‘सपा ने खोला विकास का बंद पट’

Meerut Updated Tue, 16 Oct 2012 12:00 PM IST
मेरठ। सपा सरकार ने बसपा राज में बंद हो चुके विकास के पट खोलने का काम किया है। प्रदेश में विदेशी निवेश के साथ ही सभी मुख्यालय को फोरलेन से जोड़ने की कोशिश हो रही है। अभी बेरोजगारी भत्ता दिया जा रहा है, जल्द ही युवाओं को रोजगार मिलेगा। ये बातें जेल चुंगी स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित कार्यकर्ता सम्मान समारोह में आए सांसद धर्मेंद्र यादव ने कही।
जिला और महानगर की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में सांसद ने कहा कि सपा सरकार विकास के लिए तत्पर है, तभी बिल गेट्स जैसे उद्यमी प्रदेश में निवेश करने को तैयार हैं, जिससे युवाओं को रोजगार मिलेगा। बसपा सरकार ने मोहिउद्दीनपुर मिल को बंद कराया था और सपा ने सरकार बनते ही शुरू कराने का काम किया। मेरठ के लोगों ने विधानसभा चुनाव में सपा का साथ दिया और लोकसभा में भी उनकी बारी है। राज्य मंत्री शाहिद मंजूर ने कहा कि पांच साल में प्रदेश की हालत खराब थी। बसपा की बिगड़ी व्यवस्था को सुधारने में वक्त लगेगा। एमएलसी डॉ. सरोजनी अग्रवाल ने कहा बसपा सरकार ने विकास का पैसा मूर्तियों पर लगाया और जनता का उत्पीड़न किया। गोपाल अग्रवाल ने कहा कि समाजवाद ने ही देश को हर प्रतिकूल परिस्थितियों से उभारा है। अतुल प्रधान ने कहा कि अब भी कई पदों पर बसपा मानसिकता से अधिकारी काम कर रहे हैं, आगे ऐसा नहीं चलेगा। संचालन जिलाध्यक्ष जयबीर सिंह और महानगर अध्यक्ष हाजी इसरार सैफी ने किया। वक्ताओं में विधायक प्रभुदयाल वाल्मीकि, आदिल चौधरी, रफीक अंसारी, राजपाल सिंह, राजपाल कश्यप, रमेश प्रजापति रहे। इस दौरान जिला प्रवक्ता चैतन्य स्वामी, डॉ. राजेश, शैलेंद्र अग्रवाल, अरशद मक्की, वसीम, वीर पाल ढाका, अरशद अहमद, शाहिद पहलवान आदि मौजूद रहे।
मंच पर नजर आई गुटबाजी
मंच पर गुटबाजी हावी रही। राज्य मंत्री शाहिद मंजूर और एमएलसी डॉ. सरोजनी अग्रवाल लंबे समय बाद मंच पर एक साथ नजर आए लेकिन राजनीतिक दूरी और गुटबाजी साफ नजर आई। दोनों के समर्थकों ने जुबानी जंग दिखाकर गुटबाजी को सार्वजनिक मंच पर भी जाहिर किया।
अव्यवस्था भी
मंच पर चढ़ने को लेकर नेताओं और कार्यकर्ताओं ने किसी की न सुनी और हालात इतने बिगड़ गए कि शाहिद मंजूर को मंच संभालना पड़ा। इसके बाद स्थिति नियंत्रित हुई लेकिन पूरे कार्यक्रम के दौरान ऐसा कई बार हुआ।

कार्यकर्ता सम्मान समारोह में चमके ‘नेता’
मेरठ। कार्यकर्ता सम्मान समारोह में 1200 ऐसे कार्यकर्ताओं का सम्मान होना था, जो बसपा शासन में जेल भेजे गये थे लेकिन सम्मान समारोह में कार्यकर्ताओं के बजाए पार्टी में कद रखने वाले नेताओं का ही सम्मान हुआ। सांसद धर्मेंद्र यादव ने मंच पर आंदोलन का नेतृत्व करने वाले राज्य मंत्री शाहिद मंजूर, रफीक अंसारी, ओमपाल गुर्जर, अतुल प्रधान, रफीक अंसारी, ओपी राणा, कुलदीप उज्ज्वल, महिला संगठन जिलाध्यक्ष इरशाद जहां, गुड़िया जेहरा, अख्तरी बेगम, रेखा गुप्ता, सुरेश जैन को प्रशस्ति पत्र भेंट किए। वहीं प्रशस्ति पत्र न मिलने से कार्यकर्ताओं में रोष है। मोहम्मद चांद कहते हैं कि संघर्षशील कार्यकर्ता के नाम पर नेताओं का ही सम्मान हुआ। अनीश भाई और शरीफ मेवाती कहते हैं आंदोलन के दौरान वे जेल गए, लेकिन प्रशस्ति पत्र देना तो दूर मंच तक नहीं बुलाया गया। वार्ड 68 से पार्षद सलमान का कहना है कि मुकदमे उन पर हुए और बसपा से सपा में आए लोगों को सम्मानित किया गया। समारोह में सैकड़ों कार्यकर्ता ऐसे रहे, जिन्हें प्रशस्ति पत्र नहीं मिला।
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जो कार्यकर्ता जिसके नेतृत्व में गये थे, उन्हें प्रशस्ति पत्र सौंपे गये। नेता और कार्यकर्ता सभी बराबर है, लेकिन ये सभी को कार्यक्रम में सम्मानित करना संभव नहीं था। जयवीर सिंह जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष इसरार सैफी

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