विज्ञापन

एक और कृषि क्रांति की जरूरत : बीएल जोशी

Meerut Updated Tue, 29 Jan 2013 05:30 AM IST
विज्ञापन
ख़बर सुनें
मेरठ। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कुलाधिपति बीएल जोशी ने एक और कृषि क्रांति को जरूरी बताया। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे भविष्य के वैज्ञानिक हैं, इसलिए जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उत्पादन कम होने पर चिंता जताते हुए इसे बढ़ाने पर जोर दिया। ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी कार्यक्रम चलाने के निर्देश दिए।
विज्ञापन

समारोह में 223 विद्यार्थियों को डिग्री दी गईं। बीएससी एजी आनर्स की 73, बीटेक इन बायोटेक में 67, एमएससी एजी में 48, एमटेक में 22 और 13 को पीएचडी की उपाधि दी गई। छह होनहारों को कुलपति स्वर्ण पदक, रजत पदक और कांस्य पदक राज्यपाल ने दिए। एक विद्यार्थी मेडल लेने नहीं आ सका। छह मेडल में चार छात्राओं को मिले। कुलाधिपति लखनऊ में मौसम खराब होने के कारण करीब दो घंटे देरी से 12:44 बजे पहुंचे। इसके लिए उन्होंने माफी भी मांगी।
समारोह में राज्यपाल बीएल जोशी ने कहा कि राष्ट्रीय खाद्यान्न उत्पादन में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण भागीदारी है। गन्ने की फसल यहां वरदान है, लेकिन आंकड़ों के मुताबिक उत्पादकता अपेक्षाकृत कम है। कुलाधिपति ने आंकड़ों के हवाले से बताया कि सब्जी और फल उत्पादन में हमारा देश सबसे आगे है परंतु उत्पाद का वैल्यू एडिशन महज सात फीसदी कर पाते हैं। तीन फीसदी प्रसंस्करण होता है। मतलब 97 फीसदी उत्पाद जैसा खेत में उगता है, वैसा ही बेच दिया जाता है। उत्पादन से लेकर स्टोरेज के बीच करीब 25 फीसदी फसल बर्बाद हो जाती है। कुलाधिपति ने कहा ऐसा फार्मिंग सिस्टम विकसित होना चाहिए, जिसका लघु और सीमांत किसान को लाभ मिलेे। उन्होंने कहा कि शोध किसान के काम आने वाला हो। पेटेंट किया जा सके। राज्यपाल ने कहा त्योहारों पर दूध में मिलावट की खबरें आती हैं। मांग और पूर्ति में भारी अंतर की वजह से यह होता है। दूध हो या फसल पूर्ति मांग के अनुरूप होनी चाहिए। कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए कहा वे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कार्यक्रम चलाएं। कुलपति विक्रम चंद्र गोयल ने विवि की उपलब्धियों और आवश्यकताओं के बारे में बताया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एएसआरबी के चेयरमैन डॉ. गुरुबचन सिंह थे।
खेत में पहुंचे साइंस: डॉ. गुरुबचन सिंह
मेरठ। कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल के अध्यक्ष डॉ. गुरुबचन सिंह ने वैज्ञानिक और विद्यार्थियों से कहा आज जरूरत इस बात की है कि प्रयोग लैब की जगह खेतों में हो। ज्यादातर वैज्ञानिक लैब में प्रयोग कर रहे हैं। इससे किसान का भला होने वाला नहीं। जब तक साइंस खेत तक नहीं पहुंचेगी, किसान को लाभ नहीं होगा। डॉ. गुरुबचन ने कहा करीब 40 प्रतिशत किसान खेती छोड़ना चाहते हैं। युवा खेती से जुड़ें रहे, इसके लिए उन्हें प्रेरित करने और सहयोग देने की जरूरत है।
