मेरठ कचहरी परिसर में भी हो सकती है ऐसी घटना

Meerut Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
मेरठ। गाजियाबाद स्थित कचहरी परिसर में उधम सिंह पर हमले जैसी घटनाएं मेरठ कचहरी परिसर में भी हो सकती हैं। यहां भी सुरक्षा इंतजाम को लेकर पुलिस ढील बरत रही है।
बुधवार को ही कचहरी परिसर में दबथला निवासी मनोज पर दो युवकों ने चाकुओं से हमला किया था। मनोज को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। इससे पहले बंदियों में मारपीट हुई थी। अन्य भी कई घटनाएं कचहरी परिसर में हो चुकी हैं। पांच साल पहले मेरठ कचहरी परिसर में रवींद्र भूरा को गोलियों से भून दिया गया था। उसके बाद से कचहरी में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे थे और पुलिस की खूब किरकिरी हुई थी। अब गाजियाबाद में उधम पर हमला होने से मेरठ कचहरी में भी सुरक्षा इंतजाम को लेकर चिंता लाजिमी हो गई है।
आने जाने वालों को चेक नहीं करती पुलिस
मेरठ कचहरी परिसर में जाने के लिए छह गेट हैं, मगर चार गेटों से आम लोगों की आवाजाही ज्यादा होती हैं। इन गेटों पर पुलिसकर्मी रहते जरूर हैं, लेकिन आने जाने वालों की कोई चेकिंग नहीं होती। चाहे बाइक वाला हो, या पैदल सब बेरोकटोक कचहरी परिसर में पहुंचते हैं। इसमें चिंता की बात यह भी है कि बार असलहाधारी भी आराम से कचहरी परिसर में घूमते नजर आते हैं। उनसे यह नहीं पूछा जाता कि असलहा कचहरी परिसर में क्यों लेकर जा रहे हो।
गेटों पर लगा रहता है वाहनों का जमावड़ा
मेरठ। कचहरी के मुख्य गेटों में शुमार अंबेडकर चौराहा वाला गेट और हनुमान मंदिर के सामने वाले गेट पर भीड़ का ये आलम रहता है कि वहां गेटों पर ही पार्किंग बना दी गई है। रोजाना ही सैकड़ों बाइकें गेट से सटाकर खड़ी कर दी जाती हैं। इसकी वजह से सड़क तक बाइक और चार पहिया वाहनों के खड़े होने से यातायात जाम भी लग जाता है। ऐसे में किसी पर हमला होना और आसान हो जाता है।
विकास भवन के सामने क्यों लगाए जाते हैं बंदी वाहन
मेरठ। कचहरी परिसर में दो बंदी हवालात हैं। एक हवालात मंदिर के सामने वाले गेट के बाईं तरफ बनी है, जबकि दूसरी हवालात सीजेएम कोर्ट के निकट बनी है। बावजूद इसके रोजाना ही एक बंदी वाहन सीडीओ कार्यालय के सामने खड़ा किया जाता है। वहां खड़े होने वाले बंदी वाहन में कई शातिरों को अदालत में पेशी के लिए लाया जाता है।

अधिवक्ता ने सुनाई हमले की आंखों देखी
मेरठ। ऊधम पर जिस समय हमला हुआ, मेरठ के एक अधिवक्ता ऊधम के पीछे ही खड़े थे। गनीमत रही कि वह बाल बाल बचे। दिन भर चर्चा भी रही कि हमले में वह भी घायल हो गए। उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ होने पर संपर्क टूट गया था। देर शाम अधिवक्ता वापस मेरठ अपने घर पहुंचे तो परिवार ने भी राहत की सांस ली। गंगानगर निवासी अधिवक्ता गुरुवार दोपहर एडीजी कोर्ट संख्या 13 में ऊधम के मामले में तारीख लगवाकर लौट रहे थे। जब वह कोर्ट संख्या 10 और 11 के बीच में थे, तभी वकीलों की ड्रेस में पांच युवक आ गए। उस वक्त वह ऊधम से दो कदम पीछे चल रहे थे। उनमें से एक के पास कारबाइन थी, जिसे देखकर गाजियाबाद के ही एक बुजुर्ग अधिवक्ता ने यह टिप्पणी भी की कि वकील होकर तुम असलहा साथ लेकर कोर्ट पहुंच रहे हो। इस पर बदमाश ने बुजुर्ग अधिवक्ता को धमकाकर चुप किया और फिर एकाएक ही ऊधम की कनपटी पर असलहा तान दिया। इतना होते ही ऊधम ने झटके से असलहा ऊपर की तरफ धकेल दिया, जिससे गोली चलने पर उसके सिर में जख्म हो गया और वह कोर्ट में जाकर घुस गया।

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