‘चमके थोड़ी देर गगन में, मगर छा गए नयन-नयन में’

Meerut Updated Thu, 04 Oct 2012 12:00 PM IST
मेरठ। बुधवार को जीमखाना मैदान में गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित आल इंडिया मुशायरा और कवि सम्मेलन में साहित्य के जानेमाने हस्ताक्षरों का जमावड़ा लगा। शृंगार से लेकर हास्य, व्यंग्य और सामाजिक व्यवस्था पर चोट करती रचनाओं की ऐसी बयार बही की देर रात तक श्रोता गोते लगाते रहे।
अखिल भारतीय कौमी एकता एवं सद्भावना समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम का संचालन करते हुए सुनील जोगी ने अपनी चुटीली रचनाओं से लोगों को खूब हंसाया। अशोक साहिल ने कहा काबा ओ काशी को कुछ नजदीक लाने के लिए, मैं भटकता फिर रहा हूं पुल बनाने के लिए। डॉ. एजाज पापुलर ने इस कदर हमने कलेजे को जला रखा है दिल को अब आह का गोदाम बना रखा है... पर युवा श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाईं। राहत इंदौरी ने अपनी प्रसिद्ध गजल फैसला जो भी हो मंजूर होना चाहिए पढ़ते हुए कहा कि उम्र सारी गुजर गई है जिनकी पत्थर तोड़ते-तोड़ते, उनके हाथों में भी कोहिनूर होना चाहिए। नुजरत अमरोही ने कुछ यूं कहा भुलाकर गम जमाने के यूं खुलकर मुस्कुराइये, खुशी के गीत लेकर हमारे दर पर आइये।
गोपाल दास नीरज के गीत अब न वो दर्द न वो दिल, न वो दीवाने रहे, अब न वो साज न वो सोज, अब न वो गाने रहे, साकी तू अब भी यहां किसके लिए बैठा है, अब न वो जाम, न वो मय न वो पैमाने रहे को लोगों ने जमकर सराहा। लाल बहादुर शास्त्री कोे याद करते हुए उन्होंने कहा कि चमके थोड़ी देर गगन में, मगर छा गए नयन-नयन में, डेढ़ साल में साठ साल का कर्ज चुका कर चले गए।
हिंदी संस्थान के अध्यक्ष उदय प्रताप, मुनव्वर राणा, सरिता शर्मा, नुसरत मेंहदी, बनज कुमार बनज, पूनम वर्मा, वेद प्रकाश वेद, खालिद आजमी, नदीम शाद, रंजीत सिंह, इकबाल अशर, कीर्ति माथुर, शरीफ भारती, नजमुल इस्लाम ने भी रचनाएं सुनाई। मुख्य अतिथि के रूप में याचिका समिति के अध्यक्ष नसीब पठान ने भाग लिया। विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व मंत्री डॉ. मेराजउद्दीन और नवाब कोकब हमीद, कैंट बोर्ड की उपाध्यक्ष शिप्रा रस्तोगी रहे। अध्यक्षता डीएम विकास गोठलवाल ने की। आयोजक संस्था के अध्यक्ष काजी जैनुर राशिदीन, सचिव दुखहरण शर्मा, कोषाध्यक्ष अमित कुमार, इमरान, हाजी इरशाद, नौशाद ऋषि कुमार, रामचंद्र यादव, विवेक यादव आदि मौजूद रहे। आठ बजे के नियत समय की जगह कार्यक्रम दस बजे शुरू हुआ। इस दौरान इंतजार कर रहे श्रोताओं ने हूटिंग भी की।

साहित्यकारों को मिलने वाले 111 पुरस्कार बहाल होंगे
मेरठ। गत सरकार के कार्यकाल में साहित्यकारों को मिलने वाले 111 पुरस्कारों में कटौती कर केवल तीन पुरस्कार प्रदान किए थे। वर्तमान सरकार ने सभी पुरस्कारों को फिर से देना आरंभ कर दिया है। यह बात हिंदी संस्थान के अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने कही। अमर उजाला से बातचीत उन्होंने कहा कि साहित्यकारों को इलाज की सुविधा के साथ नगद सम्मान राशि में भी बढ़ोतरी की जाएगी। मरणोपरांत भी साहित्यकारों को सम्मानित किया जाएगा। इस कड़ी में भारत भूषण भी सम्मानित किए जाएंगे।

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