मानव जाति का धर्म शास्त्र है यथार्थ गीता

Mirzapur Updated Wed, 04 Jul 2012 12:00 PM IST
चुनार। गुरुपूर्णिमा के पावन पर सक्तेशगढ़ स्थित श्री परमहंस आश्रम में दर्शन को जुटे लाखों भक्तों को आशीर्वाद देते हुए परमहंस स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज ने भक्तों से यथार्थ गीता के बारे में बताया व उसका अध्ययन करने और उसे अपने जीवन का अंश बनाने को कहा। बताया कि यथार्थ गीता सम्पूर्ण मानव जाति का धर्म शास्त्र है। गीता किसी विशेष व्यक्ति, जाति, वर्ग, पंथ का ग्रंथ नहीं है बल्कि यह सार्वलौकित तथा सार्वकालिक धर्म शास्त्र है। यह प्रत्येक आयु जाति स्त्री पुरुष सबके लिए है। आत्मा सत्य है और पूर्ण संयम से आत्मस्थिति का विधान है। यह गीता का ही विचार है। गीता मानव जाति को उसका कर्तव्य, अधिकार एवं अच्छे बुरे का भी ज्ञान कराती है। क्या सही है और क्या गलत गीता में सब कुछ है, जिससे आप अपना जीवन सार्थक बना सकते हैं।

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