मिर्जापुर कइलू गुलजार हो कि बड़ा उपकार कइलू मईया...

Mirzapur Updated Mon, 30 Jul 2012 12:00 PM IST
विंध्याचल। जगत जननी मां विंध्यवासिनी देवी के पावन दरबार में अपनी हाजिरी लगाने पहुंचे देश के ख्यातिलब्ध कला-साधकों ने जीवन के विविध रंगों को कजरी के माध्यम से प्रस्तुत किया। विंध्य शक्ति संघ के तत्वावधान में विंध्याचल धाम में आयोजित 40 वें अखिल भारतीय कजली महोत्सव में कजरी गायन, वादन व मनोहारी नृत्यों का अद्भुत का संगम देखने को मिला।
कजली महोत्सव का शुभारंभ श्री विंध्य शक्ति संघ के सिद्धेश्वरी प्रसाद उपाध्याय ने ज्योति पूजन कर किया। कजरी गायन के क्रम में जिले की सुप्रसिद्ध कजरी गायिका श्रीमती अजीता श्रीवास्तव ने- मिर्जापुर कइलू गुलजार को कि बड़ा उपकार कइलू मईया और खोलअ-खोलअ धन केवड़िया हम विदेशवा जइबे ना..सुनाकर सावनी बयार बहाई। वाराणसी से आई प्रख्यात गायिका शैल बाला ने- चल देख आई विंध्याचल क निराली छटा ना.. .और श्रीमती ममता शर्मा ने- बरसन लागी बदरिया झूम-झूम के..तआइल सावन क बदरिया ना..प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।आरा से आई बाल कलाकार साक्षी राज ने कार्यक्रम की शुरुआत गायत्री मंत्र से करके कई देवी गीतों और कजरी गायन की मधुर प्रस्तुतियों से महोत्सव में चार चांद लगा दिया। सुप्रसिद्ध गायक अमलेश शुक्ल अमन ने- विंध्याचल मां का अद्भुत श्रृंगार है सावनी बहार है ना..सुनाकर पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। गायक पट्टर पांडेय, कपींद्र उपाध्याय सहित कई अन्य कलाकारों ने भी कजरी के गायन से श्रोताओं पर एक अमिट छाप छोड़ी।आमंत्रित कलाकारों को संस्था के अध्यक्ष सिद्धेश्वरी प्रसाद उपाध्याय ने अंगवस्त्रम् और स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। अधिकांश कलाकारों के साथ आर्गन पर राजू, तबला पर बृजेश, शहनाई पर बांकेलाल व ढोलक पर सोनू पाठक ने कुशल संगत किया। संचालन पटना से आए मनोज कुमार ने किया। इस दौरान राधा-कृष्ण के बरखा एवं मयूर नृत्य देख कर लोग मंत्रमुग्ध हो गए। सिद्धेश्वरी प्रसाद उपाध्याय, अंबेश्वरी प्रसाद उपाध्याय, शक्ति उपाध्याय, संरक्षक अशोक पांडेय व शैलबाला सहित तमाम गणमान्य लोगों ने रात भर कजरी गायन के रंग में सराबोर होते रहे।

नृत्यों और वादन की युगलबंदी से महोत्सव बना यादगार
विंध्याचल। विंध्याचल धाम में आयोजित अखिल भारतीय कजली महोत्सव के दौरान कलाकारों के मनोहारी नृत्यों के साथ ही तबला के साथ सितार व वायलिन की युगलबंदी देख लोग मंत्रमुग्ध हो गए। प्रख्यात तबला वादक अशोक पांडेय ने अपने बेहतरीन तबला वादन से से महोत्सव यादगार बन गया। श्री पांडेय के साथ वायलिन व सितार की भी जुगलबंदी के कार्यक्रम को भी लोगों की खूब वाहवाही मिली। नृत्यों के क्रम में इलाहाबाद से आई बीना सिंह ग्रुप की कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से चार चांद लगा दिया। ग्रुप में शामिल बीना सिंह के साथ ही सीमा, गीता, शिवानी, प्रतिभा, नेहा, कोमल, डाली, विशाल, शैंकी, राहुल ने मयूर नृत्य के साथ ही दीप, डांडिया, कृष्ण लीला, एवं बरखा नृत्य की पेशकश से खूब तालियां बटोरी, वहीं कत्थक नर्तक अजीत सिंह ने काली तांडव व मयूर नृत्य व राधा-कृष्ण नृत्य की प्रस्तुति से उपस्थित जनों का मन मोह लिया। इसी क्रम में श्याम बिहारी गौड़ ग्रुप के कलाकारों ने दर्शकों को खूब झुमाया।

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