गंगा तूने दिया है हमें अमृत का वरदान

Mirzapur Updated Sun, 03 Jun 2012 12:00 PM IST
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चुनार(सं.)। पतित पावनी मां भागीरथी के अवतरण दिवस गंगा दशहरा के उपलक्ष्य में स्थानीय साहित्य परिषद की ओर से नगर के शिवा उत्सव वाटिका मेें मां गंगा को समर्पित काव्य गोष्ठी का आयोजन किया।
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नगर के सशक्त रचनाकार कमलेश्वर कमल ने अपनी रचना गंगा तूने दिया हमें है अमृत का वरदान मगर प्रदूषित तुझे कर रहे तेरी ही संतान सुना कर आज की गंगा की दुर्दशा का सटीक चित्रण किया। अनवरअली अनवर ने अपने गीत भगीरथ के तप की है यही निशानी ये अमृत की धारा है गंगा का पानी से जीवनदायनी गंगा के महत्ता का बोध उपस्थित श्रोताओं को कराया। वरिष्ठ कवि केसी श्रीवास्तव ने रस परिवर्तित करते हुए अपनी सारगर्भित रचना जब भी तेरे यादों की चांदनी उतरती है खुद को मैं ढूंढता हूं और तनहाइयां सिसकती है सुना कर मंच को ऊंचाई प्रदान की। युवा कवि करुणापति ने अपनी रचना कि न आयेगा गम पास कोई बस तुम सदा मुस्कराते रहो सुना कर श्रोताओं को कविता का पूरा आनंद प्रदान किया। कवि एसपी सिंह ने कहा कि इस पावन दिन धरा पर आयी गंगा मां भगीरथ के पुरखों को थी मुक्ति दिलायी गंगा मां ने सुना कर गंगा के निर्मल जल का गुणगान किया। गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि केसी श्रीवास्तव ने किया। गोष्ठी मे श्रीधर शेखर कविता प्रेमी श्रोता एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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