गन्ना किसानों ने मांगा कम से कम 350 रुपये का भाव

Meerut Updated Thu, 18 Oct 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। गन्ना मूल्य निर्धारण समिति की बैठक में गन्ना किसानों और गन्ना समिति प्रतिनिधियों ने पेराई सत्र 2012-13 के लिए गन्ना मूल्य कम से कम 350 रुपये घोषित करने की मांग की है। किसानों ने कहा है कि यदि इससे कम भाव घोषित हुआ तो किसानों की लागत नहीं आएगी और किसान का गन्ना खेती से मोहभंग होगा जिसका खामियाजा मिलों को ही भुगतना पड़ेगा। अब मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समित की बैठक में मूल्य निर्धारण पर विचार होगा।
गन्ना संस्थान में बुधवार को प्रभारी प्रमुख सचिव गन्ना एवं चीनी उद्योग और गन्ना आयुक्त कामरान रिजवी की अध्यक्षता में गन्ना मूल्य निर्धारण समिति की बैठक हुई। इसमें गन्ना सहकारी संघ और गन्ना समितियों केपदाधिकारियों ने गन्ना मूल्य बढ़ाने का अलग-अलग प्रस्ताव दिया। गन्ना अध्यक्ष संगठन के प्रदेश महासचिव अरविंद सिंह ने समिति को बताया कि गन्ना उत्पादन में किसान की लागत प्रति हेक्टेअर दो लाख 16 हजार रुपये आती है। 550 कुंतल प्रति हेक्टेअर औसत उत्पादन हो रहा है। किसानों का प्रति कुंतल 356 रुपये गन्ना मूल्य पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे में यदि किसान अपने श्रम की कीमत में से छह रुपये प्रति कुंतल छोड़ भी दे तो भी 350 रुपये से कम कीमत तय नहीं होना चाहिए। किसानों ने यह भी बताया कि यदि किसान गेहूं, धान, मेंथा, तंबाकू और केले का उत्पादन करते हैं तो उन्हें 20 से 25 हजार रुपये प्रति हेक्टेअर अतिरिक्त लाभ मिलता है। मगर कई क्षेत्रों में ये फसलें कम होती हैं वहां गन्ना बोना मजबूरी है। देवबंद के किसान नेता प्रीतम सिंह ने महंगाई, घटतौली और मिलों की कारस्तानी की बखिया उधेड़ते हुए तर्क के साथ 325 से 350 रुपये गन्ना मूल्य तय करने का आग्रह किया। बढ़े गन्ना मूल्य की मांग और पिछला बकाया भुगतान की मांग को लेकर कुछ किसान नेताओं ने बैठक का बहिष्कार भी किया। सिर्फ पिछले सत्र का ही करीब 250 करोड़ बकाया है। बैठक में अरविंद गंगवार बरेली, अनिल मणि त्रिपाठी, राजकुमार सिंह आदि ने विचार व्यक्त किये।
बैठक में गन्ना संस्थान के निदेशक और अपर आयुक्त एनपी सिंह सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।
प्रभारी प्रमुख सचिव रिजवी ने बताया कि सभी पक्षों की बात सुन ली गई है। सबकी भावनाओं को ध्यान में रखकर सरकार मूल्य तय करेगी।

मिल प्रतिनिधि बोले पुराना ही देने में हो रही मुश्किल
समिति केसामने मिल प्रतिनिधियोें ने पिछले बार से भी दो रुपये कम कीमत तय करने का आग्रह किया है। हालांकि मिलों के बीच भाव को लेकर मतभिन्नता नजर आई।
इंडियन शुगर मिल एसोसिएशन के दीपक गुप्तारा और श्याम लाल गुप्ता कहना था कि चीनी का भाव, चीनी की उत्पादन लागत देखते हुए वे 238 रुपये से अधिक दे पाने की स्थिति में नहीं हैं। यह पिछले साल सामान्य प्रजाति के गन्ना मूल्य 240 रुपये से भी दो रुपये कम है। इस कीमत को भी देने केलिए उन्होंने दो रुपये प्रति कुंतल समिति का कमीशन, इंट्री टैक्स व खरीद टैक्स से छूट की मांग की। एसोसिएशन का तर्क था कि पिछले साल 35 रुपये कुंतल भाव बढ़ा दिया गया था इसलिए इस बार न बढ़ाया जाय। चीनें मिले पहले से ही घाटे में चल रही हैं। किसान उन्नत किस्म के बीज से उन्नत गन्ने की खेती करें ताकि ज्यादा से ज्यादा सुगर की रिकवरी बढ़ सके। हालांकि इंडियन पोटाश लिमिटेड की ओर से वीपी दीक्षित ने कहा कि 260 रुपये तक भाव दे सकते हैं। शुगर फेडरेशन की ओर से कहा गया कि सरकार जो भी कीमत तय करेगी, फेडरेशन उसका भुगतान करने को तैयार है।

स्टैंडर्ड साफ्टवेयर लगवाएं, वरना मिल पर ही घटतौली का हिसाब
किसान नेता प्रीतम सिंह ने गन्ना मिलों की ओर से घटतौली के खेल की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कमिश्नर को बताया कि इलेक्ट्रानिक कांटे से घटतौली घटने के बजाय बढ़ गई है। उन्होंने आग्रह किया कि मिलों को स्टैंडर्ड साफ्टवेयर लगाने के लिए अनिवार्य किया जाय। यदि ऐसा नहीं हुआ और घटतौली पकड़ी गई तो किसान मिलों पर ही इसका हिसाब करेंगे।

मिलों को तौल कांटे पर लठैत तैनात करने से रोकें
शुगर मिलों में कर्मचारियों को वीआरएस पर निकालने पर किसानों की ओर से नाराजगी जताई गई। किसानों का कहना है कि ज्यादा कर्मचारी दिखाकर मिलें ऐसा कर रही हैं। लेकिन जब मिलें चलती हैं तो बाहरी लठैत से काम लेती हैं जिनका कोई ब्योरा नहीं होता। उन्होंने कमिश्नर से इसका भी संज्ञान लेने का आग्रह किया।

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