111 करोड़ रुपये ने रोकी गंगाजल की सप्लाई

अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ Updated Thu, 10 Mar 2016 02:32 AM IST
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वाटर सप्लाई - फोटो : फाइल फोटो

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शहर को अभी तक गंगाजल नहीं मिला है, जबकि यह 2013 में ही मिल जाना चाहिए था। छह माह से शहर की पाइप लाइनों की टेस्टिंग के लिए भोले की झाल से पानी आ रहा है, लेकिन इसे घरों तक पहुंचाया जा रहा है।
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गंगाजल न मिलने के पीछे उप्र सरकार जिम्मेदार है, क्योंकि नगर विकास विभाग ने वित्तीय स्वीकृति देने के बाद भी सिंचाई विभाग को बकाया 111 करोड़ रुपये जारी नहीं किए हैं। 
जेएनएनयूआरएम के तहत 2010 में शहर में लगभग 350 करोड़ रुपये की लागत से गंगाजल योजना शुरू हुई थी। शहर में कई साल तक पाइप लाइन डाली गईं। जगह-जगह खुदाई होने से पूरा शहर जाम झेलता रहा। लेकिन आज तक गंगाजल नहीं मिल सका है। मामला सिंचाई विभाग और नगर विकास मंत्रालय के बीच फंसा हुआ है। 
43 नहीं, सिर्फ पांच क्यूसेक ही आ रहा पानी
नगर विकास और सिंचाई विभाग के बीच अनुबंध और शहर में गंगाजल की सप्लाई के मुताबिक भोला झाल से 43 क्यूसेक पानी की सप्लाई होनी है। सिंचाई विभाग को धन जारी न किए जाने के कारण सिंचाई विभाग ने जल निगम की मांग पर मात्र पांच क्यूसेक पानी छोड़ा हुआ है। वह भी केवल पाइप लाइन टेस्टिंग के लिए। इसमें भी टाउन हॉल और पीएल शर्मा स्मारक पर भूमिगत जलाशय की टेस्टिंग बाकी है। 

पाइप लाइन कैसे झेलेगी 43 क्यूसेक पानी 
जल निगम द्वारा शहर में डाली गई पाइप लाइन में फिलहाल पांच क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जिसे पाइप लाइन झेल नहीं पा रही है, जगह-जगह से रिसाव हो रहा है। जब 43 क्यूसेक पानी छूटेगा, तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि पाइप लाइनों का क्या हाल होगा। जानकारों का ये भी कहना है कि ऐसे में शहर में पाइप लाइन फट सकती है। 

क्या कहते हैं अधिकारी -
- नगर विकास विभाग ने 128 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति दी हुई है। जिनमें से 17 करोड़ रुपये नगर विकास मंत्रालय ने सिंचाई विभाग को जारी कर दिए हैं। लगभग 50 करोड़ रुपये भोला झाल पर सिंचाई विभाग के खर्च हो चुके हैं। 111 करोड़ जारी करने का बार-बार आश्वासन दिया जा रहा है। जब तक पैसा नहीं मिलेगा, तब तक पांच क्यूसेक से अधिक गंगाजल नहीं देंगे। - आरके जैन, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग 

- यह बात सही है कि सिंचाई विभाग धन न मिलने के कारण हमें केवल पांच क्यूसेक पानी दे रहा है। अभी हम सर्किट हाउस जलाशय तक ही पानी ला पाए हैं। टाउन हॉल और पीएल शर्मा स्मारक के निकट जलाशय की टेस्टिंग अभी बाकी है। वहीं पाइप लाइन फटने की बात गलत है। यह लीकेज है, जिसे टेस्टिंग के दौरान ठीक किया जा रहा है। - मुन्ना सिंह, परियोजना प्रबंधक जल निगम
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