कटान से घाटों का अस्तित्व संकट में

Mirzapur Updated Fri, 31 Aug 2012 12:00 PM IST
मिर्जापुर। गंगा के तेज प्रवाह के चलते किनारे बसे शहर के विभिन्न इमारतों और मंदिराें को खतरा पहुंचने का संकट मंडराने लगा है। गंगा घाटों के किनारे पीचिंग और मरम्मत न कराए जाने से कटान से घाटों का अस्तित्व खतरे में हैं। नगर सहित जनपद के विभिन्न इलाकों में भी घाटों का कटान बदस्तूर जारी है। गंगा के बढ़ाव के चलते कचहरी घाट जहां नेस्तनाबूद होता जा रहा है, वहीं जनपद के हजारों एकड़ फसलों में पानी भर भरा है। मछुवारों के कच्चे मकान भी धराशाई हो रहे हैं, जिससे मछुवारा समाज के लोग अपना आशियाना बदलने को मजबूर हैं।
गंगा हमारी संस्कृति और धरोहर है। हर साल बाढ़ के चलते गंगा घाटों पर स्थित मंदिर और किनारा गंगा में समाहित हो सकते हैं। गंगा के उफान के चलते तटवर्ती इलाकों में खतरा का बादल मंडराने लगा है। दूसरी ओर जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती इलाके में बने कच्चे और पक्के मकानों के लिए भी खतरा बढ़ गया है। जनपद के कई इलाके में मकान ढहने से लोग अपने मवेशियों को लेकर नया ठिकाना तलाश कर रहे हैं। गंगा किनारे झोपड़ी बनाकर मछली का कारोबार करने वाले मछुवारों के मकान और जमीन पानी की चपेट में हैं। सबसे ज्यादा खतरा उन स्थानों पर उत्पन्न हो गया है, जहां पर अभी छोटी नाव के माध्यम से गंगा पार कराया जा रहा है। प्रशासन ने समय रहते अगर नावों के संचालन पर रोक नहीं लगाया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकती है। जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षापूर्ण नीति के चलते गंगा किनारे बने ऐतिहासिक घाट, मंदिर एवं इमारतों के ऊपर भी खतरा मंडराने लगा है। गंगा का बढ़ान इसी तरह से जारी रहा तो तटवर्ती इलाके के लोगों के लिए गंभीर संकट पैदा हो जाएगा। नगर में गंगा के कटान को रोकने के लिए कुछ जगहों पर पीचिंग कराई गई है, लेकिन वह भी नाकाफी साबित हो रही है। स्थापत्य कला का बेहतरीन नमूना नगर का ऐतिहासिक पक्काघाट सरकारी उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। घाट के पत्थरों पर बनी आकर्षक नक्काशी भी अब दरकने लगी हैं। गंगा के बढ़ने से प्राचीन धरोहर के नष्ट होने का खतरा बना रहता है।
नगर के कचहरी घाट की दशा तो गंगा बढ़ने से और भी बदतर हो गई है। इसी घाट से प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीणों का नाव द्वारा आना-जाना लगा रहता है, लेकिन घाट भी धीरे धीरे कटान की जद में आना शुरू हो गए हैं। ध्यान नहीं दिया गया तो घाट किनारे स्थित अदालतों के भवनों और बार ऐसोसिएशन भवन पर भी संकट आ सकता है। इस संबंध में डिस्ट्रिक्ट बार ऐसोसिएशन की तरफ से कई बार जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकृष्ट कराया जा चुका है। फिर भी किसी ने सुधि ली। इसी क्रम में नगर के बरियाघाट, बाबाघाट, बदलीघाट, सुंदरघाट, पक्काघाट, संकठाघाट, नरायणघाट नारघाट, चौबेघाट सहित कई अन्य घाटाें की सीढ़ियां पानी से लबालब हैं, जिससे स्नान ध्यान में दिक्कत हो रही है। विंध्याचल के पक्काघाट, मल्लहयिाघाट, इमलीघाट, दीवान घाट, बलुआ घाट गंगा के जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती इलाकों की ओर बढ़ रहा है।

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