जैसी जिसकी साधना वैसा ही मिलेगा फल

Mirzapur Updated Mon, 03 Dec 2012 05:30 AM IST
शेरवां। रामायण की कथा को जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए तभी मनुष्य का जीवन धन्य हो सकता है। भगवान और गुरु में किसी भी प्रकार का संशय नहीं करना चाहिए, जिसकी जैसी साधना होती है, उसे वैसा ही फल प्राप्त होता है। ये बातें जमालपुर ब्लाक के खड़ेसरा स्थित मां शीतला मंदिर परिसर में चल रहे लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के तहत आयोजित रामकथा में सुग्रीवानंद जी महाराज ने कहीं।
उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की निंदा नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या जैसा पाप दूसरा नहीं है। मनुष्य को इससे बचना चाहिए। गौ-पालन और गौशाला से बड़ा दूसरा कोई अन्य तीर्थ स्थान नहीं होता है। गौ पालन करने से मनुष्य का तन, मन, जीवन बदल जाता है। कथावाचक ने कहा कि ‘कहा मुनि तन रघुराई, निर्भय यज्ञ करहूं तुम जाई..’अर्थात् श्री रघुनाथ जी ने मुनि विश्वामित्र जी से कहा कि आप निडर होकर यज्ञ कीजिए और यज्ञ की रखवाली हम करेंगे। ऐसा सुनकर देवताओं के शत्रु राक्षस मारिच राक्षसों को लेकर यज्ञ में विघ्न डालने और राम और लक्ष्मण पर प्रहार करने को दौड़े। तत्पश्चात् प्रभु श्रीराम ने यज्ञ और अपनी रक्षा करते हुए बिना फल वाला बाण उसे मारा, जिससे वह सौ योजन विस्तार वाले समुद्र के पार जाकर गिरा। इसके बाद श्रीराम ने सुबाहू का उद्धार किया। इस दौरान हरिशंकर सिंह, शिव मंदिर सिंह, गुड्डू सिंह, राजीव सिंह, प्रेमनाथ सिंह, शैलेश, लक्ष्मण आदि रहे।

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