वकीलों की ड्रेस में हमला, शुरू हुआ नया ट्रेंड

Meerut Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
मेरठ। लंबे समय से चली आ रही दो गैंगों के बीच अदावत ने गुरुवार को फिर खूनी मोड़ ले लिया है। गुरुवार को गाजियाबाद कचहरी में ऊधम पर हुए हमले में नया ट्रेंड वकीलों की वेशभूषा में हमला का शुरू हुआ है। गैंगवार फिर से छिड़ने और इस नए ट्रेंड ने पुलिस की पेशानी पर बल डाल दिए हैं। एडीजीपी ने सभी एसएसपी को निर्देश दिए हैं कि वे कोर्ट और बार एसोसिएशन से सहयोग लेकर बीच का रास्ता निकालें।
अभी तक पुलिस की वर्दी में तो हमलों के तमाम मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन कचहरी में ऊधम पर हुए जानलेवा हमले में जिस तरह से पहली बार हमलावरों ने वकीलों की ड्रेस चुनी, उससे भविष्य में खतरे के संकेत मिलने लगे हैं। जिस समय हमला हुआ, पहले तो पुलिस और पीएसी समझ नहीं पाई कि ये हमलावर हैं या वकील। पीएसी के जवानों ने वकील की ड्रेस पहनकर आए बदमाशों को दबोचा तो असली वकील भी कुछ समझ नहीं पाए। उन्होंने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। बाद में जब स्थिति स्पष्ट हुई तो अपराध के इस नए ट्रेंड का पता चला। इसके साथ ही नई बहस भी शुरू हो गई कि अब कचहरी में फुलप्रूफ योजना को अमली जामा पहनाने के लिए वकीलों की भी चेकिंग करनी होगी।
एडीजीपी एनसीआर जेएल त्रिपाठी का कहना है कि जोन के सभी एसएसपी को निर्देश दिए गए हैं कि वे कोर्ट और बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों से वार्ता कर बीच का रास्ता निकालें। गैंगवार रोकने के लिए ऊधम और भदौड़ा गैंग के सदस्यों को चिह्नित कर गिरफ्तारी के निर्देश दिए गए हैं।

कभी दोस्त थे, अब एक-दूसरे के खून के प्यासे
मेरठ/सरूरपुर। भदौड़ा बंधुओं और ऊधम में कभी गहरी यारी थी, लेकिन ठेके हथियाने के विवाद के बाद शुरू हुई खूनी अदावत ने ऐसा सिर उठाया कि दोनों गैंग अलग होकर एक दूसरे के खून के प्यासे बन बैठे। इस रंजिश में ऊधम द्वारा की गई प्रमोद भदौड़ा की हत्या ने आग में घी का काम किया। इसके बाद से योगेश भदौड़ा अपने भाई की हत्या का बदला लेने को मौका तलाशता रहा।
पुलिस के अनुसार किनौनी चीनी मिल में बैगास के ठेके लेने को लेकर योगेश और ऊधम में विवाद हो गया था। 2008 में मिल के डीजीएम सिद्धार्थ उपाध्याय की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई। इसी दिन कलीना के प्रधान साहब सिंह की भी हत्या हुई।
ऊधम को शक था कि साहब सिंह भदौड़ा ग्रुप का है। इन हत्याओं में ऊधम नामजद हुआ। दो हत्याओं के बाद दोनाें के बीच पाला खिंच गया। इसी दौरान ऊधम पर 50 हजार का इनाम घोषित हो गया। 2009 में ऊधम का साथ देने के शक में बिजेंद्र प्रमुख पर शूटरों ने घर में घुसकर गोलियां बरसाईं। इस हमले में योगेश भदौड़ा का नाम सामने आया।
31 अक्तूबर 2011 में भदौड़ा में एक तेहरवीं में योगेश भदौड़ा के भाई प्रमोद भदौड़ा की गोलियां बरसाते हुए हत्या कर दी गई। इस दौरान योगेश बुलंदशहर जेल में था। प्रमोद भदौड़ा की हत्या में ऊधम के साथ बिजेंद्र प्रमुख भी नामजद हुआ था। प्रमोद की हत्या के बाद से ही साफ हो गया था कि गैंगवार अब फिर से छिड़ेगी।
गुरुवार को गाजियाबाद कचहरी में ऊधम पर हुए हमले में पुलिस योगेश भदौड़ा का ही हाथ मानकर चल रही है। उधर, भदौड़ा और करनावल में तमाम चर्चाओं के साथ ही ग्रामीण खौफ में हैं।

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