पर्यावरण प्रदूषण के कारण व निवारण पर हुई चर्चा

Mirzapur Updated Thu, 07 Jun 2012 12:00 PM IST
मिर्जापुर। पर्यावरण प्रदूषण के कारण धरती का अस्तित्व आज संकट में है। आधुनिक जीवन शैली को अपनाने के कारण हमने पर्यावरण की अवहेलना की है। हम पर्यावरण संरक्षण की अपनी प्राचीन परंपराओं को भी भूलते जा रहे हैं। यह बातें मंगलवार को विंध्याचल स्थित शेरकोठी में आयोजित विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए विंध्य सेवा मंच के प्रवक्ता त्रियोगी नारायण मिश्र ने कहीं।
उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि समान परिस्थितियों में पर्यावरण की रक्षा को अपना धर्म समझा जाए और सिर्फ कागजों पर पौधरोपण न करके उसे यथार्थ के धरातल पर लगाया जाए, जिससे प्रकृति की दशा को सुधारने में मदद मिल सके। अब हर व्यक्ति को एक पौधा लगाने का नियम अपनाकर धरती को हरियाली बढ़ाने की चेष्टा करनी चाहिए, क्योंकि धरती बचेगी तभी हम भी बचे रहेंगे। श्री मिश्र ने कहा कि पर्यावरण को संतुलित बनाए रखने में प्रत्येक जीव-जंतुओं का महत्वपूर्ण योगदान है। पशु-पक्षियों को देवी-देवताओं के वाहन के रूप में पूजने की भारतीय परंपरा को भले ही पश्चिम जगत में हास्यास्पद समझी गई हो, लेकिन आज समझाने पर वे भी स्वीकार करेंगे, कि इस परंपरा में पर्यावरण की रक्षा का भाव निहित है। दुर्भाग्यवश प्रकृति पूजन की परंपरा धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है, जबकि हमारे पौराणिक ग्रंथ हमें सदियों से प्रकृति के उपासना का मंत्र देते आए हैं। श्री मिश्र ने कहा कि पृथ्वी, जल, वायु, इंद्र, सूर्य, चंद्र आदि को पूजन और सम्मान देने का अर्थ यह है कि हम उनमें देवता का वास मानते हैं। गोष्ठी को अजीत झा, राजकुमार मेहरोत्रा, रोहित चतुर्वेदी, डा. अभिजीत सिंह, शिवम कसेरा आदि ने संबोधित किया। इस दौरान राजकुमार चतुर्वेदी, राजू पटेल, जगदीश श्रीमाली, भानू सिंह, विवेक सिंह, रामजी चतुर्वेदी सहित दर्जनों गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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