कबाड़ी बाजार में छापा, 11 लड़कियां मुक्त कराईं

Meerut Updated Sat, 22 Sep 2012 12:00 PM IST
मेरठ। कबाड़ी बाजार में एक बार फिर एनजीओ और पुुलिस ने संयुक्त छापा मारकर 11 लड़कियों को मुक्त कराया। इनमें तीन लड़कियों नेपाल, चार पश्चिम बंगाल, एक आसाम, एक उत्तराखंड और दो यूपी की हैं। दो कोठा संचालिका भी पुलिस हिरासत में हैं। मुक्त कराई गईं सभी लड़कियों को महिला थाने में रखा गया है।
एनजीओ के प्रोजेक्ट कोआर्डिनेटर की तरफ से पुलिस को तहरीर दी गई है। कबाड़ी बाजार में छह महीने के भीतर यह तीसरा छापा है। हर बार दूसरे प्रदेशों से लाई गईं लड़कियां बरामद हो रही हैं।
शुक्रवार देर शाम एनजीओ रेस्क्यू फाउंडेशन दिल्ली की टीम और महिला थाना पुलिस ने कबाड़ी बाजार के कोठा नंबर 12 पर छापा मारा। छापे से वहां हड़कंप मच गया और लड़कियों को छुपाने की कोशिश की जाने लगी। बावजूद इसके 11 लड़कियों को मुक्त कराया गया। साथ ही दो कोठा संचालिकाओं को भी हिरासत में लिया गया है। सभी को महिला थाने पहुंचा दिया गया। एनजीओ के कोआर्डिनेटर जेआर सरन, हेमलता और त्रिवेणी आचार्या ने बताया कि उन्हें गृह मंत्रालय की ओर से नेपाल की एक युवती के बारे में सूचना दी गई थी कि वह मेरठ के कबाड़ी बाजार में है। इसके बाद उन्होंने टीम के सदस्यों को कबाड़ी बाजार में भेजकर गुपचुप ढंग से जानकारी कराई। लड़की के यहीं होने की पुष्टि के बाद छापा मारा। कबाड़ी बाजार में इससे पहले 27 जुलाई को भी छापा लगा था, जिसमें 27 युवतियां मुक्त कराई गई थी। उनमें दो पश्चिम बंगाल की थीं। महिला थाना प्रभारी रीता शुक्ला का कहना है कि एनजीओ की तरफ से दी जा रही है तहरीर के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।
प्यार में छली गई युवतियां पहुंचा दी कोठे पर
मेरठ। खुद को फौजी बताने वाले फरेबी आशिक ने नेपाल के होटल में वेटर का काम करने वाली भोली भाली लड़की को पहले तो अपने प्रेम जाल में फंसाया, मंदिर ले जाकर शादी भी की और फिर उसे पुणे स्थित एक कोठे पर छोड़कर फरार हो गया। इसके बाद उसे दिल्ली के कोठा नंबर 57 पर बेचा गया और फिर वहां से मेरठ के कबाड़ी बाजार पहुंचा दिया गया। छापामार कार्यवाही में मुक्त कराई गई युवतियों की जब एनजीओ वालों ने फोन पर परिजनों से बात कराई, तो वह सहसा ही फफक पड़ी और बोली कि मैं अपने घर जाना चाहती हूं।
प्यार में छली गई नेपाली युवती के अलावा दूसरी लड़कियों की भी दुखभरी कहानी कुछ ऐसी ही है। आसाम की रहने वाली युवती ने बताया कि टेलीफोन पर उसकी एक युवक से दोस्ती हुई। युवक ने कहा कि तुम कोलकाता आ जाओ, तो शादी करके दोनों वहीं पर रहेंगे। प्रेमी के बहकावे में वह कोलकाता पहुंच गई, लेकिन प्रेमी नहीं मिला। इसके बाद उसे एक कथित दीदी ने दिल्ली लाकर बेच दिया और फिर वहां से मेरठ के कबाड़ी बाजार में लाकर बेचा गया। इतना ही नहीं एक युवती ऐसी भी मुक्त कराई गई, जिसे एक महिला ही नौकरी लगवाने के नाम पर नेपाल से लेकर आई, मगर काम के नाम पर लगा दिया गलीच धंधे में। इस तरह की युवतियां यहां कोई छह महीने से कबाड़ी बाजार में रह रही है, तो कोई एक साल से।
सिवाय रोटी के कुछ नहीं मिलता
मेरठ। कबाड़ी बाजार से छापेे में मुक्त कराई गई युवतियों ने बताया कि कोठा संचालिका बहुत ज्यादती करती हैं। उन्हें पेट भरने के लिए सिर्फ रोटी दी जाती है। बाकी उनसे कह दिया जाता है कि जब दो तीन साल में अपने घर जाओगी, तो तुम्हारी कमाई दे देंगे, मगर किसी को कुछ नहीं दिया जाता। एक युवती ने बताया कि जब वह गलीज धंधा करने से इंकार करती हैं, तो धमकी दी जाती है कि तुम्हें यहीं मार मारकर सड़ा देंगे। यह भी बताया कि जब भी छापा लगता है, तो युवतियों को जबरन छिपा दिया जाता है। यहां पर कोठा संचालिका की मैनेजर रहती हैं, जबकि मालकिन तो लोनी में रहती है।

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