गुस्से में मेरठ

Meerut Updated Tue, 25 Dec 2012 05:30 AM IST
भेदभाव और यौन शोषण पर रोक लगाने की मांग को लेकर शहर की प्रबुद्ध महिलाओं और छात्राओं ने सोमवार अपराह्न अमर उजाला कार्यालय में मंथन किया। पुलिस की ओर से एसपी क्राइम सुधीर कुमार सिंह और सीओ डीपी सिंह ने सुरक्षा के बाबत जवाब दिए। मंथन का संचालन अमर उजाला के संपादक शंभूनाथ शुक्ल ने किया।
ऐसी घटनाएं रोकने के लिए आए सुझाव और जवाब :-

हो सामाजिक बहिष्कार
जो इस तरह का अपराध करते हैं, उनका उस मोहल्ले व समाज से बहिष्कार करना होगा।
स्पीडी ट्रायल, त्वरित न्याय की प्रक्रिया जरूरी
- ऐसे केस में हमेशा त्वरित न्याय की प्रक्रिया होनी जरूरी होती है। सजा नहीं मिलने पर अपराधियों का मनोबल बढ़ता है। पुलिस कोशिश करेगी कि ऐसे केस का निपटारा जल्द से जल्द हो, ताकि दूसरे सबक लें।
छात्राएं- महिलाएं अधिकारियों के नंबर सेव रखें
अपने मोबाइल में शिकायती नंबर व अधिकारियों के नंबर सेव करें, ताकि जरूरत पड़ने पर यदि फोन न कर सकें तो मैसेज कर उन्हें सूचित करें। यदि टेंपों, बसों में अश्लील गाने बज रहे हों या कोई अश्लील हरकत कर रहा है तो तुरंत रूट का नाम, टेंपो, बाइक या गाड़ी का नंबर मैसेज कर दें।
छोटी से छोटी घटना का विरोध जरूर करें
यदि किसी भी उम्र की महिला के साथ छेड़खानी की छोटी से छोटी घटना हो, तो इसका विरोध जरूरी है। चुपचाप न बैठे, क्योंकि अपराध को रोकने में तभी मदद मिलेगी।
थानों में महिला पुलिस बल
महिला पुलिस की कमी पर छेड़छाड़ और यौन शोषण की शिकायत नहीं हो पाती है, इसलिए थानों में दो से तीन महिला कांस्टेबल नियुक्त की गई हैं। थानों के रिसेप्शन पर पुरुष के साथ महिला कांस्टेबल है।
की जा रही है सूची तैयार
महिला से छेड़छाड़ वाले मामलों को रोकने के लिए पिछले केसों की सूची तैयार करवाई जा रही है, जिसमें एक से ज्यादा बार पकड़े गए अपराधियों और उनके परिवार को थाने बुलाकर उनसे पूछताछ की जाती है और बांड भरवाया जाता है।
सोशल साइट का सहारा लें
- सोशल साइट पर भी लोगों को जागरूक करें।

