सरोगेसी विधिः बेसहारा, घुमंतू गायों के गर्भ में पलेंगे उन्नत किस्म की लुप्त प्राय देसी नस्ल के बच्चे

जयेंद्र नाथ चतुर्वेदी, अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर Published by: उत्पल कांत Updated Wed, 04 Aug 2021 05:10 PM IST

सार

भारत की उन्नत देशी नस्लों साहीवाल, गंगातीरी और गिर पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ये नस्लें लुप्त प्राय हो गई हैं। जबकि इन्हें कई गुणों से युक्त माना गया है। इन नस्लों के महत्व को देखते हुए उनके संरक्षण व संवर्धन का बीड़ा बीएचयू के पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय ने उठाया है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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विस्तार

अब गायें भी सरोगेसी विधि से गर्भ धारण करेंगी। विंध्य क्षेत्र की बेसहारा, घुमंतू गायों के गर्भ से उन्नत किस्म की लुप्त प्राय देशी नस्लों को पलने-फूलने का मौका मिलेगा। बीएचयू के बरकछा में राजीव गांधी कैंपस स्थित पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय में यहां की 80 गायों के सरोगेट मदर बनाने की तैयारी है, जिनसे उन्नत नस्ल की देशी साहीवाल, गंगातीरी, गिर के बच्चे पैदा होंगे। 
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भारत की उन्नत देशी नस्लों साहीवाल, गंगातीरी और गिर पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ये नस्लें लुप्त प्राय हो गई हैं। जबकि इन्हें कई गुणों से युक्त माना गया है। इन नस्लों के महत्व को देखते हुए उनके संरक्षण व संवर्धन का बीड़ा बीएचयू के पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय ने उठाया है।


कम समय में ज्यादा से ज्यादा नस्लों के उत्पादन के लिए संकाय के चिकित्सक राष्ट्रीय वित्त विकास योजना से पोषित एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। इस योजना के अंतर्गत बेसहारा, घुमंतू नस्ल की गायों को चुना जाना है। 27 करोड़ की लागत वाली इस योजना के पायलट प्रोजेक्ट में 80 गायों को सरोगेट मदर के रूप में तैयार करना है। इनसे उन्नत देशी नस्ल के 80 बच्चे तैयार होंगे।

2022 के अंत तक पायलट प्रोजेक्ट पूरा होने की उम्मीद है। सरोगेट मदर के लिए गायों का चयन और उनके स्वास्थ्य के परीक्षण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। लगभग 10 महीने का वक्त बछड़े के पैदा होने में लगेगा। पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय के सहायक आचार्य डॉ उत्कर्ष कुमार त्रिपाठी ने कहा कि लुप्त प्राय उन्नत देशी नस्लों को सरोगेट मदर के माध्यम से संरक्षित व संवर्धित किया जाएगा।

इससे जहां एक ओर अनमोल नस्लें सुरक्षित होंगी तो वहीं दूसरी ओर घुमंतू गायों को सहारा मिलेगा। फसलों को भी नुकसान से बचाया जा सकेगा।पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय के डीन प्रो रमादेवी निमन्नापल्ली ने कहा कि राष्ट्रीय वित्त विकास योजना से पोषित इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 27 करोड़ रुपये है। योजना का उद्देश्य देश की अनमोल उन्नत देशी पशुधन को संरक्षित व संवर्धित करना है। हमारे चिकित्सकों की टीम ने इस पर काम शुरू कर दिया है। 

ऐसे होगी सरोगेसी विधि

उन्नत देशी नस्ल की गायों के अंडाणु को उच्च नस्ल के सांड़ों के शुक्राणु से निषेचित कराया जाएगा। इसके बाद तैयार जायगोट को सरोगेट गायों के गर्भ में प्रत्यारोपित किया जाएगा। संकाय के चिकित्सक व प्रशिक्षित स्टाफ गर्भावस्था के नौ महीने नौ दिनों के दौरान गायों की देखभाल करेंगे। गर्भ में पलने वाले बच्चे सरोगेट मदर से केवल संरक्षण व पोषण प्राप्त करेंगे। उनका गुणधर्म समूल रूप से उन्नत देशी नस्लों का होगा। 
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