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शिलान्यास के दस वर्षों बाद शुरू हुआ पुल निर्माण

Varanasi Bureauवाराणसी ब्यूरो Updated Sat, 15 Jun 2019 12:36 AM IST
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मिर्जापुर। सरकारी संस्थाएं किस प्रकार योजनाओं को विलंबित करती हैं, इस बात का जीता जागता प्रमाण पहाड़ी विकास खंड में बन रहा बेलवन पुल है। 12 साल बीत गए शिलान्यास को लेकिन यह अभी भी पूरा नहीं हो सका है। इस पुल का निर्माण हो जाने से पड़री क्षेत्र से नगर की दूरी लगभग 12 किलोमीटर कम हो जाएगी। अब जब इसका निर्माण शुरू हुआ है तो लोगों की उम्मीदें जगी हैं।
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नगर के रमईपट्टी- अक्सौली व चुनार मार्ग पर बेलवन नदी पर लगभग 212 मीटर लंबे पुल का निर्माण होना था। 12 करोड़ 15 लाख के बजट से इस पुल का निर्माण होना था और इसके निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम को दी गई। काम शुरू तो हुआ लेकिन शुरू होते ही बंद हो गया। बरसात के दिनों में जब नदी में पानी आ जाता है तो लोग बेलवन रेलवे पुल का आवागमन के लिए सहारा लेते थे। इसकी वजह से नित्य की दुर्घटनाएं होती थी। यदि ग्रामीण सड़क मार्ग से आते तो पहले उनको पड़री आना पड़ता और फिर राष्ट्रीय राजमार्ग पकड़ कर मिर्जापुर या वाराणसी जाते हैं। इसलिए इस नदी पर लगातार पुल के निर्माण की मांग होती रही। वर्ष 2007 में जब बसपा सरकार थी तो क्षेत्रीय विधायक रमेश बिंद ने इस पुल का शिलान्यास किया। उम्मीद थी कि पुल शीघ्र ही बन जाएगा क्योंकि काम शुरू हो गया था। लेकिन उसी समय चुनाव हो गया और सत्ता परिवर्तन हो गया। बसपा की जगह समाजवादी पार्टी सत्ता में आ गई। नई सरकार आते ही काम ठप हो गया और ऐसा ठप हो गया कि पूरे 10 साल इस पुल के निर्माण के लिए एक ईंट तक नहीं रखी गई। वर्ष 2017 में जब भाजपा की सरकार बनी और मझवां क्षेत्र से सुचिस्मिता मौर्य विधायक हुई तो उन्होंने इस समस्या को सदन में उठाया। उसके बाद इस पुल के लिए बजट जारी हुआ। और काम शुरू हुआ। ग्रामीण तमाम तरह का आंदोलन करते रहे लेकिन शासन ने इस तरफ कतई ध्यान नहीं दिया। इस पुल का महत्व इसी से समझा जा सकता है कि जिस दिन यह पुल शुरू हो जाएगा तो जिला मुख्यालय से क्षेत्र के लोगों की दूरी 15 किलोमीटर कम हो जाएगी। बरसात के दिनों में इस क्षेत्र से आवागमन करना बहुत कष्टप्रद होता है।

पड़री। बरसात के दिनों में जब बेलवन नदी में बाढ़ आती है तो लोग आवागमन के लिए बेलवन रेलवे पुल का सहारा लेते हैं। रेलवे पुल पर जाने का मतलब दुर्घटना की आशंका लेकिन लोग जान हथेली पर रखकर आवागमन करते थे और नतीजे में अब तक इस पुल पर हुई दुर्घटनाओं में दो दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। यह क्षेत्र बरसात के दिनों में चुनार, नगर व अन्य क्षेत्रों से एकदम से कट सा जाता था। इसके साथ ही क्षेत्र के विद्यार्थी जो पैड़ापुर व आसपास के अन्य डिग्री कालेज व इंटर कालेजों में पढ़ाई करने आते थे। वह भी किसी प्रकार आवागमन करते थे।


काम तीव्र गति से चल रहा है और उम्मीद है कि पुल का निर्माण 30 जून 2020 तक हर हाल में पूरा हो जाएगा। यदि बजट मिलता रहा तो काम निश्चय ही समय पर पूरा होगा।
संह, परियोजना प्रबंधक, यूपीएसबीसी।

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