जिला अस्पताल में दलालों का जाल

Meerut Updated Thu, 29 Nov 2012 12:00 PM IST
मेरठ।
केस वन -
शिखा देवी दो महीने से सिरदर्द से परेशान थीं। कुछ दिनों तक तो दवाओं से काम चलाया। जब दवा भी बेअसर होने लगी तो शिखा ने जिला अस्पताल के कमरा नंबर तीन में जांच कराई। चिकित्सक ने आंखों की जांच कर चश्मे का नंबर दे दिया। वार्ड के बाहर ही बैठे एक आदमी ने चश्मा देने के नाम पर 150 रुपये वसूल लिए।
केस टू-
खैरनगर निवासी रिजवान को कम दिखता था। रिजवान इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचा। डॉक्टर ने जांच कर चश्मे का नंबर दे दिया। रिजवान से भी चश्मे के नाम पर 125 रुपये वसूल लिए गए।

ये दो केस तो जिला अस्पताल में दलालों की सक्रियता की मात्र बानगी हैं। न जानें कितने मरीज होंगे, जो इन दलालों के चंगुल में फंसकर अपनी जेब ढीली कर रहे होंगे। वैसे तो जिला अस्पताल से चश्मा न देने का प्रावधान है। नियमानुसार यहां जांच के बाद मरीज को नंबर दे दिया जाता है, उसे बाहर से चश्मा खरीदना होता है। सूत्रों की मानें तो डॉक्टर की मिलीभगत से ही दलाल और चश्मा विक्रेता आई वार्ड के बाहर घूमते रहते हैं और मरीजों को प्रलोभन देकर अपने जाल में फांसते हैं।
वर्जन--
- अस्पताल से चश्मा नहीं दिया जाता। बुजुर्ग, बीमार मरीज चश्मा बनवाने की मांग करते हैं, तो इंसानियत के चलते उन्हें बाहर से चश्मा बनवाकर देने की सुविधा दी जाती है।
- डॉ. सुशील कुमार, आप्टोमिस्ट, जिला अस्पताल
अस्पताल में दो आप्टोमिस्ट अल्टरनेट बैठते हैं। अस्पताल से चश्मा दिए जाने का प्रावधान नहीं है। अस्पताल के अंदर ये कैसे हो रहा है, इसकी जांच की जाएगी।
- ए. एस राठौर, एसआईसी

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