कोर्ट में पेश होकर लौट रहे बंदी की मौत

Mirzapur Updated Tue, 06 Nov 2012 12:00 PM IST
मिर्जापुर। कोर्ट में पेश होकर लौट रहा एक बंदी सोमवार को अपराह्न लगभग तीन बजे अचानक अचेत हो गया। उसे तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया जहां चिकित्सकाें ने उसे मृत घोषित कर दिया। मौत की खबर लगते ही उसके परिजनाें में कोहराम मच गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
विंध्याचल थाना क्षेत्र के देवरी गांव निवासी बिंदकेश दूबे 42 वर्ष पुत्र स्व.रामगोपाल दूबे अपने ही बडे़े भाई की हत्या के आरोप में अप्रैल वर्ष 2011 से जिला कारागार के बैरक नंबर पांच में बंद था। सोमवार को उसकी पेशी एडीजे पंचम के यहां थी। जिला जेल से अन्य बंदियाें के साथ बिंदकेश दूबे को भी सिपाही वाहन से कोर्ट लाए थे। पेशी के बाद सिपाही बिंदकेश को लेकर कोर्ट परिसर में ही बने बंदीगृह में ले जा रहे थे, जहां से उसे अन्य बंदियाें के साथ वाहन में बैठाकर ले जाना था। सिपाही उसे लेकर कोर्ट से कुछ ही दूर गए होंगे कि तभी बिंदकेश की हालत अचानक बिगड़ गई और वह अचेत होकर गिर पड़ा। उसे अचेत देख सिपाहियों में हड़कंप मच गया। सिपाही उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे जहां चिकित्सकाें ने उसे मृत घोषित कर दिया। बिंदकेश की मौत की खबर लगते ही परिजनाें में कोहराम मच गया। विंध्याचल थानाध्यक्ष तारकेश्वर राय ने बताया कि बिंदकेश अपने ही बड़े भाई जगनारायण के हत्या के आरोप में वांछित था।
आरोप है कि सात मार्च वर्ष 2011 को बिंदकेश ने जमीन को लेकर हुए विवाद में जगनारायण को तमंचे से गोली मार दी थी। तीन अपैल वर्ष 2011 को उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था तभी से वह जेल में ही बंद था।
जेल अधीक्षक ने बताया कि बिंदकेश अप्रैल 2011 से जिला कारागार के बैरक नंबर पांच में बंद था। उसके मेडिकल रिकार्ड से तो ऐसा नहीं लग रहा है उसे कोई बीमारी थी या उसकी ओर इशारा करता हो। वह सोमवार को बिलकुल ठीक था और सामान्य तरीके से पेशी के लिए गया था। वहीं शहर कोतवाल आरके सिंह का कहना है कि बंदी के साथ मौजूद सिपाहियों ने बताया कि बंदी कचहरी परिसर में ही बनाए गए बैरक में पेशी के बाद लाया जा रहा था। रास्ते में वह लघुशंका के लिए रुका और वहीं पर अचेत होकर गिर पड़ा था। हार्ट अटैक की आशंका व्यक्त की जा रही है।
इनसेट
कोर्ट का फैसला आने से पहले ही चल बसा
मिर्जापुर। विंध्याचल थाना क्षेत्र के देवरी गांव निवासी स्व.रामगोपाल दूबे को तीन पुत्र थे, जिसमें सबसे बड़ा पुत्र जगनारायण दूबे 45 वर्ष, दूसरा बेटा बिंदकेश दूबे तथा तीसरा बेटा सतीश दूबे है। सभी लोग खेती करते थे। ग्रामीणाें के मुताबिक पिता की मौत के बाद जमीन के बंटवारे को लेकर तीनाें भाइयाें में विवाद होने लगा। विवाद इतना बढ़ा कि सात मार्च 2011 को बिंदकेश ने बड़े भाई जगनारायण दूबे की हत्या कर दी। तीन अप्रैल 2011 को उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। सोमवार को कोर्ट में पेश करने के बाद पुलिस उसे जेल ले जाने की तैयारी कर रही थी तभी वह अचेत हो गया और उसकी मौत हो गई। तीन भाइयों में अब केवल सतीश ही बचा हुआ है। कोर्ट उसका फैसला करती उससे पहले ही बिंदकेश चल बसा।

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