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एमएड काॅलेज में योग्य शिक्षकाें का टोटा

Meerut Updated Fri, 28 Dec 2012 05:30 AM IST
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मेरठ। तीन साल बाद भी चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से संबद्ध सेल्फ फाइनेंस एमएड कालेजों में योग्य शिक्षकों की तलाश पूरी नहीं हुई है। इससे सत्र 2012-13 में एडमिशन पर संकट खड़ा हो गया है। विश्वविद्यालय द्वारा कराए गए सत्यापन में 27 सेल्फ फाइनेंस कालेजों में एक भी शिक्षक अनुभव के नियमों पर खरा नहीं उतरा। इस कारण काउंसिलिंग का इंतजार कर रहे करीब तीन हजार अभ्यर्थियों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा।
वर्तमान में विश्वविद्यालय से संबद्ध सेल्फ फाइनेंस कालेजों में एमएड का सत्र एक साल पीछे चल रहा है। सत्र 2008-09 में एमएड कालेजों में शिक्षकों पर सवाल खड़े हुए थे। तब विश्वविद्यालय ने शिक्षकों का सत्यापन कराया। कुछ ही कालेजों में सही शिक्षक पाए गए थे। तभी से सत्र देर से चल रहा है। सत्र 2010-11 में सत्यापन के बाद 34 कालेजों में नामांकन हुए।
अभी सत्र 2011-12 में नामांकन प्रक्रिया चल रही है। एडेड कालेजों में काउंसिलिंग से सीट भर चुकी हैं। मगर सेल्फ फाइनेंस कालेज सत्यापन में फेल हो गए। सत्यापन के लिए 34 में से 27 कालेजों के ही शिक्षक पहुंचे। इनमें प्रोफेसर और रीडर के लिए एक शिक्षक के भी पास नियम मुताबिक अनुभव नहीं था। प्रोफेसर के लिए 12 साल और रीडर के लिए आठ साल का टीचिंग अनुभव जरूरी है। जबकि लेक्चरर के लिए यह जरूरी नहीं है। एक एमएड कालेज में एक प्रोफेसर, एक रीडर और तीन लेक्चरर होने चाहिए। डीन एजूकेशन डॉ. आर्येंद्र कुमार का कहना है नियमों पर शिक्षक खरे नहीं उतरे हैं। गुणवत्ता के साथ समझौता नहीं किया जाएगा। कुलपति को रिपोर्ट दी जाएगी।

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