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सी रंगराजन कमेटी की सिफारिश किसानों पर पड़ेगी भारी

Meerut Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
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मेरठ। चीनी उद्योग को विनियंत्रित करने के लिए गठित की गई प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन सी रंगराजन की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट से जहां चीनी उद्योग का चेहरा खिल गया है वहीं गन्ना किसानों के चेहरों की हवाइयां उड़ने लगी हैं। किसान नेताओं ने लेवी चीनी कोटा खत्म कर सरकार द्वारा बाजार रेट से खरीदे जाने का तो स्वागत किया है लेकिन बाकी सिफारिशों की निंदा करते हुए इसे किसानों को बर्बाद करने वाला कदम बताया है।
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केंद्र और राज्य सरकार न तय करे गन्ने का रेट
वर्तमान में केंद्र सरकार गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) और राज्य सरकार स्टेट एडवाइजरी प्राइस (एसएपी) जारी करती है। केंद्र सरकार ने पेराई सत्र 2012-13 के लिए एफआरपी 170 रुपये प्रति कुंतल जारी किया है जबकि राज्य सरकार ने अभी तक एसएपी घोषित नहीं की है। रंगराजन कमेटी में यह अधिकार केंद्र और राज्य सरकार की बजाय मिलों को तय करने की सिफारिश की गई है। किसानों का कहना है कि इससे तो चीनी उद्योग बेलगाम हो जाएगा और इनका सिंडीकेट किसानों को तबाह कर देगा।
लंबे समय तक हो गन्ना रकबा रिजर्व
वर्तमान में गन्ना विभाग हर साल मिल क्षेत्र का गन्ना रकबा रिजर्व करता है। कमेटी की सिफारिश में इसे एक साल की बजाय लंबे समय तक रिजर्व करने की बात कही गई है। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष वीएम सिंह और दौराला गन्ना समिति के पूर्व चेयरमैन चौधरी पीतम सिंह ने इसे किसान विरोधी माना है। कहा कि इससे चीनी मिलों का गठजोड़ हो जाएगा और किसानों के रकबा नीति में बंधे होने का फायदा मिल फसल का कम रेट देकर उठाएगी।
चीनी बिक्री की आय से जोड़ें गन्ना मूल्य
कमेटी ने किसानों को गन्ने का मूल्य पहले चरण में एफआरपी से देकर बाद में गन्ना मूल्य को चीनी बिक्री से होने वाली आय से जोड़ने की सिफारिश की है। इसमें किसानों का कहना है कि सरकार इसमें भी एफआरपी जैसा खेल करेगी। गन्ना उत्पादन लागत 300 रुपये प्रति कुंतल से ज्यादा आ रही है और केंद्र सरकार ने एफआरपी 170 रुपये तय की है। चीनी बिक्री से होेने वाली आय में से कितना हिस्सा किसानों को मिलेगा, तय नहीं किया गया है।
लागू नहीं होने दी जाएगी सिफारिश
भाकियू के राष्ट्रीय महासचिव चौधरी युद्धबीर सिंह, राष्टीय किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष वीएम सिंह आदि ने ऐलान किया है कि पेश की गई इन किसान विरोधी सिफारिशों को किसी भी सूरत में लागू नहीं होने दिया जाएगा।
रालोद की चुप्पी पर किसान हैरान
मेरठ। रालोद सुप्रीमो के केंद्र में मंत्री बनने के बाद खेती-किसानी के मुद्दे ठंडे बस्ते में जाने से किसान हैरान हैं। पार्टी द्वारा किसान की बेसिक नीड डीजल व खाद मूल्य वृद्धि के बाद सी रंगराजन कमेटी से गन्ने पर आए संकट पर भी पार्टी नेताओं की चुप्पी किसानों को साल रही है। किसानों का कहना है कि केंद्र सरकार के किसान विरोधी फैसलों पर चुप्पी का खामियाजा पार्टी को फिर से भुुगतना पड़ सकता है। रविवार को मवाना क्षेत्र में होने वाली जयंत चौधरी की तीन सभाओं में ये मुद्दे उठने की संभावना है।
विधानसभा चुनाव से पहले रालोद ने केंद्र में एक मंत्री पद की शर्त पर कांग्रेेस से गठबंधन किया था। चुनाव से पहले पार्टी सुप्रीमो चौधरी अजित सिंह को नागरिक उड्डयन मंत्री बना दिया गया था लेकिन किसान मुद्दों को ढंग से न उठाने और वोटरों को पार्टी के पक्ष में लामबंद न करने का खामियाजा चुनाव में उठाना पड़ा था। केंद्र सरकार ने पहले डीजल के दाम में पांच रुपये की बढ़ोतरी की। इससे पहले खाद और डीएपी के दामों को बढ़ाया था। अब पश्चिमी यूपी के किसानों की लाइफ लाइन माना जाने वाले गन्ने पर भी सी रंगराजन समिति से संकट पैदा हो गया है। पार्टी के बेस वोटर पार्टी नेताओं की चुप्पी पर हैरानगी जता रहे हैं। जंगेठी निवासी चौधरी लहिरी सिंह, पाथौली निवासी सुभाष चंद, चिंदौड़ी निवासी मास्टर राजबल सिंह और सहंसरपाल आदि ने बताया कि किसान विरोधी फैसलों पर पार्टी का रुख किसानों की ओर न होने से इसका खामियाजा लोकसभा चुनावों में भी उठाना पड़ सकता है।
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