शहीदों की विधवाओं ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

Meerut Updated Fri, 09 May 2014 05:30 AM IST
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मेरठ। 1971 के भारत-पाक युद्ध में शहीद जवानों की विधवाओं ने सेना की कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने याचिका के जरिए कोर्ट से अपील की कि उनकी मृत्यु के बाद उनके बच्चों को मकान से नहीं निकाला जाए। वहीं सब एरिया द्वारा काटे गए पानी-बिजली सुचारू कराए जाएं। सेना 15 मई को हाईकोर्ट में जवाब दाखिल करेगी।
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बता दें कि 1971 के भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए आठ जवानों की विधवाओं और एक विकलांग जवान को कैंट में 11 अगस्त 1973 को भवन आवंटित किए गए थे। शहीद विधवाओं का दावा है कि भवन आवंटन केदौरान ऐसी कोई शर्त नहीं रखी गई थी कि उनकी मृत्यु के बाद उनके बच्चों को मकान खाली करना होगा। उधर, सेना मुख्यालय नई दिल्ली के आदेश पर पूर्व जीओसी सब एरिया कमांडर मेजर जनरल वीके यादव ने मकान खाली कराने की कार्रवाई शुरू की। शहीदों की विधवाओं द्वारा लीज डाक्यूमेंट पर हस्ताक्षर नहीं करने और बकाया बिजली बिल नहीं जमा करने पर 12 अगस्त 2013 को कनेक्शन काट दिए थे।
दाखिल की याचिका
सेना की कार्रवाई से नाराज शहीदों की विधवाओं ने हाल ही में हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने कोर्ट से अपील की कि बिजली कनेक्शन दोबारा से चालू कराया जाए। वहीं उनकी मृत्यु के बाद उनके बच्चों को भवन से नहीं निकाला जाए।

सेना के कानूनी तर्क
सेना का तर्क है कि शहीदों की विधवाओं को सैन्य ए-वन भूमि पर सशर्त भवन आवंटित किए थे। लीज डीड के तहत शहीद विधवाओं के निधन के बाद उनके परिजनों को भवन खाली करना होगा। जिससे अन्य शहीदों की विधवाओं को भवन आवंटित किए जा सकें।

शहीदों का सेना सम्मान करती है, लेकिन लीज डीड के तहत शहीदों की विधवाओं की मृत्यु के बाद मकान खाली करने का प्रावधान है। मामला हाईकोर्ट में है, जिस पर सेना अपना जवाब 15 मई को दाखिल करेगी। - एडम कमांडेंट कर्नल आरके शर्मा, सब एरिया मुख्यालय
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