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नगर निगम : घूस दो और घर बैठे वेतन लो

Meerut Updated Sat, 18 Aug 2012 12:00 PM IST
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मेरठ। इन दिनों नगर निगम में पैसा दो मौज करो का चलन जोरों पर है। वार्डों में सफाई का काम नियमित रूप से चल रहा है या नहीं, सफाई कर्मी ड्यूटी पर जाते हैं कि नहीं, आम जनता की शिकायत पर अमल हो रहा है कि नहीं इसे देखने वाला कोई नहीं है। कहने को तो निगम में सफाई कर्मियों की फौज है, फिर भी सड़कें और मोहल्ले गंदगी के कारण बदहाल हैं। निगम क्षेत्र में 300 पार्क हैं, जिनमें से अधिकांश कूड़ाघर बने हुए हैं। नगर आयुक्त भी स्वीकार करते हैं कि सफाई नायकों की जेब गर्म कर सफाई कर्मी घर बैठे वेतन ले रहे हैं।
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मेरठ नगर निगम 80 वार्डों को स्वच्छ रखने के लिए 3400 सफाई कर्मचारी तैनात हैं। इनमें नियमित कर्मियों की संख्या 1200 है। नियमानुसार बेहतर सफाई व्यवस्था के लिए वार्डों को सेवित और असेवित श्रेणी में बांटा गया है। असेवित वार्डों को पिछड़ा मानते हुए सफाई के लिए अधिक कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। लेकिन हजारों कर्मचारियों की फौज के बावजूद हालात बदतर हैं। यही स्थिति पार्कों की है। सूत्रों की मानें तो ड्यूटी में चलने वाला खेल ही मौजूदा हालात की असल जड़ है। वर्तमान में नगर निगम में तैनात स्थायी सफाई कर्मचारी को हर माह 12 से 14 हजार रुपये वेतन दिया जाता है। यहीं से पूरा खेल शुरू होता है। काम पर नहीं आने के बदले हर माह वार्ड में नियुक्त सफाई नायक को एक से दो हजार रुपये का भुगतान किया जाता है। इसके एवज में ड्यूटी पर आए बगैर ही संबंधित कर्मचारी की रजिस्टर में हाजिरी भर दी जाती है। महानगर के मध्य हिस्से में बने और पुराने पार्कों में शुमार किए जाने वाले टाऊन हॉल और लेडीज पार्क समेत 300 पार्कों की दुर्दशा इस कड़वी हकीकत को बयां कर रही है।
क्या कहते हैं नगर आयुक्त और पार्षद
: ड्यूटी में किए जाने वाले खेल के बाबत मुझे भी शिकायतें प्राप्त होती रही हैं। पिछले दिनों उपस्थिति नियम को सख्ती से लागू किया गया है। कुछ कर्मचारियों के विरुद्ध निलंबन से लेकर स्थानांतरण तक की कार्रवाई की गई है- राजकुमार सचान, नगर आयुक्त
: वास्तव में पार्कों की स्थिति बेहद खराब है। हालात बेहतर करने के लिए सख्त कदम उठाए जाने की जरूरत है- विजय आनंद अग्रवाल और सुनील दत्त सैनी पार्षद
: वर्तमान में हमारे पास मात्र 13 नियमित माली हैं। संविदा पर तैनात मालियों की संख्या भी 15 है। सभी कर्मचारियों से नियमित रूप से कार्य लिया जाता है। ड्यूटी में पैसों के खेल का आरोप गलत है
- सुनील सोम, माली सुपरवाइजर

80 वार्डों में 3400 सफाई कर्मचारी तैनात
नियमित कर्मियों की संख्या 1200
स्थायी सफाई कर्मचारी का वेतन 12 से 14 हजार रुपये प्रति माह
सफाई नायक को एक से दो हजार रुपये देने पर काम से छुट्टी
नतीजा : अधिकांश पार्क बन चुकें हैं कूड़ाघर, गंदगी से अटी पड़ी हैं सड़कें और मोहल्ले

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