बगैर टैक्स नहीं होगा कैंट में विकास

Meerut Updated Thu, 20 Dec 2012 05:30 AM IST
मेरठ। बोर्ड अध्यक्ष मेजर जनरल वीके यादव ने स्पष्ट किया कि छावनी क्षेत्र में विकास तभी होगा जब क्षेत्रवासी स्वेच्छा से गृह और जल कर समय पर अदा करेंगे। साथ ही बढ़े कर को वापस करने की सदस्यों की मांग को ये कह कर खारिज कर दिया कि टैक्स सदस्यों की सहमति से ही बढ़ाये गये हैं।
उपाध्यक्ष समेत एक सदस्य को बोर्ड अध्यक्ष द्वारा जारी सुझाव पत्र और विकास की मांग को लेकर निर्वाचित सदस्यों ने बुधवार को बोर्ड बैठक का बहिष्कार कर दिया। बोर्ड बैठक में पहुंचे अध्यक्ष मेजर जनरल वीके यादव ने बैठक के लिए जरूरी समस्त सदस्यों के पचास प्रतिशत न होने की स्थिति में बैठक स्थगित करने की घोषणा कर दी। इसके बाद पत्रकारों से बात करते हुए वीके यादव ने कहा कि गृह और जल कर बढ़ाने का प्रस्ताव सदस्यों की सहमति के बाद ही बोर्ड बैठक में शामिल किया गया। गृह और जल के अलावा कैंट फंड प्रोपर्टियों पर टैक्स बढ़ाया जाएगा, क्योंकि रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया कि अगर विकास चाहिए तो राजस्व खुद बढ़ाना होगा।

अब 26 को होगी स्थगित बोर्ड बैठक
बोर्ड अध्यक्ष ने पहले 20 दिसंबर को स्थगित बैठक बुलाने के आदेश दिये, लेकिन उपाध्यक्ष शिप्रा रस्तोगी समेत अन्य सदस्यों ने सीईओ को पत्र लिखकर 25 दिसंबर के बाद बैठक बुलाने की अपील की। जिसके बाद बोर्ड अध्यक्ष ने 26 दिसंबर को बैठक बुलाने केआदेश दिये।

स्थगित बैठक में शामिल होंगे सदस्य
26 दिसंबर को स्थगित बोर्ड बैठक में निर्वाचित सदस्य शामिल होंगे, क्योंकि छावनी एक्ट में स्थगित बोर्ड बैठक में कोरम की आवश्यकता नहीं होती। ऐसे में अध्यक्ष के पास कोरम पूरा न होने पर भी प्रस्ताव पास और रिजेक्ट करने की पावर होती है। ऐसे में सदस्य अपना विरोध दर्ज कराने को स्थगित बैठक में शामिल होंगे इसकी प्रबल संभावना है।

बोर्ड अध्यक्ष और सदस्यों की रार पहुंची मध्य कमान
मेरठ। कैंट बोर्ड अध्यक्ष और निर्वाचित सदस्यों की तकरार जीओसी इन चीफ मध्य कमान तक पहुंच गई है। बुधवार को छावनी उपाध्यक्ष समेत सदस्यों ने भी मध्य कमान को पत्र भेजकर बोर्ड अध्यक्ष एवं सीईओ पर धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए और मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की। उधर, बोर्ड अध्यक्ष ने मध्य कमान को रिपोर्ट भेजकर अपनी स्थिति साफ कर दी है।
सदस्यों के आरोप
उपाध्यक्ष शिप्रा रस्तोगी ने जीओसी इन चीफ मध्य कमान को भेजे पत्र में बोर्ड अध्यक्ष जीओसी मेजर जनरल वीके यादव पर सदस्यों को निलंबित करने की धमकी देने, अध्यक्ष और सीईओ के तानाशाही रवैये के चलते छावनी में विकास कार्य न होने की बात कही है। पत्र में पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। पत्र पर दिनेश गोयल, अजमल कमाल, बीना वाधवा, जगमोहन शाकाल, ममता गुप्ता, शशी साहू, प्रेम कुमार ढींगरा ने हस्ताक्षर किए है।
जीओसी की खरी-खरी
बोर्ड अध्यक्ष वीके यादव ने कहा कि यदि भविष्य में सदस्य उक्त घटना की पुनरावृत्ति करते हैं या फिर बेबुनियाद लांछन लगाते हैं तो उन्हें दोबारा सुझाव पत्र दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की रिपोर्ट जीओसी इन चीफ मध्य कमान को भेज दी गई है।

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