बेहतर अनुभव के लिए एप चुनें।
TRY NOW

..तब छात्रसंघ भंग करने पर हुई थी तोड़फोड़

Meerut Updated Sat, 13 Oct 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

ख़बर सुनें
मेरठ, आज छात्रसंघ में भी जातियों के पैनल बन रहे हैं। छात्र भी जाति के छात्र नेता को पसंद कर रहे हैं। ऐसा पहले नहीं था।
विज्ञापन

छात्र राजनीति में सक्रिय रहे 1967 में मेरठ कॉलेज सांस्कृतिक संगम समिति सचिव पीके लोमस इसे दुर्भाग्य मानते हैं। वे कहते हैं कि पहले छात्र मुद्दे देखते थे और छात्र नेता मुद्दों पर वोट मांगते थे। सीसीएसयू बनने से पहले मेरठ कॉलेज छात्र राजनीति का केंद्र था। छात्रों का उत्पीड़न ही मुद्दा हुआ करता था। 1967 में सरकार ने जब छात्र संघ भंग कर दिया तो पूरे प्रदेश में आंदोलन हुआ। मेरठ में अप्सरा सिनेमा और कचहरी के पास तोड़फोड़ तक हुई थी। अब जातियों में बंटे होने के कारण ही नेताओं में आंदोलन की धार नहीं बची है।
कचहरी पुल, चौरसिया पान भंडार और आरएस ब्रदर्स रेस्टोरेंट छात्र राजनीति का अड्डा हुआ करता था। वर्तमान में सुपरटेक पामग्रीन वेलफेयर एसोसिएशन प्रधान सचिव पीके लोमस कहते हैं कि मेरठ कॉलेज में 1967 तक ग्रामीण पृष्ठभूमि के अध्यक्ष चुने जाते रहे। 1968 में महावीर जैन अध्यक्ष चुने गए। फिर शहरी पृष्ठभूमि के छात्रों की दखलंदाजी भी छात्र राजनीति में बढ़ी। कैंपस की दुर्दशा पर वे कहते हैं कि पहले कैंपस में जंजीर नहीं दिखती थी, अब रास्ते में जंजीर देखकर दर्द होता है।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us