...तो क्या हेल्दी सिटी का सपना न होगा अपना

Mirzapur Updated Sun, 02 Sep 2012 12:00 PM IST
मिर्जापुर। नगर क्षेत्र में अत्यंत पुराने हो चुके पेड़ों के रखरखाव का उचित प्रबंध न किए जाने से उनके अस्तित्व पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। नगर में पौधरोपण कराने को कौन कहे विगत एक वर्ष के अंदर नगर क्षेत्र में करीब दो दर्जन से अधिक पुराने पेड़ तेज आंधी व पानी की जद में आकर जमींदोज हो चुके हैं। वन विभाग व पालिका प्रशासन की लापरवाही के चलते पुराने पेड़ाें को संजोकर न रखने के कारण पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है, जिसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा।
समृद्धि एवं हरियाली के तौर पर लक्ष्मी का नगर मिर्जापुर कभी एकदम हरा भरा हुआ करता था, आज पेड़ों की संख्या कम होने से उजाड़ सा होता जा रहा है। वृक्षों की संख्या कम होने से पर्यावरण प्रदूषण तो बढ़ ही रहा है, पक्षियों के बसेरा के लिए भी संकट उत्पन्न होता जा रहा है। हेल्दी सिटी का सपना संजोए हुए नगर पालिका परिषद को वर्षों बीत गया, लेकिन नगर क्षेत्र में एक भी पौधे नहीं लगाए गए। नगर में वर्षों पूर्व जो वृक्ष अभी तक हरियाली बिखेर रहे थे, वह भी धीरे-धीरे धाराशायी होते जा रहे हैं। विगत एक वर्ष के अंदर करीब दो दर्जन से अधिक विशालकाय वृक्ष तेज आंधी-पानी के चलते धाराशयी हो चुके हैं। पर्यावरण की दृष्टि से नगर क्षेत्र में वृक्षों की संख्या पर्याप्त संख्या में होनी चाहिए, लेकिन वन विभाग व पालिका परिषद की लापरवाही से पुराने वृक्षों का सही रखरखाव व उचित प्रबंधन न होने से पर्यावरण का संतुलन डगमगाने लगा है। छोटे-बड़े वाहनों, फैक्ट्रियों एवं कल-कारखानों की चिमनियों से निकलने वाले धुएं के चलते पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने के लिए नगर में पौधरोपण का कोई भी अभियान नहीं चलाया जा रहा है, जबकि नगर के तमाम पार्कों और स्कूल-कालेजों के खेल मैदान खाली पड़े हुए हैं, जहां पर पौधारोपण करके पर्यावरण प्रदूषण को बचाया जा सकता है। नगर के इमरती रोड जहां पर कभी दर्जनों वृक्ष हुआ करते थे, वर्तमान में मात्र एक ही पेड़ शेष रह गया है। तहसील व कचहरी परिसर में विगत एक वर्ष के अंदर कई विशाल पेड़ गिर चुके हैं। नगर के संगमोहाल रोड, पुलिस लाइन रोड, सिविल लाइन, वासलीगंज, बरियाघाट, बेलतर रोड, इमामबाड़ा रोड आदि स्थानों से काफी पुराने पेड़ तेज आंधी की जद में आकर धाराशायी हो चुके हैं। पुराने पेड़ों की घटती संख्या को लेकर वन विभाग के साथ ही स्वयं सेवी संस्थाए भी उदासीन बनी हुई हैं। एक तरफ पर्यावरण के संरक्षण के लिए सरकार व संस्थाओं के माध्यम से करोड़ाें रुपये व्यय किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नगर पालिका परिषद मिर्जापुर परिक्षेत्र में पर्यावरण के संरक्षण एवं वृक्षों के रखरखाव के लिए कोई सकरात्मक कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। अगर यही स्थिति रहा तो पर्यावरण प्रदूषण को बचाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होगा।

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