भाकियू अड़ी टोल रहा फ्री

Meerut Updated Fri, 02 Nov 2012 12:00 PM IST
मोदीपुरम/मेरठ। भारतीय किसान यूनियन की हुंकार के आगे प्रशासन लाचार नजर आया। दो दौर की वार्ता में प्रशासनिक अफसरों ने कई बार पैतरे बदले, लेकिन राकेश टिकैत की सीधी बात के आगे सभी पैतरे चित हो गए। भाकियू नेताओं को विश्वास में लेने की सीडीओ और एडीएम प्रशासन ने पूरी कोशिश की, लेकिन नेताओं ने स्पष्ट कहा कि जब तक मुजफ्फरनगर और मेरठ के लोगों से दस से पंद्रह रुपये (लोकल चार्ज) टोल टैक्स लेने का लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा, धरना जारी रहेगा।
एनएच 58 मेरठ-हरिद्वार मार्ग पर सिवाया टोल प्लाजा को भाकियू ने बुधवार दोपहर बारह बजे से अपने कब्जे में लेकर वाहनों को टोल फ्री कर रखा है। रात में भी भाकियू नेताओं ने टोल पर डेरा जमाए रखा। टोल प्लाजा के एजीएम जीवी रंगासाई की गुहार के 24 घंटे बाद डीएम के निर्देश पर सीडीओ आरके सिंह, एडीएम (प्रशासन) दीपचंद, एसडीएम सरधना अखंड प्रताप सिंह, सीओ, उप गन्ना आयुक्त, अवकाश प्राप्त पीसीएस अफसर महक सिंह गुरुवार को सिवाया टोल प्लाजा पहुंचे।
प्रशासनिक अधिकारियों और भाकियू नेताओं के बीच दोपहर पौन एक बजे वार्ता शुरू हुई। दो घंटे तक चली यह मैराथन वार्ता बेनतीजा रही। इसके बाद अफसर उठकर चले गए और अपनी गाड़ियों के पास कुछ चुनिंदा नेताओं से वार्ता करते रहे, लेकिन बात बनी नहीं। आधा घंटा बाद दूसरे दौर की वार्ता शुरू हुई। इस बार टोल अथॉरिटी ने मुआवजा, सर्विस रोड आदि की बात मान ली। मगर किसान यूनियन मेरठ और मुजफ्फरनगर के लोगों को लोकल टोल टैक्स (15 रुपये) पर अड़ गई। राकेश टिकैत ने स्पष्ट कर दिया कि वे किसी भी आश्वासन पर भरोसा नहीं करेंगे। लिखित में आश्वासन दिया जाए कि मेरठ और मुजफ्फरनगर के लोगों से लोकल चार्ज ही वसूला जाएगा। जिसके बाद वार्ता बेनतीजा समाप्त हो गई।
गुरुवार को धरने की अध्यक्षता गजेंद्र सिंह अहलावत और संचालन बिजेंद्र वालिया ने किया। जिला पंचायत अध्यक्ष मनिंदर पाल सिंह, भाजपा नेता सुनील भराला, विनीत अग्रवाल, मांगेराम त्यागी, डॉ. महबूब, विष्णु दत्त पाराशर, विजयपाल घोपला, रिछपाल अन्ना आदि ने संबोधित किया।

किसने क्या कहा
किसानों के बकाया पचास करोड़ मुआवजे का प्रशासन शीघ्र भुगतान करे। टोल टैक्स देने के भय से सिटी बसें टोल से आगे तक नहीं चलाई जातीं। इसे आगे तक चलाया जाए, मुजफ्फरनगर और मेरठ के लोगाें को छूट दी जाए।
- राकेश टिकैत, राष्ट्रीय प्रवक्ता भाकियू

टोल सिस्टम ही गड़बड़ है, जिसकी वजह से लोगों में आक्रोश है। टोल पर रोज दुर्व्यवहार हो रहा है, इस बारे में एनएचएआई अफसरों से कहा गया है। धमकी देकर नहीं इज्जत से टोल लिए जाएं। कोई भी कानून जन आकांक्षाओं के अनुसार ही चलेगा। मैं संगठनों को टोल में छूट दिए जाने का पक्षधर हूं।
- आरके सिंह, सीडीओ

यहां टोल का होना ही समस्याओं की जड़ है। यहां से टोल आगे शिफ्ट किए जाने का निर्णय प्रशासन ले चुका है। एनएचएआई के अफसर भी इससे सहमत हो गए है। उन्होंने अपने अफसरों को पत्र लिखा है।
- दीपचंद, एडीएम (प्रशासन)

पांच घंटे तक करते रहे मशक्कत
सिवाया टोल प्लाजा को कब्जे में लिए भाकियू भीड़ जुटाने में तो कामयाब नहीं रही, लेकिन पांच घंटे की लंबी मशक्कत के बाद भी प्रशासनिक अधिकारी इन्हें समझा नहीं पाए। अवकाश प्राप्त पीसीएस अफसर और भाकियू के नजदीक माने जाने वाले महक सिंह की पैतरेबाजी भी काम न आई। एडीएम प्रशासन ने तो यहां तक कह दिया कि अब टोल पर किसी के साथ दुर्व्यवहार हुआ तो वो प्राथमिकी खुद दर्ज कराएंगे। सीडीओ ने कहा कि धरना समाप्त कर एक माह का समय दिया जाए, लेकिन सभी तर्क राकेश टिकैत की मांगों के आगे फीके पड़ गए। अफसरों ने चार मांगें मानने का लिखित में आश्वासन दिया, लेकिन इस पर भाकियू राजी नहीं हुई।

भाकियू की मुख्य मांगें
1 मेरठ और मुजफ्फरनगर के लोगों से लोकल टोल टैक्स वसूला जाए।
2 किसानों का बकाया पंचास करोड़ रुपये का भुगतान किया जाए।
3 जिनकी भूमि सड़क एवं टोल में गई है, उन किसानों को टोल फ्री किया जाए।
4 सर्विस रोड का निर्माण कराया जाए।
5 टोल पर वसूली का पैमाना स्पष्ट किया जाए।
6 जितनी अधिक राशि पहले वसूल की गई है, उसे प्रशासन के खाते में जमा कराया जाए।
7 नाला, स्ट्रीट लाइट, अस्पताल सहित अन्य मुख्य स्थानों पर रोड कट दिया जाए।

अफसरों द्वारा दिया गया लिखित आश्वासन
1 15 नवंबर से सड़क निर्माण शुरू करा दिया जाएगा।
2 टोल प्लाजा को दूसरी जगह स्थानांतरित कराया जाएगा।
3 दस किमी की परिधि में आने वाले गांवों, आवासीय कालोनियों के लोगों एवं किसानों को स्मार्ट कार्ड मुहैया कराया जाएगा।
4- टोल पर दुर्व्यवहार होने पर दोषी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी और टोल से बाउंसर हटाए जाएंगे।
5 जिनकी भूमि अधिग्रहित हुई है, उन्हें भी स्मार्ट कार्ड दिए जाने पर विचार किया जाएगा।

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