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किया रक्तदान तो हुई गंभीर बीमारियों की पहचान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Wed, 19 Jun 2019 04:15 AM IST
हेपेटाइटिस सी
हेपेटाइटिस सी - फोटो : अमर उजाला
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शहर के लोगों पर एचआईवी, हेपेटाइटिस सी और बी हमला कर रहा है और उन्हें इसकी भनक तक नहीं है। भला हो उनकी रक्तदान करने वाली सोच का, जिसकी वजह से उन्हें पता चल गया कि वह एचआईवी और हेपेटाइटिस सी और बी बीमारियों से जूझ रहे हैं। इस साल जनवरी से अप्रैल तक जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में रक्तदान करने वाले ऐसे 136 लोगों में एचआईवी, हेपेटाइटिस बी और सी की पुष्टि हुई है।
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इनमें एचआईवी के पांच, हेपेटाइटिस सी के 75 और हेपेटाइटिस बी के 56 मरीज हैं। मेडिकल कॉलेज में एचआआईवी के चार, हेपेटाइटिस सी के 40 और हेपेटाइटिस बी के 26 मरीज हैं। जबकि जिला अस्पताल में एचआईवी का एक मरीज मिला है, हेपेटाइटिस सी के 35 और हेपेटाइटिस बी के 30 मरीज मिले हैं। इनमें अधिकांश की उम्र 20 से 45 साल के बीच है। रक्त की जांच के बाद इसका पता चला। यह तीनों बेहद खतरनाक बीमारियां हैं। इनके संक्रमण का स्रोत रक्त ही होता है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक इंचार्ज डॉ. कौशलेंद्र सिंह का कहना है कि लोगों को समय-समय पर अपने रक्त की जांच कराते रहना चाहिए, ताकि पता चलता रहे कि उन्हें कोई बीमारी तो नहीं है।

ऐसा हुआ खुलासा
मेडिकल कॉलेज की ब्लड बैंक इंचार्ज डॉ. मोनिका राठी ने बताया कि रक्तदान शिविरों में खून लेने के बाद उसकी जांच की जाती है। जो व्यक्ति रोगी पाए जाते हैं, उनके खून को नष्ट कर दिया जाता है। इसके बाद रक्तदाताओं का इलाज शुरू किया जाता है।

यह है हेपेटाइटिस बी
हेपेटाइटिस बी (यकृतशोध बी) एक संक्रामक बीमारी है। इसके कारण लीवर में सूजन और जलन पैदा होती है। इसके वायरस का संचरण संक्रमित रक्त या शरीर के तरल पदार्थ के संपर्क में जाने से होता है। इसका इलाज वायरसरोधी दवाओं से किया जाता है। यह दवाएं खून में वायरस की मात्रा घटा सकती हैं या उन्हें हटा सकती हैं। इससे लीवर सीरोसिस या लीवर कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है।

यह है हेपेटाइटिस सी
हेपेटाइटिस सी (यकृतशोथ सी) को काला पीलिया भी कहा जाता है। यह संक्रामक रोग है, जो हेपेटाइटिस सी वायरस एचसीवी की वजह से होता है। यह यकृत को प्रभावित करता है। यह वायरस रक्त से रक्त के संपर्क द्वारा फैलता है। इलाज और देखभाल से यह ठीक हो जाता है। इस बीमारी का पता शुरू में नहीं लग पाता, जिस कारण यह जानलेवा हो जाता है। जिला अस्पताल में इसका निशुल्क इलाज किया जा रहा है।

यह है एचआईवी
एचआईवी (ह्यूमन इम्यनो डिफिशिएंसी वायरस) एक ऐसा वायरस है, जिसकी वजह से एड्स होता है। यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। जिस व्यक्ति में इस वायरस की मौजूदगी होती है, उसे एचआईवी पॉजिटिव कहते हैं। आमतौर पर लोग एचआईवी पॉजिटिव होने का मतलब ही एड्स समझने लगते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। एचआईवी के शरीर में दाखिल होने के बाद शरीर की प्रतिरोधक क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है और शरीर में तरह-तरह की बीमारियां और इंफेक्शन पैदा करने वाले वायरस अटैक करने लगते हैं। एचआईवी पॉजिटिव होने के करीब 8-10 साल बाद इन तमाम बीमारियों के लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं। इस स्थिति को ही एड्स कहा जाता है। वैसे, एचआईवी पॉजिटिव होने के बाद से एड्स होने तक के गैप को दवाओं की मदद से बढ़ाया जा सकता है।

बीमारियां होने के कारण
दूषित सिरिंज का उपयोग
दूषित रेजर या टूथब्रश का इस्तेमाल
दूषित रक्तदान, अंगदान या लंबे समय तक डायलिसिस से
दूषित सुई से टैटू बनवाना या एक्यूपंचर करवाना
असुरक्षित यौन संबंध बनाना

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