उन्होंने कहा 2012 में देश ने आजादी के बाद से रिकार्ड 258 मिलियन टन गेहूं उत्पादन किया। जनसंख्या के हिसाब से इसे हर साल छह से आठ मिलियन टन बढ़ाने की जरूरत है। यूथ को कैसे खेती से जोड़े रखें, यह बड़ी चुनौती है। जल स्तर गिर रहा है। 83 प्रतिशत पानी कृषि में उपयोग हो रहा। भूमि की उर्वरा शक्ति कम हो रही है। सूक्ष्म पोषक तत्व बढ़ाने हैं। मौसम की मार अलग है। हाल में ठंडी हवाओं से बदले मौसम ने टमाटर और आलू की फसल तबाह कर दी। कृषि लागत बढ़ रही है। इनपुट कम करने की जरूरत है। किसान का कम होता मुनाफा चिंता का विषय है। देश में 120 मिलियन हेक्टेयर भूमि बंजर है। इसे कृषि योग्य बनाना है। कृषि विश्वविद्यालय के छात्रों से डॉ. गुरुबचन सिंह ने कहा कि मंडल के आंकड़ों के मुताबिक 50 प्रतिशत वैज्ञानिक और प्रोफेशनल देश की छह विश्वविद्यालयों से आते हैं। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय को इसमें अपनी जगह बनानी है।
डा. गुरुबचन सिंह के टिप्स
- एक बड़ा मिशन तय करो
- किसान की सेवा करो
- निगेटिव फोर्स को हावी न होने दो
- बिना परवाह काम करो
- मिलजुलकर काम करो
- भगवान में विश्वास रखो

कुलपति पदक पाने वालों के साक्षात्कार
‘गांवों में जाकर कैंप लगाऊंगी’
कुलपति स्वर्ण पदक हासिल करने वाली बीएससी एग्रीकल्चर की छात्रा पल्लवी शरद का कहना है वह अपने जिले के गांवों में कैंप लगाकर उन्नत तकनीक और बीजों की जानकारी देगी। बिहार के पूर्निया जिला निवासी पल्लवी का कहना वह आईएएस बनना चाहती है। नहीं बनी तो जिले और आसपास के गांव में तकनीकी जानकारी देगी। पल्लवी फिलहाल पंतनगर यूनिवर्सिटी से एमएससी कर रही है। वह अपने शिक्षक पिता शंकर कुमार झा को रोल मॉडल मानती है।पल्लवी पिता के साथ मेडल लेने पहुंची।
‘फसल को बीमारी से बचाऊंगी’
कुलपति रजत पदक से सम्मानित बीएससी एग्रीकल्चर की छात्रा तबिंदा अली फसलों को बीमारी से बचाना चाहती हैं। ललितपुर निवासी तबिंदा जेनेटिक एंड प्लांट ब्रीडिंग से एमएससी कर रही हैं। कृषि किताब पढ़ने की शौकीन तबिंदा ने घर में कृषि किताबों की एक लाइब्रेरी बना रखी है। वह रोल मॉडल हरित क्रांति के जनक एमएस स्वामीनाथन को मानती है। तबिंदा का कहना है कि देश में बीमारी के कारण 40 प्रतिशत फसल खराब होती है। वह बीमारी रोधी बीज तैयार करने के लिए शोध करेगी।
‘समाज के लिए कुछ करने का जज्बा’
कुलपति स्वर्ण पदक विजेता बीटेक बायोटेक्नोलॉजी की छात्रा मनीषा पाराशर डिग्री का इस्तेमाल समाज के लिए करना चाहती है। कानपुर निवासी मनीषा फिलहाल एचबीटीआई कानपुर से एमटेक (केमिकल इंजीनियरिंग विद स्पेशलाइजेशन फूड टेक्नोलॉजी) कर रही है। मनीषा अपने पिता डॉ. महेश चंद्रा के साथ पदक लेने पहुंची। बकौल मनीषा वह कुछ ऐसा करना चाहती है, जिससे समाज का कुछ भला हो सके। बायोटेक्नोलॉजी से उत्पाद को कैसे बेहतर किया जा सकता है, इस पर काम करेंगी।
‘दूध को पोषक बनाने पर करेंगे काम’
