छावनी में नामांतरण और मुश्किल

Meerut Updated Fri, 28 Dec 2012 05:30 AM IST
मेरठ। भवन नामांतरण के लिए सभी सदस्यों की सहमति अनिवार्य होने के बाद अब छावनी बोर्ड में बमुश्किल ही भवन नामांतरण हो सकेंगे। एक-दूसरे के प्रस्ताव पर सदस्यों की आपत्ति आम नागरिकों के लिए परेशानी का सबब बनेगी।
छावनी बोर्ड के रिकॉर्ड के अनुसार छावनी वासियों के भवन नामांतरण के डेढ़ हजार से भी अधिक आवेदन हैं। इनमें कई तो दो दशक पुराने हैं। पांच सौ से अधिक मामले ऐसे हैं, जिन पर कोई विवाद नहीं है, जबकि अन्य में सब डिवीजन और चेंज ऑफ पर्पज का विवाद है। छावनी सदस्यों के आपसी विवाद के चलते अधिकांश नामांतरण के मामले रुक जाते हैं। करईगंज स्थित भवन संख्या 157, 158 एवं 159 और दुर्गाबाड़ी स्थित 126 के मामलों को उदाहरण के तौर पर देखें तो ये प्रकरण सिर्फ इसलिए जीओसी इन चीफ मध्य कमान को भेजे गए, क्योंकि दो सदस्यों ने एक-दूसरे के प्रस्ताव का विरोध किया था। उपाध्यक्ष शिप्रा रस्तोगी का कहना है कि पहले हम प्रिंसिपल डायरेक्टर (पीडी) की तरफ से आए पत्र को देखेंगे। अगर आदेश जनता के हक में नहीं होगा, तो पीडी से मुलाकात करेंगे। हर केस मध्य कमान को नहीं भेजा जाएगा। हम मांग करते हैं कि बैठक में 80 प्रतिशत मामले पुराने लगाए जाएं लेकिन जनता द्वारा सभी दस्तावेज न देने के कारण आवेदन शामिल नहीं हो पाते।

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