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गरज चमक के हुई बारिश, भीगे फसल

Varanasi Bureauवाराणसी ब्यूरो Updated Thu, 18 Apr 2019 12:31 AM IST
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मिर्जापुर। किसानों की मेहनत पर बारिश से पानी फेर दिया। खेतों में तैयार गेहूं की फसल पर पानी पड़ने से दानों पर असर पड़ेगा। तेज हवा के कारण भी गेहूं के दाने खेतों में ही झड़ गए। इससे किसानों को भारी नुकसान होने की आशंका है। बुधवार की भोर से ही मौसम में रुख बदलना शुरू हुआ। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में भोर से गरज व चमक के साथ ही रुक-रुक कर शुरू हुई बूंदाबांदी दोपहर बाद तक चलता रहा। बारिश के चलते जहां सड़कें गिली हो गई वहीं खेत व खलिहानों में रखे फसल पानी से भीग गए। बारिश से पूर्व कहीं-कहीं तेज हवा के झोंके भी चले जिससे खेतों में काटकर रखी अधिकांश फसले हवा में उड़े गए। बारिश से फसलों की कटाई व मड़ाई का कार्य पूरी तरह से ठप हो गया। किसान खलिहानों में रखे फसलों को बचाने की जुगाड़ में दिनभर लगे रहे। दोपहर बाद भगवान भाष्कर के दर्शन बाद किसानों ने राहत की सांस ली।
कछवां- बे मौसम हुए बारिश और अंधड़ से गेहूं की फसल को चौपट होने के कगार पर है। भोर से तेज हवा के साथ हुई बारिश से खेतों में कटी फसल बर्बाद हो रही हैं। किसानो की मानें तो बुधवार रात को दो बजे तक मौसम एक दम साफ था। किसी को भी आंकलन भी नहीं था कि कुछ देर बाद ही मौसम का मिजाज इतना बदल जाएगा। आकाश में कड़कती बिजली से किसानों की नींद टूट गई वह खलिहानों में रखे फसलों के बचाव के लिए दौड़ते नजर आए। जिगना-छानबे क्षे सुबह से ही रुक रुक कर हुई बारिश से फसलें भीग गई और उनमें आई नमी के कारण थ्रेसरिंग का कार्य प्रभावित हो गया। लालगंज प्रतिनिधि के अनुसार, क्षेत्र के 80 फीसदी किसानों की फसल खैत में है। बेमौसम हुए बारिश से किसान फसलों को लेकर चिंतित रहे। हलिया, तेज हवाओं के झोके और बारिश से खेतो में काट कर रखी फसल के अलावा खलिहानों में रखे फसल पूरी तरह से भीग गए। किसानों का मानना है कि यदि यही हाल दो, चार दिन बने रहे तो भारी नुकसान से इनकार नहीं किया जा सकता। कैलहट, आस पास के क्षेत्र में सुबह से हो रही बूंदाबांदी से किसान पसोपेश में पड़े हुए हैं। किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें पड़ गई हैं। राजगढ़, क्षेत्र में सुबह से ही मौसम के बिगड़े मिजाज गेहूं की कटाई एवं मड़ाई कार्य पूरी तरह से ठप हो गया। क्षेत्र के किसान मध्यप्रदेश, झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़ से मजदूर लाकर अपने गेहूं की फसल की कटाई कराते हैं। लेकिन बारिस से कटाई व मड़ाई के कार्य दो तीन दिन से रुका हुआ है। बाहर से आए मजदूरों का खर्चा उठाना अब किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है। मड़िहान, तेज हवा व बारिस से लोगों को उमस भरी गर्मी से थोड़ी राहत तो जरूर मिली पर सुबह से क्षेत्र में रुक रुक कर हो रही बूंदाबांदी से खेतीबारी का कार्य पूरी तरह से ठप हो गया है। खेत और खलिहान में रखे फसल भीगने से किसानों का नुकसान हो रहा है। किसानों का कहना है कि धूप निकलने के एक कम से कम एक सप्ताह बाद ही गेंहू की मड़ाई संभव हो सकेगा। जमालपुर, बे मौसम बरसात ने किसानों को सकते में डाल दिया। खेत खलिहान में मड़ाई के लिए रखे गेंहू के भीगे बोझ से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई हैं। किसानों का मानना है कि यदि मौसम में सुधार जल्द न हुआ तो गेहूं के दाने काले पड़ सकते हैं।

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