'My Result Plus
'My Result Plus 'My Result Plus

ठेंगे पर शिक्षा मंत्री के आदेश

Meerut Updated Mon, 01 Dec 2014 05:30 AM IST
ख़बर सुनें
मेरठ। माध्यमिक शिक्षा विभाग घोटालों का अड्डा बन गया है। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (रमसा) के तहत संचालित होने वाले तमाम कार्यक्रम घोटाले की भेंट चढ़ गए हैं। शिकायत के बाद जांच तो बैठाई जाती है, लेकिन कार्रवाई किसी में नहीं होती। इससे भ्रष्ट अफसर और कर्मचारियों को और शह मिल जाती है।
मुख्यमंत्री कार्यालय से होनी वाली जांच भी सेटिंग के खेल में फंस जाती है। पिछले दिनों राजकीय सेवानिवृत्त शिक्षक सम्मान समारोह में आए शिक्षा मंत्री महबूब अली के सामने कई मामले उठाए गए। उन्होंने तत्काल अधिकारियों को जांच के आदेश दिए, लेकिन अभी तक किसी में कार्रवाई नहीं हुई। सोमवार को फिर से मंत्री शहर में होंगे। वे विभाग की योजनाओं के बारे में दोपहर तीन बजे मीडिया से सर्किट हाउस में बात करेंगे। ऐसे में अधिकारियों की सांसें अटकी हुई हैं।

ये हैं घोटाले
फर्नीचर में खेल
रमसा के तहत बने नवीन राजकीय हाईस्कूल में बीते साल शासन के निर्देश पर फर्नीचर खरीदकर सप्लाई किया गया, लेकिन वह एक साल के बाद ही टूट गया। मामला मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचा तो वहां अपर राज्य परियोजना निदेशक को जांच कर तत्काल रिपोर्ट देने को कहा, लेकिन जांच क्रय समिति के सदस्यों में फंसी हुई है।

आईसीटी में घोटाला
इन्फार्मेशन कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी (आईसीटी) के तहत जिले के करीब 70 विद्यालयों में लैब बनाई गई जबकि करीब 40 लाख की लागत से जीआईसी मेरठ में केंद्रीय लैब भी तैयार की गई। वर्तमान में दस विद्यालयों में भी लैब नहीं चल रही हैं। केंद्रीय लैब का 80 फीसदी सामान गायब है।

घटिया क्वालिटी का सामान सप्लाई
नवीन विद्यालयों की प्रयोगशालाओं को आउट डेटिड सामान सप्लाई किया गया है। विच्छेदन के लिए जो सामान दिया गया है वो काफी पहले बंद हो चुका है। इसमें टेबल से लेकर टूल तक शामिल हैं।

विकलांगों को नहीं मिला हक
समेकित शिक्षा के तहत दो साल से बच्चों को सामान नहीं दिया गया था, जबकि पैसा डीआईओएस कार्यालय के पास पड़ा हुआ था। मामला मंत्री के संज्ञान में आया तो उन्होंने जांच बैठा दी। ऐसे में कुछ ही दिन के बाद सामान वितरित कर दिया गया, लेकिन उन अभ्यर्थियों को नहीं मिला, जिन्होंने दो साल पहले आवेदन फार्म भरे थे।

ये सभी काम पिछड़े
इंस्पायर अवार्ड
योजना के हिसाब से विज्ञान की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए हर विद्यालयों को अपने दो छात्रों का नाम इंस्पायर अवार्ड के लिए ऑन लाइन भरने था, लेकिन काफी विद्यालय इसी भर ही नहीं पाए।

एमएसजीपी
अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में सरकार एमएसडीपी योजना के तहत विद्यालय खोल रही है, लेकिन यहां पर उनके निर्माण का काम सुस्त है।

मॉडल स्कूल
जिले में दो मॉडल विद्यालय तैयार हो रहे हैं। इनका निर्माण कार्य बीते साल ही पूरा होना था, लेकिन डीएम के आदेश पर भी सहायक लेखाधिकारी ने पैसा जारी नहीं किया। जब दोनों गांवों के प्रधानों ने डीआईओएस का घेराव किया तो कुछ ही दिन पहले पैसा जारी किया।

मॉडल से पढ़ा रहे शिक्षक
माध्यमिक विद्यालय आदर्श शिक्षा विहीन दिखाई दे रहे हैं। मोटी सैलरी पाने वाले शिक्षक मॉडल पेपर से स्टूडेंट्स को पढ़ा रहे हैं। शनिवार को जेडी डॉ. महेंद्र देव ने कई स्कूलों का निरीक्षण किया। उन्होंने छात्रों से आसान सवाल पूछे, लेकिन वे जवाब तक नहीं दे पाए।

डीआईओएस नहीं आते ऑफिस
डीआईओएस अनिल कुमार मिश्रा कम ही कार्यालय में दिखाई देते हैं। अगस्त से अब तक वे 15 दिन भी काम पर नहीं आए हैं। उन्होंने प्रशासन की गिनी चुनी बैठकों में ही हिस्सा लिया है। समीक्षा बैठकों में अपनी जगह पर एडीआईओएस को भेज देते हैं। कई स्तर पर शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यालयों की फाइलें लटकी हुई हैं। संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने भी शिकायत की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि डीआईओएस कार्यालय में नहीं बैठ रहे हैं। उनसे व्यवस्था सुधारने के लिए कहा गया।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

Spotlight

Most Read

Etah

लेनदेन के विवाद में दो भाइयों को गोली मारकर किया घायल

लेनदेन के विवाद में दो भाइयों को गोली मारकर किया घायल

25 मई 2018

Related Videos

कैराना उपचुनाव से एक दिन पहले बागपत आएंगे पीएम मोदी, ये है वजह

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को बागपत पहुंचे। दरअसल सीएम योगी ने बागपत में 27 मई को होनी वाली  पीएम नरेंद्र मोदी की जनसभा के लिए की जा रही तैयारियों का जायजा लेने आए थे।

25 मई 2018

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे कि कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स और सोशल मीडिया साइट्स के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज़ नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज़ हटा सकते हैं और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डेटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy और Privacy Policy के बारे में और पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree

अमर उजाला ऐप चुनें

सबसे तेज अनुभव के लिए

क्लिक करें Add to Home Screen