कोल-आदिवासियों की उपेक्षा क्यों कर रहे हैं केंद्रीय मंत्री

Mirzapur Updated Wed, 18 Jul 2012 12:00 PM IST
मिर्जापुर। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश बुधवार 18 जुलाई को जिले के एक ऐसे गांव में आ रहे हैं जिसे निर्मल गांव के रूप में राष्ट्रपति से पुरस्कार मिल चुका है। यहां आकर वह जिले में मनरेगा का सच भला कैसे जान सकेंगे यह बात समझ से परे है। सवाल उठने लगे हैं कि जयराम रमेश क्या वाक ई में नक्सल प्रभावित क्षेत्र के गरीबों के साथ न्याय कर पाएंगे। मनरेगा का सच जानने को निकले केंद्रीय मंत्री को लगता है कि यहां के अधिकारियों ने यह नहीं बताया है कि इसी वर्ष अप्रैल व मई माह में मनरेगा में करोड़ों रुपये के घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। हलिया, पड़री व कछवंा थानों में करीब पांच दर्जन से भी अधिक सरकारी कर्मचारियों व ग्राम प्रधानों पर मुकदमा दर्ज है लेकिन कार्रवाई के नाम पर नतीजा सिफर ही रहा है।
मनरेगा में व्यापक पैमाने पर हुई गड़बडि़यों पर जालसाजों पर मुकदमा तो दर्ज हुआ लेकिन आगे की कार्रवाई कुछ नहीं की जा सकी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर पहाड़ी ब्लाक समेत जिले के कई ब्लाकों में हुई धांधली की जांच कराई गई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे।
केस एक- सात अप्रैल वर्ष 2012 को हलिया थाने में मनरेगा के करीब पौने चार करोड़ रुपये के घोटाले का मामला सामने आया। यहां पर करीब डेढ़ दर्जन अधिकारी-कर्मचारी व ग्राम प्रधानों के खिलाफ गबन का मामला दर्ज हुआ। फिर जांच के नाम पर सारे अभिलेख ईओडब्लू के पास भेज दिए गए। बुधवार को जब इस प्रकरण के बारे में विवेचनाधिकारी सीओ लालगंज डा. सुरेंद्र प्रताप सिंह से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि अभिलेख ही नहीं है इसलिए जांच ठप है। ईओडब्लू से अभिलेख मंगाया गया है।
केस दो- आठ मई वर्ष 2012 को कछवां थाने में करीब 28 लाख रुपये के गबन का मामला दर्ज हुआ। इसमें तीन ग्राम प्रधान, एक जेई, तीन सेक्रेटरी समेत कुल बीस आरोपी शामिल हैं। इन आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ ही 28 लाख रुपये की रिकवरी करने को कहा गया है। यह गड़बडि़यां सीखड़ ब्लाक के सिर्फ धनैता, बिदापुर व डोमनपुर गांव की है। जबकि यहां के दर्जनों गांवों में करोड़ों के घोटाले हुए हैं और इस बात को लखनऊ से जांच के लिए आई मनरेगा तकनीकी टीम के सदस्यों ने स्वीकार भी किया है। सीखड़ में अभी विट्ठलपुर, बगहां व मेडि़या की जांच के लिए तकनीकी टीम गठित हुई थी। जिसके आयुक्त जन्मेजय शुक्ला नियुक्त हुए थे लेकिन टीम नहीं पहुंच पाई। जबकि इन तीनों गांव की अभिलेख सहित शिकायत मनरेगा आयुक्त लखनऊ को सौंपी गई थी। अभिलेख में व्यापक भ्रष्टाचार को प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर तकनीकी टीम भेजने को कहा गया था। जिन तीन गांवों की जांच हुई उसके शेष अन्य कार्योकी जांच के लिए भी टीम गठित कर जांच को कहा गया है।
केस तीन- तेरह अप्रैल, वर्ष 2012 को पड़री थाने में बीडीओ, जेई व ग्राम पंचायत अधिकारियों समेत आधा दर्जन लोगों पर मनरेगा के लाखों रुपये की हेराफेरी करने का मामला दर्ज हुआ। सीडीओ के निर्देश पर बीडीओ मीनाक्षी देवी ने प्राथमिकी दर्ज करायी थी। इस मामले में भी अभी तक न तो किसी आरोपी की गिरफ्तारी हो पायी और न ही गबन किए गये रुपयों की रिकवरी ही की जा सकी है।

Spotlight

Most Read

Delhi NCR

बवाना कांड पर सियासत शुरू, भाजपा मेयर बोलीं- सीएम केजरीवाल को मांगनी चाहिए माफी

दिल्ली के औद्योगिक इलाके बवाना में शनिवार देर शाम अवैध पटाखा गोदाम में आग लगने से 17 लोगों की मौत के बाद अब इस पर सियासत शुरू हो गई है।

21 जनवरी 2018

Related Videos

VIDEO: आपके बच्चों से स्कूल में ये काम तो नहीं कराया जाता?

मिर्जापुर के बंधवा में बने पूर्व प्राथमिक पाठशाला की एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में स्कूल के छात्रों से शौचालय साफ कराया जा रहा है।

30 दिसंबर 2017

आज का मुद्दा
View more polls
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper