न्यायवादी व्यवस्था के आदर्श थे राम

Mirzapur Updated Tue, 30 Oct 2012 12:00 PM IST
मिर्जापुर। श्री राम न्यायवादी व्यवस्था के आदर्श थे। उनका आचरण हर तरह से अनुकरणीय है। पालिकाध्यक्ष राजकुमारी खत्री ने ये बातें राम जानकी मंदिर में राष्ट्रीय जागरण मंच के तत्वावधान में आयोजित वाल्मीकि जयंती समारोह में बतौर मुख्य अतिथि कहीं।
सचिव अरुण प्रकाश दूबे ने कहा कि राम के काल जैसी न्याय व्यवस्था विश्व में कहीं नहीं जानी जाती। वाल्मीकि के रामायण में राज महिषी सीता को देश निकाला होता है। इस व्यवस्था में स्वयं शासक राम प्रजा को यह अधिकार देते हैं कि यदि मुझसे कोई अपराध या त्रुटि होती है तो प्रजाजनों मुझे रोक देना। पूर्व प्रधानाचार्य बृजदेव पांडेय ने कहा कि वाल्मीकि ने देव वाणी को सरल संस्कृत का रूप दिया। इसमें हमें न्याय प्रिय, उदार राम का दर्शन होता है। उस काल में न्याय होता था, फैसला नहीं। पूर्व प्रधानाचार्य डा हरिभानु सिंह ने कहा कि वाल्मीकि ने ही तुलसी के लिए मार्ग खोला, जिस पर चलकर उन्होंने न्यायवादी राम को जनता के समक्ष रखा। इंद्रजीत शुक्ल ने कहा कि राम भारत के ही नहीं विश्व ेकी न्यायवादी व्यवस्था के लिए आदर्श थे। इस अवसर पर राकेश शुक्ल, मुन्नी लाल विश्वकर्मा, शिव प्रसाद द्विवेदी, सच्चिदानंद दूबे, विष्णु तिवारी, विकास, अच्युतानंद, सुरेश द्विवेदी आदि मौजूद रहे।

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