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एफडीआई : अधिकांश ने नकारा तो कुछ ने स्वीकारा

Meerut Updated Sun, 16 Sep 2012 12:00 PM IST
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मेरठ। खुदरा व्यापार में विदेशी पूंजी निवेश (एफडीआई) को लेकर हालांकि स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन इसे लेकर सभी में उत्सुकता बनी है। व्यापारियों और किसानों का बड़ा तबका जहां इसका विरोध कर रहा है। वहीं कुछ इसका समर्थन भी कर रहे हैं।
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व्यापारी नेता गोपाल अग्रवाल, अरुण वशिष्ठ, नवीन गुप्ता, शैलेंद्र अग्रवाल के अनुसार एफडीआई से ज्यादा नुकसान किराना व्यापार को होगा। बड़ी कंपनियां जब अपना रिटेल काउंटर खोलेंगी तो खुदरा व्यापार चौपट हो जाएगा। बेरोजगारी भी बढ़ेगी। नवीन गुप्ता बताते हैं वॉलमार्ट जैसे बड़े काउंटर का इसलिए ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा था, क्योंकि थोक व्यापारी खुदरा व्यापारी को उधार देकर व्यापार संचालित कर रहे हैं। वहीं वॉलमार्ट जैसी कंपनियां सिर्फ कैश पर ही व्यापार करती हैं, लेकिन जब खुदरा व्यापार काउंटर खुल जाएंगे तो सभी पर प्रभाव पड़ेगा।
कसबों में पड़ेगा असर
इसका प्रभाव कसबों पर भी पड़ेगा। गोपाल अग्रवाल के अनुसार अभी तक कसबों में उधार का व्यापार ज्यादा होता है, लेकिन जब थोक और खुदरा व्यापार पर बड़ी कंपनियों का कब्जा होगा तो कसबों के दुकानदारों को भी कैश में ही कारोबार करना पड़ेगा। इससे कारोबार प्रभावित होना तय है। गुर्जर नेता भगवत सिंह बैंसला एफडीआई का समर्थन करते हैं। उनके अनुसार इससे जनता को मिलावटयुक्त सामान नहीं मिलेगा और न ही दाम को लेकर धोखाधड़ी होगी।
पैसा कैश मिलेगा तो बुराई क्या है
किसान जालिम सिंह, अजय और हरकेश अभी भी कांट्रेक्ट पर आलू पैदा करते हैं। अजय के अनुसार वो हर साल चंबल, दयाल और सेंचुरी जैसी कंपनियों से कांट्रेक्ट करते हैं। कंपनी उनसे पैसा लेकर बीज देती है। अजय के अनुसार इन कंपनियों को माल देने के बाद भुगतान तुरंत हो जाता है। यदि दाम कम भी होता है, तो कांट्रेक्ट में तय रेट के अनुसार ही कंपनी उनका माल खरीदती है।
वहीं जनपद के बड़े किसानों में शुमार बहलोलपुर के सुदेशपाल सिंह भी आलू की खेती करते है। उनका कहना है कि कंपनी जो आलू खरीदती है उसकी ग्रेडिंग करती है। जितना आलू पैदा होता है, उसका आधा ही वह तय रेट पर लेती है। बाकी आलू मनमाने दाम पर या तो कंपनी को ही देना पड़ता है, या फिर सस्ते दाम पर बाजार में बेचना पड़ता है। अगर वह अपने स्तर पर आलू बेचते है तो कीमत कहीं ज्यादा मिलती है। लेकिन अब उनके मुनाफे को कंपनी तय करेगी।
एफडीआई को लेकर व्यापारी सम्मेलन कल
मेरठ। एफडीआई को लेकर व्यापारिक संगठनों ने 17 सितंबर को व्यापारियों का सम्मेलन होगा। इसमें 20 सितंबर को होने वाले भारत बंद पर भी निर्णय लिया जाएगा।
संयुक्त व्यापार संघ के महामंत्री नवीन गुप्ता ने बताया कि जनपद के सभी व्यापारियों को सम्मेलन में बुलाया गया है। मुख्य रूप से एफडीआई मुद्दा रहेगा। 20 सितंबर को घोषित भारत बंद की रणनीति पर भी चर्चा की जाएगी। नगर निगम में निर्वाचित हुए व्यापारी प्रतिनिधियों को भी सम्मानित किया जाएगा।
वहीं दूसरी ओर समाजवादी व्यापार सभा के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल अग्रवाल ने राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन में केंद्र सरकार पर जनविरोधी काम करने का आरोप लगाया। खुदरा व्यापार में विदेशी पूंजी निवेश को रोकने की मांग की। गोपाल अग्रवाल ने कहा है कि कांग्रेस सरकार आत्मघाती कदम उठाते हुए देश को विदेशी पूंजीपतियों को बेच रही है।
उधर, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के जिला महामंत्री अरविंद कुमार गुप्ता ने 20 सितंबर के बंद को समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि उनका संगठन इसमें पूरा समर्थन देगा।

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