तुरंत हमें फोन करें : सुधीर
एसपी क्राइम सुधीर कुमार सिंह ने कहा कि यदि इस तरह की घटना पर कोई भी महिला फोन या मैसेज कर सूचित कर सकती हैं। मोबाइल नंबर है - 9454401100
- घिनौनी मानसिकता बदलने के लिए नैतिक शिक्षा की जरूरत आज ज्यादा हो गई है, लेकिन हमारे सिस्टम में भी कहीं न कहीं कमी है। मेरठ पुलिस को एक स्पेशल मिशन के साथ महिलाओं की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए, क्या यहां की पुलिस ऐसा कर रही हैं। डॉ. कौसर जहां
- शहीद मंगल पांडे डिग्री कॉलेज के पास चौकी है, लेकिन वह कभी कॉलेज के आसपास आकर नहीं देखती कि यहां पर लड़के खड़े होकर फब्तियां कसते हैं। कई बार पुलिस चौकी में जाकर शिकायत की है, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। -अध्यक्ष आकांक्षा भारद्वाज
-क्या पुलिस बल कम है, जो आए महिलाओं की सुरक्षा पर संकट हो रहा है, क्योंकि अकेले शिक्षा से इन समस्याओं का हल नहीं निकाला जा सकता। मेरठ में सुरक्षा के लिए कदम उठा रही है पुलिस।
-प्रधानाचार्या आभा अग्रवाल
- यह बात सही है कि हमें खुद आगे आना होगा, लेकिन यदि कभी पुलिस की आवश्यकता पड़ती है, तो थानों में सही तरह से व्यवहार नहीं होता है और इसमें महिला पुलिस का रवैया सही नहीं होता है। उदाहरण महिला थाना, जहां पर हमेशा गाली गलौज में बात की जाती है, क्या पुलिस प्रशासन इसे चेक करता है। इसलिए कई बार युवती हिम्मत नहीं जुटा पाती, क्योंकि उसे पुलिस का सपोर्ट नहीं मिलता है।
-समाजसेविका अतुल शर्मा
-लड़की यदि हिम्मत जुटाती है, तो विपक्षी बाद में उन्हें तंग करते हैं। इसके अलावा बसों में महिला केबिन सुरक्षित नहीं है ? क्या पुलिस प्रशासन मेरठ के लिए कोई मुहिम है।
-डायरेक्टर पूनम कौशिक
- हमें जागरूक होना होगा, लेकिन पुलिस को भी महिला की सुरक्षा के लिए गंभीरता दिखानी होगी, क्योंकि यह सोचना कि हर अपराध से भी बड़ा अपराध महिला वर्ग के साथ गलत काम होना है। इससे बड़ा अपराध कोई नहीं है।
-पायल रत्नम
- दिल्ली गैंगरेप वाले मामले में आरोपियों के लिए मांग हो रही है कि फांसी दी जाए, या उनके हाथ-पैर काटकर जेल आदि में रखा जाए आदि, लेकिन सवाल यह है कि क्या ऐसा करने के बाद इस तरह के घिनौने अपराध रुक जाएंगे। इसकी क्या गारंटी है, ऐसी मानसिकता वाले लोगों को सुधारा जा सकता है।
- शताब्दी नगर निवासी छात्रा प्रीति
-अपराधों के मामले में महिला ही नहीं आम आदमी भी आवाज उठाने से डरता है। आम जनता को जागरूक करने के लिए माह में पुलिस प्रशासन के साथ बैठक होनी चाहिए, क्योंकि पुलिस प्रशासन को ऐसे मामलों के लिए आम जनता के बीच आना ही पड़ेगा।
-अनीता गर्ग शिक्षिका
- महिलाओं से छेड़खानी के मामले में खुद से भी हिम्मत जुटानी होगी, क्योंकि पीड़ित व उसके साथ की लड़कियां अक्सर चुप रह जाती हैं, लेकिन जब कोई लड़की छेड़खानी व ब्लात्कार का शिकार होती है, तो पुलिस उसकी रिपोर्ट लिखने की बजाय उसे थाने से खदेड़ देती है और टालमटोल कर लड़कियों से ही डरा देने वाले सवाल पूछ डालती है। इसके लिए पुलिस प्रशासन क्या कर रहा है।
- हॉकी खिलाड़ी सरस्वती
- आज घर-घर में मोरल एजुकेशन की जरूरत है, लेकिन एक ऐसा कानून भी हो, जो इस तरह के अपराधों के लिए खौफ पैदा करें।
-प्रधानाचार्या मनु भारद्वाज
- एक स्पेशल कोर्ट तैयार होनी चाहिए, जिसमें महिला अपराध की सुनवाई जल्दी हो सके और कड़ा से कड़ा मापदंड हो, ताकि एक डर की भावना पैदा की जा सके और ऐसे अपराधियों की पहचान भी की जा सके।
-प्रधानाचार्या सुमनलता शर्मा
शामिल हुए
दिगंबर जैन गर्ल्स इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या आभा अग्रवाल, शिक्षिका अनीता गर्ग व छात्राएं पायल व सान्या, भारतीय गर्ल्स इंटर कॉलेज आबूलेन की प्रधानाचार्या सुमनलता शर्मा, खालसा गर्ल्स इंटर कालेज की प्रधानाचार्या डॉ. मनु भारद्वाज, संकल्प संस्था से सचिव अतुल शर्मा व काउंसलर कादंबरी, शहीद मंगल पांडे डिग्री कॉलेज से छात्रसंघ अध्यक्ष आकांक्षा भारद्वाज, शिवानी शर्मा, पूर्व माध्यमिक विद्यालय फफूंडा से शिक्षिका डॉ. कौसर जहां, केएमसी कॉलेज ऑफ नर्सिंग से डायरेक्टर पूनम कौशिक, अभिनव नृत्यशाला की निर्देशिका पायल रत्नम, एनएएस कॉलेज की हॉकी खिलाड़ियों में अंशुली, प्रभा, सरस्वती, प्रियंका, दीप्ती, संगिनी ब्यूटी पॉर्लर से सुशील राठी, भाई जोगा सिंह पब्लिक स्कूल से कमल सक्सेना, त्रिदेव शिक्षा एवं सेवा समिति से ऋषिकुमार शर्मा और संजीव मौजूद रहे।

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