विज्ञापन

शहर के बंदर किसके अंडर!

Meerut Updated Sun, 19 Aug 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
ख़बर सुनें
मेरठ। शहर के लोग बंदरों से परेशान हैं। इनसे निजात दिलाने की जिम्मेदारी भी कोई लेने को तैयार नहीं है। बंदरों को पकड़ने के लिए वन विभाग फंड नहीं होने की बात कह रहा है। वहीं, नगर निगम का कहना है कि उसके पास बंदर पकड़ने की कोई तकनीकी जानकारी नहीं है और न ही यह काम उनका है। गंगानगर से लेकर सूरजकुंड, शहर सर्राफा, दाल मंडी सहित विभिन्न इलाकों में बंदर घरों में घुसकर नुकसान पहुंचा रहे हैं। पीएल शर्मा जिला अस्पताल में 35 से 40 बंदर काटे के मरीज रोजाना पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन
केस : 1
गांधीनगर निवासी सुरजीत कौर (60) छत से कपड़े उतार रही थीं। पीछे से आए भारी भरकम बंदर ने उन पर झपट्टा मार दिया। उनके सिर पर बंदर के पंजों के वार से खून निकल आया।
केस : 2
बंदरों के झुंड द्वारा आए दिन लालकुर्ती स्थित भागीरथ आर्य समाज कन्या इंटर कालेज में धावा बोलने से शिक्षण कार्य बाधित हो रहा है।
केस : 3
गंगानगर बीएसएनएल कालोनी में 35 से 40 बंदरों का झुंड डेढ़ साल से लोगों को परेशान कर रहा है। कालोनी के सौ से ज्यादा परिवारों के बच्चों ने बंदरों के डर से बाहर खेलना बंद कर दिया है। दो दिन पूर्व कैलाश रजत की पत्नी को बंदर ने काट लिया था। कालोनी में छह माह के भीतर दो दर्जन से ज्यादा लोगों को बंदर काट चुके हैं।
कौन पकड़ेगा बंदर
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा राजवीर सिंह का कहना है कि बंदर, वन्य जीव हैं इन्हें पकड़ने की जिम्मेदारी वन विभाग की है। वहीं, डीएफओ ललित कुमार वर्मा ने बताया कि शासन द्वारा वन विभाग को बंदरों को पकड़ने के लिए कोई फंड नहीं दिया जाता है। अगर क्षेत्र के लोग बंदर पकड़वाना चाहते हैं तो उन्हें विभाग बंदर पकड़ने के विशेषज्ञों को उपलब्ध करा सकता है। बंदर पकड़वाने का खर्च लोगों को ही वहन करना होगा।
ऐसे भगाएं बंदर ...........
वन अधिकारी जीएस खुशारिया ने बताया कि समूह में रहने वाले बंदर अपना वर्चस्व दिखाने के लिए घुड़की देते हैं, जिससे डरना नहीं चाहिए। जिस बंदर की पूछ बंद मुठ्ठी की तरह हो और सिर के ऊपर तक हो वह एल्फा बंदर होता है, यही समूह का मुखिया होता है। इस पकड़ने पर सारे बंदर काबू में आ जाते हैं।
- छत पर आठ से दस फुट लंबा बांस या डंडा रखें। डंडे से बंदरों पर सीधे वार न कर दीवार पर डंडा मारें।
- पत्थर, गुलेल रखना चाहिए। पटाखों वाली बंदूक या पिस्तौल से आवाज करने से बंदर भाग जाते हैं। लगातार तीन चार दिन ऐसा करने से बंदर उस छत या मकान पर आना बंद कर देते हैं।
प्राइमेटोलाजिस्ट रजत भार्गव ने बताया कि खाने पीने की सामग्री बंदरों को आकर्षित करती हैं। छत पर खाना नहीं रखें। बच्चे स्कूल से आते समय टिफिन हाथ में नहीं पकड़ें।
- जहां बंदर की संभावना हो वहां अकेले न जाएं।
- छत की मुंडेर पर खड़े नहीं हों। छत पर जाते समय आवाज करते हुए जाएं।
रोजाना आते हैं चालीस मरीज
प्यारेलाल जिला अस्पताल के एंटी रैबीज विभाग में रोजाना लगने वाली 120 से 150 वैक्सीनों में से लगभग चालीस प्रतिशत बंदरों के काटे मरीजों को लग रही हैं। डा. अंकित ने बताया कि कुत्ते और बंदरों के लिए एक ही इंजेक्शन लगता है। पहला इंजेक्शन 24 घंटे के अंदर लगना चाहिए। अगर बंदर दस दिनों के अंदर मर जाता है तब पूरा कोर्स करना चाहिए।
बंदर काटे तो यह सावधानी बरतें
कटे हुए अंग को पानी की धार से 15 से 20 मिनट धोना चाहिए, साबुन से घाव को भली भांति साफ करना चाहिए
कटे स्थान पर पट्टी नहीं बांधनी चाहिए, जहां तक संभव हो घाव पर टांके नहीं लगवाने चाहिए।

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन

Most Read

Chandigarh

जालंधरः नहर के किनारे झाड़ियों में रोती बिलखती मिली दो दिन की नवजात, एक कपड़ा नहीं था

मॉर्निंग वॉक करने निकले शख्स की आंखें भर आईं, जब उसने नहर के किनारे झाड़ियों में पड़ी नवजात बच्ची को देखा। वो भूख के मारे रो-रोकर बेहाल हो रखी थी।

23 सितंबर 2018

विज्ञापन

Related Videos

मेरठ पुलिस ने पकड़े दो चीनी नागरिक, ये है वजह

मेरठ पुलिस ने सोमवार को दो चीनी नागरिकों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए दोनों चीनी नागरिकों ने नशे की  हालत में अपनी फॉर्च्यूनर से कई गाडियों में टक्कर मार दी, जिसमें एक व्यापारी परिवार समेत करीब एक दर्जन लोग घायल हो गए।

17 सितंबर 2018

Related

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree