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शिक्षण शुल्क हड़पने वालों का बड़ा रैकेट

Meerut Updated Sat, 29 Dec 2012 05:30 AM IST
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मेरठ। गरीब छात्रों के लिए शुरू की गई समाज कल्याण विभाग की योजना को दलालों की नजर लग गई है। शिक्षण शुल्क और शुल्क प्रतिपूर्ति हड़पने के लिए बड़ा रैकेट खड़ा हो गया है। मेरठ में इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेजों की भरमार होने के चलते रैकेट का यहां पर खास फोकस है। पकड़े जा रहे फर्जीवाड़े इस बात का सबूत हैं। कहने के लिए जांच होती है लेकिन असर नहीं दिख रहा।
मेरठ में 38 इंजीनियरिंग और 58 मैनेजमेंट की पढ़ाई कराने वाले संस्थान हैं। 15 हजार से ज्यादा विद्यार्थी इनमें पढ़ रहे हैं। जिनके पिता की आय दो लाख रुपये तक है, समाज कल्याण विभाग ऐसे एससी और एसटी विद्यार्थियों का शिक्षण शुल्क वहन करता है। ओबीसी और सामान्य वर्ग वालों के लिए यह सीमा एक लाख रुपये है। दोनों वर्गों के बीटेक छात्रों को 40 हजार और एमबीए, एमसीए छात्रों को 25-25 हजार रुपये शुल्क प्रतिपूर्ति के रूप में मिलते हैं। सूत्रों के मुताबिक संस्थानों में खाली सीट रहने पर एक बड़ा रैकेट खड़ा हो गया, जो फर्जी कागजात पर दाखिला दिलवाकर उक्त शुल्क हड़प रहा है। दो दिन पहले आईआईएमटी कॉलेज में पेपर देते फर्जी छात्र पकड़े गए थे। बृहस्पतिवार को मवाना रोड पर एफआईटी संस्थान पर फर्जी दाखिले का आरोप लगाते हुए छात्रों ने हंगामा किया था।
तहसील से खेल शुरू
फर्जीवाड़े की शुरुआत तहसील से होती है। फर्जी आय प्रमाण पत्र बनवाकर आवेदन किया जा रहा है। कॉलेजों से साठगांठ करके दलाल इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। दलाल कैंप और प्रतियोगिता के नाम पर छात्रों के आय प्रमाण पत्र और जाति प्रमाण पत्र एकत्र करते हैं। उनके आधार पर फार्म भरा जाता है। डमी दाखिले पर एक सेमेस्टर की परीक्षा दिलवाकर साल का शिक्षण शुल्क हड़प लिया जाता है।
एमटीयू कर रहा जांच
महामाया टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एमटीयू) के कुलपति प्रो. एसके काक ने मामले में जांच बैठा रखी है। 15 जनवरी तक वेरिफिकेशन के लिए सभी छात्रों के दस्तावेज मांगे गए हैं। जांच के लिए कमेटी गठित की है।
समाज कल्याण विभाग में छात्रों का हंगामा
मेरठ। एफआईटी में गलत तरीके से दाखिले देने का आरोप लगाते हुए शुक्रवार को सीसीएसयू के छात्रों ने जिला समाज कल्याण विभाग में हंगामा किया। जिला समाज कल्याण अधिकारी संजीव नयन मिश्रा से ऐसे छात्रों के शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति के आवेदन निरस्त करने की मांग की। सीडीओ आरके सिंह से भी शिकायत की। सीडीओ ने जिला समाज कल्याण अधिकारी को जांच कराकर रिपोर्ट तलब करने का आदेश दिया है। जिला समाज कल्याण अधिकारी ने बताया कि दो अफसरों की जांच टीम गठित करके उनसे सोमवार तक जांच रिपोर्ट मांगी गई है।
समाज कल्याण विभाग की भी भूमिका संदिग्ध
फर्जीवाड़े में जिला समाज कल्याण विभाग की भूमिका भी संदिग्ध है। कै से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दाखिला पाए छात्रों के आवेदन विभाग ने स्वीकृत कर लिए और सूची शासन को भेज दी। डाटा फीडिंग से शासन को मांग भेजने तक कॉलेज और फीडिंग एजेंसी की भूमिका होती है।

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