रक्तदान करने से कम हो जाता है हृदय रोग का खतरा

Meerut Updated Mon, 01 Oct 2012 12:00 PM IST
मेरठ। खून न सिर्फ मौत से जूझ रहे लोगों की जिंदगी बचाता है, साथ ही रक्तदान करने वालों को भी कई बीमारियों से बचाता है। शरीर में रक्त जिस रफ्तार से बनता है उसी रफ्तार और मात्रा में यह स्वत: समाप्त भी हो जाता है। जानकारी के अभाव में लोग रक्तदान नहीं करते हैं। हालात यह हैं कि कुछ ब्लड ग्रुप के मरीज खून न मिलने के कारण दम तोड़ देते हैं।
एबी निगेटिव ग्रुप का ब्लड पूरे राज्य के ब्लड बैंक में उपलब्ध नहीं है। राज्य के ब्लड बैंकों के लिए सरकार 26 करोड़ रुपये प्रत्येक साल आवंटित करती है। एलएलआरएम मेडिकल कालेज के ब्लड बैंक प्रमुख प्रो.टीवीएस आर्या का कहना है कि रक्तदान करना बहुत फायदेमंद रहता है। रक्तदान करने वालों में हृदय रोग होने का खतरा कम हो जाता है। रक्त में मौजूद लौह तत्व से हृदय रोग होता है। नियमित रक्तदान करने पर यह लौह तत्व कम हो जाता है, इस कारण हृदय रोग की संभावना कम हो जाती है। रक्तदान करने से शरीर में मौजूद कैलोरी भी जलती है।
डॉ. निशा मलिक ने बताया कि रक्तदान के बाद रक्तदाताओं के शरीर में ब्लड सेल की कमी आ जाती है। नया रक्त बनने के बाद नए सेल बनते हैं इस कारण बीमारियों का खतरा भी कम हो जाता है।
पीएल शर्मा जिला अस्पताल के डॉ. मनोज बताते हैं कि कुछ ब्लड ग्रुप ऐसे हैं जिनकी मांग की पूर्ति करना आसान नहीं है। राज्य के अन्य जगहों से भी मरीज आ जाते हैं, लेकिन ब्लड उपलब्ध न होने के कारण मरीज को नहीं मिल पाता है।

इनका नहीं लिया जाता है खून
हेपेटाइटिस बी, सी
एचआईवी ग्रसित
सिफलिस के पीड़ित
मलेरिया रोगी
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ओ, आरएच डी निगेटिव को यूनिवर्सल रक्तदाता कहा जाता है, जबकि एबी, आरएच डी पॉजिटिव यूनिवर्सल स्वीकार कर्ता होते हैं।

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