बिना वर्क आर्डर के ठेकेदार बना रहा सड़क

Meerut Updated Thu, 08 May 2014 05:30 AM IST
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मेरठ। निगम में ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत के कारण देवलोक कॉलोनी में बिना वर्क आर्डर के ही सड़क निर्माण किया जा रहा है। घटिया सामग्री लगाने की शिकायत पर चीफ इंजीनियर ने निर्माण कार्य रुकवा दिया है।
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नगर निगम ने देवलोक कॉलोनी में टाइल्स की सड़क बनाने का ठेका दिया था। चुनाव आचार संहिता के कारण ठेकेदार को वर्क आर्डर नहीं दिया गया। इसके बाद भी ठेकेदार ने कॉलोनी में ईंटों के खड़ंजे को उखड़वाकर सड़क निर्माण का काम शुरू करा दिया। टेंडर के नियमानुसार तीन ईंच मोटा पत्थर डालकर टाइल्स लगती है। साथ ही सड़क के दोनों किनारों पर ईंटों से पटरी बनाई जाती है। स्थानीय निवासी राकेश माहेश्वरी और मंगल सैन गुप्ता ने बुधवार को नगर निगम के चीफ इंजीनियर कुलभूषण वार्ष्णेय से शिकायत की कि ठेकेदार पिछले माह से कॉलोनी में कार्य करा रहा है और खड़ंजे की ईंटों को बेच रहा है। टाइल्स पत्थरों पर नहीं बल्कि मिट्टी पर लगाई जा रही है। इस पर चीफ इंजीनियर ने जेई एसपी सिंह से निर्माण कार्य की जानकारी ली। जेई ने सड़क निर्माण का वर्क आर्डर जारी न होने और निर्माण कार्य शुरू न होने की सूचना दी, लेकिन जब जेई ने फोन पर ठेकेदार से बात की तो उसने कार्य करना स्वीकार किया। जेई और ठेकेदार के बीच की वार्ता से स्पष्ट हो गया है कि दोनों के बीच ही वर्क आर्डर हो चुके हैं।
- जेई को मौके पर भेजकर जांच कराई गई है। बगैर वर्क आर्डर ही कार्य चल रहा था। घटिया सामग्री लगाए जाने की बात भी सामने आई है। जांच कराकर ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -कुलभूषण वार्ष्णेय, चीफ इंजीनियर नगर निगम
कैंट बोर्ड के ठेकों में घोटाला
मेरठ। कैंट बोर्ड के ठेकों में सालाना लाखों रुपये का घोटाला हो रहा है। खेल रिवाइज बजट में हुआ। वह ऐसे कि बगैर नए टेंडर और बोर्ड अध्यक्ष की अनुमति के लाखों रुपये का काम करा दिया गया। शिकायत की पड़ताल के बाद कैंट बोर्ड सीईओ ने इस मामले में लेखा विभाग को पांच साल में हुए भुगतान की जांच के आदेश दिए हैं। रिपोर्ट आगामी बोर्ड बैठक में रखी जाएगी।
बता दें कि पिछली बोर्ड बैठक में रिवाइज बजट दर्ज कराने के प्रस्ताव पर सदस्य दिनेश गोयल ने सवाल उठाया था। साथ ही कैंट बोर्ड सीईओ डॉ. डीएन यादव को गुमराह करने का आरोप लगाया था। इसके बाद सीईओ ने मामले की पड़ताल की। इसमें खुलासा हुआ कि छावनी बोर्ड द्वारा बीते वर्षों में पुनरीक्षित बजट में आवंटित राशि के आधार पर बिना किसी विधिक प्रक्रिया के मरम्मत कार्य कराए जा रहे हैं। आमतौर पर मार्च, अप्रैल और मई में प्राप्त होने वाले पुनरीक्षित बजट में मरम्मत कार्य के लिए स्वीकृत राशि में अंतर आ जाता है। नियमों के मुताबिक, पहले से स्वीकृत काम के अतिरिक्त कार्य कराने के लिए या तो बोर्ड नया डेंडर जारी करे या फिर बोर्ड अध्यक्ष से अनुमति ले।
बगैर अनुमति के करोड़ों के काम:
सीईओ ने बताया कि बगैर नए टेंडर या बोर्ड अध्यक्ष की अनुमति के हर साल डेढ़ से दो करोड़ रुपये के अतिरिक्त कार्य कराए गए। यह बड़ी वित्तीय अनियमितता का मामला है। लेखा विभाग से इसकी जांच कराई जा रही है कि आखिर बगैर नए टेंडर या अनुमति के ठेकेदारों को भुगतान कैसे किया गया।
सदस्यों से सीईओ ने मांगा जवाब:
सीईओ ने कैंट उपाध्यक्ष शिप्रा रस्तोगी समेत सभी सात सदस्यों को पत्र जारी किया है। इसमें उन्होंने पूछा है कि क्या उन्होंने इस संबंध में कभी आपत्ति उठाई है। अगर हां, तो उसके दस्तावेज उपलब्ध कराएं, ताकि विधि संगत कार्रवाई की जा सके।
मध्य कमान को भेजेंगे मामला:
सीईओ ने बताया कि बोर्ड में वित्तीय विसंगति गंभीर मामला है। इस पर कार्रवाई के लिये मामले को कैंट एकाउंट कोड 1924 के नियम-14 के तहत जीओसी इन चीफ मध्य कमान लखनऊ को भेजा जाएगा।
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