Òमेरे पास है एके-47Ó

Meerut Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
मेरठ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की पुलिस के लिए मोस्ट वांटेड सुशील मूंछ के पास एके-47 होना बताया गया है। मूंछ ने यह एके-47, 1991 में सतवीर गुर्जर से 55 हजार रुपये में खरीदी थी। एसटीएफ की पूछताछ में उसने इसके अलावा कई और राज उगले हैं।
मुजफ्फरनगर निवासी एक लाख के इनामी अपराधी सुशील मूंछ को एसटीएफ वेस्ट यूपी ने बुधवार रात जयपुर के पिंक स्क्वायर मॉल से गिरफ्तार किया था। उस समय मूंछ मॉल से ‘जब तक है जान’ मूवी देखकर निकला था। एसटीएफ ने मूंछ से दो घंटे गहन पूछताछ की थी। एसटीएफ सूत्रों के अनुसार मूंछ ने स्वीकारा है कि उसके पास एके-47 है लेकिन यह कहकर पेंच फंसा दिया कि यह तो उसने 21 साल पहले सतवीर गुर्जर से खरीदी थी। उस समय सतवीर की महेंद्र फौजी से गैंगवार चल रही थी। अब एके 47 कहां है, इस पर मूंछ ने कहा कि वह चाकू तक साथ नहीं रखता। सेफ जगह रखी है, जब जरूरत होती है, मंगवा ली जाती है।
मूंछ से जब संपत्तियों का ब्योरा मांगा गया तो जवाब मिला कि उसके नाम कोई संपत्ति नहीं। वसूली कितनी आती है? इस पर जवाब था कि मैं नहीं करता। जेल से बाहर आकर कितनी हत्याएं कराईं? जवाब था कि मैंने कोई अपराध नहीं किया। उसने कहा, 2008 के बाद मेरा नाम फर्जी तरीके से पुलिस रिकार्ड में डाला गया। बसपा जिला पंचायत सदस्य संजय गुर्जर की हत्या के लिए जरूर बददो के कहने पर शूटर उपलब्ध कराने की बात मूंछ ने स्वीकार की।
वो कौन थी...
जयपुर में जब एसटीएफ ने मूंछ को दबोचा तो उसके साथ एक युवती भी थी। पूछताछ में युवती कोटा की बताई गई। कई दिनों से जयपुर रह रहे मूंछ ने खुद को बड़ा कारोबारी बताया था। हालांकि पूछताछ के बाद युवती को छोड़ दिया गया था।
एक रंग की दो पोलो
एसटीएफ के अनुसार मूंछ के पास एक नहीं दो पोलो कार हैं। दोनों एक ही रंग की लेकिन एक पर सीएच (चंडीगढ़) और दूसरे पर यूके (उत्तराखंड) का नंबर रहता था। इन्हीं दो कारों को वह बदल-बदलकर प्रयोग करता था। अपने पास कोई असलाह इसलिए नहीं रखा कि कहीं चेकिंग में पकड़ा गया तो भेद खुल जाएगा। मूंछ ने जयपुर में फ्लैट भी खरीदा था लेकिन बाफर की गिरफ्तारी के बाद फ्लैट बेचकर गेस्ट हाउस में रहने लगा था।
हनक से मूंछ ऊंची
एसटीएफ अफसरों के अनुसार मूंछ कभी किसी मामले में खुद सामने नहीं आया। उसने हरियाणा, बागपत और मुजफ्फरनगर के ऐसे नए शूटरों की टीम जोड़ी जिनका पुलिस रिकार्ड में नाम नहीं रहा। उसके पास पुराने शार्प शूटरों में सुकरम पाल और कपिल कटारिया ही रहे। ‘प्रधानजी’ और ‘मूंछ’ के नाम की हनक से ही सब काम हो जाते थे।

स्पेशल ऑडिट टीम
अफसरों के अनुसार मूंछ ने वेस्ट यूपी की चीनी मिलों के ठेकों को अपने रिश्तेदारों के नाम कराया। एक चीनी मिल से उगाही भी खूब की। देहरादून, चंडीगढ़, जयपुर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई बेनामी संपत्ति खड़ी कीं लेकिन कहीं खुद को शामिल नहीं किया। मेरठ में भी मूंछ का कई बड़ी संपत्तियों में पार्टनरशिप होना सामने आया है। इसकी जांच के लिए स्पेशल ऑडिट टीम गठित की जा रही है।

अब लाइन में...
अब एसटीएफ के निशाने पर सुकरम पाल, विनोद बावला, भरतू नाई, योगेश भदौड़ा, कपिल कटारिया, धमेंद्र किरठल और सहदेव हैं।

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