बीटेक बॉयोटेक्नोलॉजी के छात्र अंकित कुमार श्रीवास्तव ने कुलपति रजत पदक हासिल किया। अंकित के मुताबिक वह देश के लिए कुछ करना चाहता है। पल्लवपुरम फेज दो निवासी अंकित को बीटेक के बाद विदेश में नौकरी मिल रही थी। नौकरी छोड़कर अंकित पढ़ाई को आगे बढ़ाते हुए गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी ग्रेटर नोएडा से फूड प्रोसेसिंग एवं टेक्नोलॉजी में एमटेक कर रहे हैं। अंकित का कहना है कि वो ऐसा रिसर्च करना चाहता हैं कि दूध में पोषक तत्व अलग से मिलाने की जरूरत न पड़े।
सब्जी विक्रेता की बेटी ने ने रोशन किया नाम
सरधना निवासी बीटेक की छात्रा प्रीति पाल ने सब्जी विक्रेता अपने पिता रामनरेश पाल का नाम रोशन किया। प्रीति को कांस्य पदक मिला। छात्रा ने विषम परिस्थिति में पढ़ाई कर 10वीं मेें 89 और 12वीं में 86 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। प्रीति फिलहाल जलगांव (महाराष्ट्र) से पर्यावरण विज्ञान में एमटेक कर रही है। बकौल प्रीति प्रदूषण बढ़ने की वजह से फसल प्रभावित हो रही है। वह पर्यावरण दृष्टिकोण से उत्पादकता बढ़ाने के लिए काम करना चाहती है।
परिजनों की आंख भर आई
रजत पदक प्राप्त करने वाली छात्रा तबिंदा अली को पदक मिलता देख उसकी मां की आंखें भर आईं। छात्रा की मां ने बताया कि उसकी दो बेटी हैं। पिता से सहयोग न मिलने पर भी उसने अपनी दोनों बेटियों को पढ़ाया। एक ने आईआईटी में गोल्ड मेडल प्राप्त किया, वहीं दूसरी ने बीएसएसी एग्रीकल्चर में रजत पदक प्राप्त किया।
बीएससी एग्रीकल्चर में रजत पदक पाने वाले अशोक कुमार शर्मा समारोह में शामिल नहीं हो सके।
दो भवनों का अनावरण
कुलाधिपति एवं राज्यपाल बीएल जोशी ने दीक्षांत समारोह के दौरान विश्वविद्यालय में प्रशासनिक भवन और गांधी हाल परीक्षा भवन का अनावरण किया।
‘दीक्षांत में लाखों का फिजूलखर्च’
मोदीपुरम। प्रबंध परिषद के सदस्य विधायक संगीत सोम का कहना है कि समारोह में 17 से 18 लाख रुपये खर्च किए गए। हालांकि यह खर्च दस लाख में ही सीमित होना था। उन्होंने आरोप लगाया कि खर्च का ब्योरा न देना पड़े इसलिए ही प्रबंध परिषद की बैठक नहीं की गई। फाइनेंस कंट्रोलर पर भी आंकड़ों को छिपाने का आरोप लगाया। कुलसचिव सीएस प्रसाद का कहना था कि अभी खर्च का आंकड़ा नहीं बनाया गया है, जहां जरूरत थी वहीं खर्च किया गया है। दीक्षांत समारोह के आयोजन में पंद्रह लाख खर्च होना भी बहुत कम है।
कर्मचारियों ने फाइनेंस कंट्रोलर को घेरा
मोदीपुरम। कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र हस्तिनापुर में ट्रेनिंग आर्गनाइजर आरपी सिंह को पूर्व कुलपति डॉ. एके बख्शी ने सस्पेंड किया था। आरपी सिंह के अनुसार मामला हाईकोर्ट गया और वो केस जीत गए। वीसी ने सुप्रीमकोर्ट में अपील की और वहां अपील खारिज हो गई। आरपी सिंह ने आरोप लगाया कि छह माह से उन्हें ज्वाइन नहीं कराया जा रहा। आरपी सिंह ने विधायक संगीत सोम के साथ कुलाधिपति से मिलने की कोशिश की लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद फाइनेंस कंट्रोलर आशाराम का घेराव कर दिया। रजिस्ट्रार डॉ. सीएस प्रसाद का कहना है कि मामले कानूनी सलाह ली जा रही है।
कृषि विवि से एमटेक करने वाली एक छात्रा का हाल ही में कैंसर का ऑपरेशन हुआ है। डिग्री लेने आई इस छात्रा के चेहरे पर कैंसर जैसी बीमारी की सिकन भी न दिखी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us