तो चली जाएगी गगोल दुग्ध संघ चेयरमैन की कुर्सी

Meerut Updated Tue, 06 May 2014 05:30 AM IST
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मेरठ। गगोल सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ के चेयरमैन की कुर्सी पूरी तरह खतरे में मानी जा रही है। विपक्षियों ने बोर्ड में धारा-454 के तहत चेयरमैन इंद्रेश कुमारी के खिलाफ फैसला लाने की योजना बनाई है। वहीं चेयरमैन की कुर्सी पर कब्जा करने की भी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। विपक्षी बोर्ड में पूर्व चेयरमैन विरेन्द्र कोहला पर हुई कार्रवाई को नजीर बना सकते हैं। अब केवल इंद्रेश कुमारी की कुर्सी बचाने में सत्ता का ही जादू चल सकता है। उधर, चेयरमैन की कुर्सी को लेकर राजनीतिक गलियारे ही नहीं, बल्कि पराग दुग्ध प्लांट में भी चर्चाएं होती रहीं।
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गगोल सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ की चेयरमैन इंद्रेश कुमारी हैं। उनके पति वेदपाल कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर के करीबी हैं। इसके चलते वेदपाल की पत्नी इंद्रेश को गगोल सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ का चेयरमैन चुना गया था। हालांकि, उस समय भी अंदर खाने दो गुटों में खेमेबंदी थी। लेकिन मंत्री के सामने किसी की नहीं चल सकी। विपक्ष उसी समय से चेयरमैन के खिलाफ आरोप जुटाने में लगा था, जिसमें अब उसे सफलता मिलती नजर आ रही है। अगर मिल कमिश्नर की रिपोर्ट के आधार पर ही बोर्ड बैठक में डायरेक्टरों ने धारा-454 के तहत सुनवाई में कोहला पर हुई कार्रवाई को नजीर बनाते हुए फैसला सुनाया तो चेयरमैन इंद्रेश ही नहीं, बल्कि सपा के दिग्गजों को बड़ा झटका लगेगा। गगोल सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ के चेयरमैन की कुर्सी को लेकर राजनीति गरमा गई है। हालांकि, सपा नेता हर कीमत पर चेयरमैन की कुर्सी इंद्रेश के लिए ही मानकर चल रहे हैं।
सपा में भी चल रही गोलबंदी:
उठापटक के पीछे सपा की अंदरूनी खेमेबंदी को प्रमुख वजह माना जा रहा है। कहा तो यह भी जा रहा है कि पार्टी के अंदर जातीय तौर पर गोलबंदी के कारण नए समीकरण बने हैं। इससे कभी बगलगीर रहे नेता अब अंदरखाने एक-दूसरे की काट कर रहे हैं। माना जा रहा है कि भविष्य कई और पदों को लेकर भी उठापटक तेज हो सकती है।
ये है धारा-454:
एक्ट की धारा-454 में डायरेक्टरों के बोर्ड को अपना निर्णय लेने का अधिकार है। अब से पहले भी बोर्ड को इस धारा के अंतर्गत निर्णय लेने का अधिकार मिला है। बोर्ड का यह अधिकार ही नहीं, बल्कि कर्तव्य भी है।
इंद्रेश की कुर्सी गई तो होगा विकल्प:
- बोर्ड की बैठक में किसी भी डायरेक्टर को अध्यक्षता का मिलेगा अधिकार
- शासन भी कर सकता है एक डायरेक्टर नामित
- बोर्ड को भी एक सदस्य चुनने का अधिकार
- आयोग दोबारा से करा सकता है सदस्य का चुनाव
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बोर्ड में बहुमत पूरा
गलत तरीके से आदेश हुआ है। बोर्ड को अंतिम निर्णय लेना है। बोर्ड में हमारा पूरा बहुमत है। कुर्सी को कोई खतरा नहीं है। पार्टी में भी किसी तरह का विरोधाभास नहीं है। -वेदपाल बेदी, चेयपर्सन पति
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