‘सियाचीन में प्रकृति से लड़ते हैं जवान’

Meerut Updated Mon, 08 Oct 2012 12:00 PM IST
मेरठ। सेना भवन की ओर से एक माह के लिए एडवेंचर विंग कार्यक्रम के तहत मेरठ के प्रमोद मोघा ने सियाचीन में सेना के कार्यों को न सिर्फ नजदीक से देखा, बल्कि उसका हिस्सा बने। लौटने पर प्रमोद ने ‘अमर उजाला’ को अनुभव बताए। उन्होंने बताया कि 30 अगस्त को वे मेरठ से रवाना हएु। कुल 43 लोगों को चयन देश भर से किया गया था, लेकिन स्वास्थ्य परीक्षण में पास होने के वाले 16 लोगों को ही एडवेंचर विंग में शामिल किया गया। उन्हें हर दिन सेना के साथ 40 से 50 किमी चलना पड़ता था। सियाचीन की 19 हजार फीट ऊंची चोटी पर एक स्थान से दूसरे तक जाना होता था। वहां आक्सीजन कम होने से सांस लेने में दिक्कत होती है और खाने को फ्रेश सामान नहीं मिलता। सियाचीन में दुश्मनों से ज्यादा सेना हर कदम पर प्रकृति से लड़ती है। एक सेना के जवान को पहाड़ी पर 90 दिन रहना होता है। पूरी वादी बर्फ से पटी है। बर्फ बदन के किसी हिस्से में लग जाए तो वह हिस्सा गल जाता है।

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