जनता रामभरोेसे, सुरक्षा नेताओं-अफसरों के हिस्से

Meerut Updated Sat, 15 Dec 2012 05:30 AM IST
मेरठ। जमाना बदला लेकिन पुलिस आज भी अंग्रेजों के जमाने की थ्री नॉट थ्री राइफल के भरोसे है। अत्याधुनिक असलहों से जनता से ज्यादा नेताओं और अफसरों की सुरक्षा होती है। शासन से आरटीआई में उठाए सवालों पर खुद थानेदारों ने माना है कि उनके पास हौसला बहुत है लेकिन बदलाव की जरूरत है।
सोहराब गेट निवासी लोकेश खुराना ने पुलिस महानिदेशक से सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत छह बिंदुओं पर जवाब मांगे थे, इनमें एक प्रमुख बिंदु पर शासन के निर्देश पर स्थानीय जनसूचना अधिकारी द्वारा रिपोर्ट दी गई जिसमें थानेदारों ने 303 बोर की राइफलों को विपरीत परिस्थितियों में बेहतर तो बताया लेकिन साथ ही यह कहने से गुरेज नहीं किया कि आधुनिक युग में पुलिस को भी अत्याधुनिक असलहों और संसाधनों से लैस करने की जरूरत है।
थानेदारों का मंतव्य
मवाना : थाने पर उपलब्ध शस्त्र विपरीत परिस्थितियों से निपटने में सक्षम नहीं हैं।
बहसुमा : कोई उन्नत किस्म का असलाह नहीं। केवल रिवाल्वर, पिस्टल हैं। आधुनिक हथियारों का होना आवश्यक है। पर्याप्त पुलिस बल भी नहीं है।
परतापुर : 303 बोर की राइफल हैं। बदमाशों, आतंकियों, माफिया सरगनाओं और गैंगों के मुकाबले अत्याधुनिक असलाह नहीं हैं।
ब्रह्मपुरी : जनता की जान माल की सुरक्षा के लिए राइफलों के अलावा हमारे पास एके 47 और अत्याधुनिक असलाह हैं।
सिविल लाइन : केवल लाठी और पुरानी राइफलों से बदमाशों, आपराधिक गैंगों, आतंकियों से नागरिकों की सुरक्षा संभव नहीं। मामला शासन संबंधी है। यह उस थाने की रिपोर्ट है जिसके अंतर्गत सभी प्रमुख सरकारी भवन, कोर्ट कचहरी और आला अफसरों के आवास आते हैं।
दौराला : स्वचालित व अत्याधुनिक असलहों से लैस रहने वाले अपराधियों, आतंकवादियों, आपराधिक गैंगों से थाने पर उपलब्ध असलहों से निपटना संभव नहीं।
कंकरखेड़ा : हम लाठी डंडा और पुराने असलहों से ही नागरिकों की सुरक्षा को प्रतिबद्ध हैं। आधुनिक युग में इन हथियारों से सुरक्षा संभव नहीं लेकिन हम हर परिस्थिति में सक्षम हैं।

पुलिस लाइन
303 बोर की राइफल उत्तम किस्म का शस्त्र है। राइफल/असलाह पुराने जरूर हैं लेकिन सुरक्षा में सक्षम हैं। जिले के सभी थानों को अनुपात में अत्याधुनिक शस्त्रों से लैस किया गया है। आने वाले समय में राज्य की शस्त्र खरीद के अनुसार ही सभी कर्मचारी आधुनिक शस्त्रों से लैस हो सकेंगे। जिले में विधायकों/सांसदों/मंत्रीगणों/अन्य वीवीआईपी व वीआईपी/अंगरक्षक सुरक्षा प्राप्त अधिकारियों की सुरक्षा में सशस्त्र पुलिस के 16 हेड कांस्टेबिल व 62 कांस्टेबिल नियुक्त हैं।
प्रमुख सवाल
वर्तमान में अपराधियों/आतंकवादियों/माफिया सरगनाओं व आपराधिक गैंग के स्वचालित व अत्याधुनिक अवैध हथियारों से बेखौफ होकर आपराधिक घटनाएं/लूटपाट/हत्या आदि जघन्य अपराध किए जाते हैं। पुलिस केवल लाठी व पुरानी राइफलों के द्वारा किस प्रकार नागरिकों की जानमाल की सुरक्षा को प्रतिबद्ध है। क्या पुलिस सुनिश्चित कर सकती है कि उनके हथियार हर विपरीत परिस्थिति से निपटने में सक्षम हैं।

प्रमुख सचिव (गृह) से की बातचीत
लोकेश खुराना के अनुसार मैंने इस संबंध में प्रमुख सचिव (गृह) आरएम श्रीवास्तव से फोन पर वार्ता की। पूछा कि इन हालातों में कैसे पुलिस आम जनता की सुरक्षा कर पाएगी। गृह सचिव ने मुझसे पूछा कि आपको यह जानकारी कहां से मिली। मैंने बताया कि आरटीआई के जरिए। इस पर उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए डीजीपी से चर्चा करने की बात कही है।

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