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ओझा का परिवार हुआ तबाह

Mirzapur Updated Wed, 16 May 2012 12:00 PM IST
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मिर्जापुर। दूसरों के परिवार की मुसीबतों, प्रेत-बाधाओं को दूर भगाने वाले ओझा ढेलई उर्फ रामखेलावन बिंद अपने ही परिवार को नहीं बचा पाया। बड़े बेटे व बहू की हत्या में उसके अपने ही खून का शामिल होना बताया गया। बड़े बेटे की हत्या में मंझले पुत्र जालंधर का नाम चार साल की पोती मानसी द्वारा पुलिस अधिकारियों के समक्ष लिए जाने से ओझा और भी ज्यादा टूट गया। देहात कोतवाली क्षेत्र के खजुरी गांव में अपनी खेती-बारी, राजनीतिक महत्वाकांक्षा व ओझाई में महारथ के लिए जाना जाने वाला 80 वर्षीय शंभू बिंद के परिवार पर सोमवार को आफत आ पड़ी थी। ऐसी आफत जिसके आने के बारे में परिवार के लोगों को काफी दिनों से पता था फिर भी उसके प्रति घर के बड़े बुजुर्ग न तो सचेत हो पाए और न ही उसे टालने के लिए कोई कड़ा कदम उठा पाए। परिणाम यह रहा कि दो-दो लाशें बिछने के बावजूद परिवार को लोगों की सहानुभूति कम और उलाहने ज्यादा सुनने को मिल रहे थे। विंध्याचल के घमहापुर गांव से आए मृत माया के मायके वालों ने सबसे अधिक कोसा। वह तो माया के देवर जालंधर के साथ ही श्वसुर ढेलई उर्फ रामखेलावन को भी चिल्ला चिल्लाकर जिम्मेदार ठहरा रहे थे। शंभू का बड़ा पुत्र फेरई व छोटा पुत्र बच्चे लाल बिंद अपने-अपने परिवार के साथ अलग-अलग मकानों में रहते हैं। बच्चे लाल बिंद राष्ट्रीय परिवर्तन दल का जिला प्रभारी है। अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरी करने के लिए करीब दो दशक पहले बच्चे लाल मझवां विधानसभा से चुनाव भी लड़ चुका है।
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