चाहिए। आए क्लीनिक और नर्सिंग होम में तोड़फोड़ और बवाल हो रहे हैं। डाक्टरों की सुरक्षा के लिए कदम उठाया जाए। सभा के बाद डाक्टरों का प्रतिनिधि मंडल कलक्ट्रेट पहुंचा। जहां जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया। शाम को दोबारा डाक्टर आईएमए भवन पहुंचे। जहां से कैंडल मार्च निकाला गया। इस दौरान डा. एके गोयल, डा. अनुराग मेहरोत्रा, डा. पल्लव अग्रवाल, डा. मनोज सक्सेना, डा. सीपी सिंह, डा. एके सिंह, डा. अरुण चुग, डा. विमिता अग्रवाल, डा. पायलपुरी, डा. राजेश रस्तोगी, डा. गिरजेश केन आदि मौजूद रहे।

ये है आईएमए की छह सूत्रीय मांग
- एमबीबीएस और बीडीएस डाक्टरों को ही एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति हो
- क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट में संशोधन किया जाए
- डाक्टरों की स्वायत्तता और दवा लिखने का अधिकार सुरक्षित किया जाए
- डाक्टरों एवं अनुसंधानों के लिए एकल खिड़की जवाबदेही पालिसी लागू की जाए
- उपचार एवं अनुशासन में पेशेवर स्वायत्तता प्रदान की जाए
- एक कंपनी एक दवा एक कीमत की पालिसी लागू की जाए
- जीडीपी को पांच प्रतिशत यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज के लिए रखा जाए

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