किसानों के हक पर शुगर मिलों ने मारी कुंडली

Meerut Updated Fri, 21 Dec 2012 05:31 AM IST
मेरठ। किसान हितों के लिए बनाए गए तमाम कानूनी नियम-कायदों के बावजूद चीनी मिल बेलगाम होती जा रही है। कोर्ट के आदेश और सरकारी डंडे को धता बताते हुए न केवल चीनी मिलों ने गत पेराई सत्र के विलंबित गन्ना मूल्य भुगतान का ब्याज दिया है बल्कि वर्तमान पेराई सत्र का गन्ना मूल्य भुगतान भी दबाना शुरू कर दिया है। शासन की उदासीनता से जहां मिलों की मनमानी बढ़ती जा रही है वहीं किसानों में भी रोष व्याप्त होता जा रहा है।
गत पेराई सत्र 2011-12 में मंडल की 15 चीनी मिलों ने करीब 2500 करोड़ रुपये का गन्ना किसानों से खरीदा था। लेकिन सकौती और अनामिका चीनी मिल को छोड़कर अन्य चीनी मिलों ने संपूर्ण भुगतान नहीं किया। करीब 800 करोड़ रुपये चीनी मिलों पर बकाया रह गया। मामला न्यायालय पहुुंचा। तब सुप्रीम कोर्ट ने 20 अप्रैल 2011 को तीन किस्तों 7 मई, 7 जून और 7 जुलाई तक (33-33 फीसदी की समान किस्त) भुगतान करने के आदेश दिए थे। लेकिन किसी भी मिल ने आदेशानुसार भुगतान नहीं किया। मलकपुर और मोदीनगर मिल ने अभी तक बकाया भुगतान नहीं किया है।
शुगर केन कंट्रोल आर्डर 1966 के नियम 3-3ए में 14 दिन के बाद गन्ना मूल्य का भुगतान करने पर 15 प्रतिशत की दर से विलंबित अवधि का ब्याज देय हो जाता है। चीनी मिलों पर विलंबित गन्ना मूल्य भुगतान का करीब 44 करोड़ रुपये ब्याज और करीब 28 करोड़ रुपये समिति कमीशन बकाया चल रहा है।

ये हैं ब्याज की स्थिति
मिल ब्याज (लाख रुपये में)
मवाना 827.67
दौराला 271.61
किनौनी 144.94
नंगलामल 359.23
मोदीनगर 699.14
सिंभावली 494.01
बृजनाथपुर 146.39
बागपत 233.53
रमाला 151.80
मलकपुर 939.85
बुलंदशहर 69.29
साबितगढ़ 50.20
........................................................................
(ब्याज की गणना 30 नवंबर 2012 तक की है और आंकड़े गन्ना विभाग से लिए गए हैं। मोदीनगर पर 780 लाख और मलकपुर मिल पर 1219 लाख रुपये का गन्ना भुगतान भी बकाया है।)

क्या कहते हैं किसान प्रतिनिधि
किसानों का हक दबाना मिलों का शगल बन गया है। सरकार को ब्याज दिलाने के लिए मिलों पर दबाव बनाना चाहिए।
चौधरी पीतम सिंह, पूर्व चेयरमैन दौराला गन्ना विकास समिति

सरकार की हीलाहवाली से शुगर मिल बेलगाम होती जा रही है। गन्ने के दम पर चीनी मिलों ने कई-कई यूनिटें खड़ी कर दी है इसके बाद भी घाटा होने का रोना रोती है। अगर मिलों ने ब्याज का भुगतान नहीं किया तो मिलों पर ताला डाला जाएगा।
डा. राजकुमार सांगवान, वरिष्ठ नेता रालोद

क्या कहते हैं अधिकारी
ब्याज का भुगतान हर हाल में कराया जाएगा। ब्याज की लगातार गणना कराई जा रही है। अगर किसी मिल को लगाए गए ब्याज पर आपत्ति होगी तो वो आर्बिटेशन में जा सकते हैं। लेकिन विलंबित भुगतान का ब्याज देना होगा।
- डा. वीबी सिंह, उप गन्ना आयुक्त मेरठ परिक्षेत्र

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